केंद्र सरकार भारत के व्यापार, निवेश और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत बनाने के लिए लगातार कदम उठा रही है. केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि पिछले एक हफ्ते में सरकार ने कई देशों के साथ उच्चस्तरीय बैठकें की हैं. इन बैठकों का उद्देश्य व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग को बढ़ाना था.
मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा कि चिली, ओमान, नीदरलैंड, मालदीव, जर्मनी और मिस्र जैसे देशों के साथ अहम बातचीत हुई. सरकार का मानना है कि बदलती ग्लोबल आर्थिक परिस्थितियों के बीच भारत को नए व्यापारिक अवसरों और विदेशी निवेश की जरूरत है. इन बैठकों के जरिए भारत अपने निर्यात को बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है.
मैन्युफैक्चरिंग, एक्सपोर्ट और लॉजिस्टिक्स पर जोर
सरकार ने मुंबई में भी कई महत्वपूर्ण बैठकें कीं, जिनमें सेवा व्यवस्था, फूड सेफ्टी सिस्टम, एक्सपोर्ट क्वालिटी और संस्थागत समन्वय(Institutional coordination) को बेहतर बनाने पर चर्चा हुई. सरकार का लक्ष्य है कि भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता को और मजबूत बनाया जाए ताकि ग्लोबल मार्केट में उनकी मांग बढ़ सके.
इसके अलावा, मंत्रालय ने सीफूड एक्सपोर्ट, लोकल मैन्युफैक्चरिंग, वैल्यू एडिशन और रोजगार बढ़ाने को लेकर भी समीक्षा बैठकें कीं. ये बैठकें SCALE रोडमैप के तहत आयोजित की गईं. सरकार घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ-साथ ऐसे सेक्टर्स पर फोकस कर रही है जिनमें एक्सपोर्ट की बड़ी संभावनाएं हैं. इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं.
किन फैक्टर्स पर है फोकस?
लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारों को लेकर भी सरकार सक्रिय नजर आई. सरकार ने LEADS Report 2025 जारी की और LEAPS Awards 2025 प्रदान किए. इनका उद्देश्य राज्यों में लॉजिस्टिक्स सिस्टम को बेहतर बनाना, सप्लाई चेन मजबूत करना और कारोबार करने में आसानी बढ़ाना है. यह पहल प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना से जुड़ी हुई है, जिसका मकसद इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाकर लॉजिस्टिक्स लागत कम करना है.
निर्यात में मजबूत बढ़त
ग्लोबल इकोनॉमिक चुनौतियों के बावजूद भारत के निर्यात में मजबूत बढ़त देखने को मिली है. मंत्री के अनुसार, अप्रैल 2026 में भारत का कुल निर्यात 13.59 प्रतिशत बढ़कर 80.80 अरब डॉलर पहुंच गया, जबकि अप्रैल 2025 में यह 71.13 अरब डॉलर था.
सरकार का मानना है कि बेहतर लॉजिस्टिक्स, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, नए व्यापार समझौते और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने वाली नीतियां भारत की आर्थिक वृद्धि को नई रफ्तार दे सकती हैं. लगातार बढ़ते निर्यात और विदेशी साझेदारियों से आने वाले समय में भारत की वैश्विक व्यापारिक स्थिति और मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है.







