बिहार के अंग क्षेत्र, कोसी और सीमांचल के लोगों के लिए रविवार बेहद खास और खुशियों भरा संदेश लेकर आया है. गंगा नदी पर उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाले लाइफलाइन विक्रमशिला सेतु पर वाहनों का परिचालन एक बार फिर से पूरी तरह बहाल हो गया है. आज सुबह बिहार सरकार के पथ निर्माण मंत्री इंजीनियर कुमार शैलेंद्र ने पुल पर नवनिर्मित बेली ब्रिज का फीता काटकर औपचारिक उद्घाटन किया. इसके तुरंत बाद, आम लोगों और हल्के वाहनों की आवाजाही के लिए सेतु को आवागमन के लिए खोल दिया गया. बता दें कि पिछले 35 दिनों से भीषण जाम और आवागमन ठप होने की मार झेल रहे स्थानीय निवासियों ने इस शुरुआत पर जश्न मनाया और राहत की सांस ली है. हालांकि, वर्तमान में आवागमन के लिए कुछ नियमों के साथ आम लोगों के लिए सेतु खोल दिया गया है और फिलहाल सेतु पर वन-वे लागू रहेगा. इसके साथ ही खास यह कि इस पुल की रोजना ड्रोन से मॉनिटरिंग की जाएगी.
जब टूट गई थी लाइफलाइन
यह पूरी कहानी बीआरओ की काबिलियत और प्रशासनिक मुस्तैदी की बेहतरीन तालमेल की कहानी है. बता दें कि बीते 3 मई की रात को विक्रमशिला सेतु के पिलर नंबर 2 और 3 के बीच का एक बड़ा आरसीसी स्लैब अचानक टूटकर धंस गया था. सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत भारी और हल्के वाहनों की एंट्री बैन कर दी थी. इस हादसे के बाद भागलपुर का संपर्क उत्तर बिहार समेत झारखंड और बंगाल से पूरी तरह कट गया था. लोग अपनी जान जोखिम में डालकर छोटी नावों और जहाजों के सहारे गंगा पार करने को मजबूर थे. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने केंद्र से मदद मांगी, जिसके बाद देश की सबसे जांबाज निर्माण विंग बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (BRO) को मोर्चे पर उतारा गया.
बीआरओ का ‘वॉर लेवल’ चमत्कार
बीआरओ की 100 सदस्यीय विशेष इंजीनियरों और जवानों की टीम ने इस भारी-भरकम काम को एक मिशन के रूप में लिया. टीम ने दिन-रात, बिना रुके ‘वॉर लेवल’ (युद्ध स्तर) पर काम किया. आम तौर पर किसी बड़े आरसीसी और हैंगर ट्रस पुल के टूटे हिस्से को संवारने में महीनों का वक्त लगता है. लेकिन बीआरओ के जांबाजों ने महज 35 दिनों के भीतर पूरे मलबे को साफ कर वहां एक या दो नहीं, बल्कि पूरे चार मजबूत बेली ब्रिज असेंबल कर खड़े कर दिए. भारत के सिविल इंजीनियरिंग इतिहास में यह अपने आप में एक अनोखा और दुर्लभ प्रयोग माना जा रहा है, जहां एक बड़े कंक्रीट पुल के ऊपर इतनी तेजी से स्टील का बेली ब्रिज सुपरस्ट्रक्चर तैयार किया गया है.
बता दें कि पुल को आम जनता के लिए खोलने से पहले, शनिवार को भागलपुर के जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी और बीआरओ की संयुक्त टीम ने इस पर भारी ट्रकों को दौड़ाकर फाइनल ट्रायल रन किया था. सुरक्षा जांच में बेली ब्रिज पूरी तरह पास रहा, जिसके बाद आज इसे हरी झंडी दिखाई गई. सुरक्षा कारणों से फिलहाल इस ब्रिज से केवल छोटे और हल्के वाहनों जैसे कार, ऑटो, बाइक और एंबुलेंस को ही गुजरने की इजाजत दी गई है. बड़े कमर्शियल और मालवाहक वाहनों के लिए अधिकतम 10 टन की वजन सीमा तय की गई है. ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए पुल पर वन-वे (One-Way) सिस्टम लागू किया गया है.
भागलपुर के बाजार और जनता में खुशी की लहर
विक्रमशिला सेतु के दोबारा चालू होने से न सिर्फ मुसाफिरों का सफर आसान होगा, बल्कि भागलपुर की स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी पंख लगेंगे. पिछले एक महीने से शहर की मंडियों में फल, हरी सब्जियां और दूध की आपूर्ति ठप होने से आम जनता महंगाई से बेहाल थी. अब बेली ब्रिज के एक्टिव होते ही जरूरी सामानों की सप्लाई चेन फिर से सामान्य हो जाएगी. प्रशासन ने ट्रैफिक नियमों का पालन कराने के लिए पुल के दोनों छोरों पर अस्थाई पुलिस पिकेट और एक हाई-टेक कंट्रोल रूम भी स्थापित किया है. बीआरओ के इस ऐतिहासिक प्रयास ने भागलपुर को समय से पहले एक बेहद खूबसूरत और जरूरी तोहफा दे दिया है.







