बिहार की सियासत में इन दिनों बंद कमरों की बैठकों, नेताओं की बढ़ती सक्रियता और गठबंधन के भीतर चल रही चुपचाप रणनीति ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है. दरअसल बिहार विधान परिषद चुनाव भले संख्या का खेल दिखता हो, लेकिन इस बार इसकी अहमियत कहीं ज्यादा मानी जा रही है. एनडीए के भीतर कौन कितना मजबूत है, किस सहयोगी की कितनी पूछ है और विधानसभा चुनाव से पहले किसे कितना राजनीतिक वजन दिया जाएगा, इसकी तस्वीर अब धीरे-धीरे साफ होने लगी है. यही वजह है कि सीटों का यह गणित अब बिहार की राजनीति का सबसे बड़ा चर्चा का विषय बन चुका है.
दरअसल बिहार विधान परिषद की 9 सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर एनडीए में सीट शेयरिंग का फॉर्मूला लगभग तय माना जा रहा है. सूत्रों के अनुसार बीजेपी और जेडीयू 3-3 सीटों पर उम्मीदवार उतार सकती हैं, जबकि चिराग पासवान की एलजेपी (रामविलास) और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) को 1-1 सीट मिलने की संभावना है. इसके अलावा एक सीट पर उपचुनाव भी होना है, जिसको लेकर अंतिम स्तर पर चर्चा जारी है. चुनाव आयोग इसी महीने चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर सकता है. 28 जून को परिषद की 9 सीटें खाली हो रही हैं, ऐसे में सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं.
NDA में सीट बंटवारे का फॉर्मूला लगभग तय!
सूत्रों के मुताबिक एनडीए के भीतर कई दौर की बातचीत के बाद सीटों का प्रारंभिक फॉर्मूला तैयार कर लिया गया है। बीजेपी और जेडीयू गठबंधन की दो सबसे बड़ी पार्टियां होने के कारण बराबरी के आधार पर 3-3 सीटों पर दावेदारी कर रही हैं. वहीं सहयोगी दलों को भी संतुलित प्रतिनिधित्व देने की रणनीति के तहत एलजेपीआरवी और आरएलएम को एक-एक सीट दिए जाने की चर्चा है. जानकारों का मानना है कि बीजेपी और जेडीयू की ओर से छोटे सहयोगियों को भी सम्मानजनक हिस्सेदारी देने की कोशिश की जा रही है.
इसी महीने हो सकती है चुनाव तारीखों की घोषणा
सूत्र बताते हैं कि बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर चुनाव आयोग जल्द अधिसूचना जारी कर सकता है. संभावना जताई जा रही है कि मई के अंतिम सप्ताह या जून की शुरुआत में चुनाव कार्यक्रम घोषित हो सकता है. 28 जून 2026 को विधान परिषद की 9 सीटों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है. ऐसे में संवैधानिक प्रक्रिया के तहत समय पर चुनाव कराना जरूरी है. इन सीटों पर चुनाव के बाद विधान परिषद की राजनीतिक तस्वीर में भी बदलाव देखने को मिल सकता है.
राज्यसभा में मौका नहीं पाने वालों को मिल सकता है अवसर
एनडीए के भीतर इस बात की भी चर्चा है कि जिन नेताओं को हाल के राज्यसभा चुनाव में मौका नहीं मिला, उन्हें विधान परिषद भेजकर संतुलन साधा जा सकता है. बीजेपी और जेडीयू दोनों के पास ऐसे कई वरिष्ठ नेता और संगठन से जुड़े चेहरे हैं, जिन्हें पार्टी समायोजित करना चाहती है. एलजेपी (रामविलास) और आरएलएम भी अपने-अपने सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए मजबूत उम्मीदवार उतारने की तैयारी में हैं. माना जा रहा है कि जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखकर उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा.







