अब तेजस्वी यादव भी लालू की राह चलेंगे। राजद में A टू Z (सभी जाति) की जगह अब एक बार फिर से MY को ही तवज्जो दी जाएगी। सम्राट सरकार के कैबिनेट विस्तार के अगले दिन तेजस्वी यादव ने अपनी रणनीति का खुलासा कर दिया है।
तेजस्वी राजद के संगठन में बड़ा फेरबदल करने जा रहे हैं। जिला से लेकर प्रकोष्ठ स्तर के नेताओं को बदला जाएगा। पार्टी के सीनियर लीडर के साथ मिलकर तेजस्वी लगातार इस पर मंथन कर रहे हैं। जल्द नए संगठन का गठन किया जा सकता है।
एक सवाल के जवाब में तेजस्वी यादव ने कहा, ‘हम लोग अपने संगठन को पूरी तरीके से रिफॉर्म करने जा रहे हैं। हम अपने कैडर को मजबूत करेंगे। जिला से लेकर प्रकोष्ठ तक में सिद्धांत और विचारधारा को मानने वाले लोगों को ही जगह दी जाएगी।’
अब 4 पॉइंट में समझिए पुराने फॉर्मूले पर क्यों लौट रहे हैं तेजस्वी
1. तेजस्वी के प्रयोग के कारण 75 से 25 पर आई पार्टी
2024 के लोकसभा चुनाव और 2025 के विधानसभा चुनाव में तेजस्वी यादव ने कैंडिडेट सिलेक्शन में बड़ा फेरबदल किया था। लालू यादव के 30 साल के टेस्टेड फॉर्मूले MY के टिकट को कम कर अन्य जातियों पर भी दांव लगाया था। लेकिन, इसका इन्हें फायदे से ज्यादा नुकसान हुआ। पार्टी 75 सीट से घटकर 25 सीट पर आ गई।

2. लोकसभा में कुशवाहा प्रयोग पास, विधानसभा में फेल
2024 लोकसभा चुनाव में तेजस्वी यादव का कोइरी पर ज्यादा फोकस रहा। लोकसभा की 40 सीटों में महागठबंधन ने 7 कुशवाहा उम्मीदवारों को टिकट दिया था। इनमें 3 कैंडिडेट RJD ने उतारे थे। इनमें से RJD के एक कैंडिडेट अभय कुशवाहा जीते थे। पार्टी ने इन्हें लोकसभा में नेता बना दिया।
विधानसभा चुनाव के दौरान तेजस्वी ने यादव के टिकट को कम कर भूमिहार और कुशवाहा कैंडिडेट की संख्या बढ़ा थी। इस चुनाव में यादव की संख्या को 58 से घटाकर 51 किया गया था। भूमिहारों की संख्या 1 बढ़ाकर 6 किया गया था। कुशवाहा कैंडिडेट को 8 से बढ़ाकर 16 कर दिया गया था।
इसके बाद भी भूमिहार और कुशवाहा दोनों का वोट बैंक राजद में कम हुआ। एक्सिस माय इंडिया के पोस्ट पोल सर्वे के मुताबिक, 24% कुशवाहा ने महागठबंधन को वोट किया, जो 2020 की तुलना में 3% कम है।
3. यादव और मुस्लिम वोटर्स राजद से दरके
तेजस्वी यादव के A टू z फॉर्मूले के कारण यादव और मुस्लिम वोटर्स भी राजद से दूर होने लगे। इसे दो एग्जांपल से समझिए।
पहला- यादव बहुल जिले मधेपुरा की 4 विधानसभा सीटों में मात्र एक सीट जीत पाई। अगर ओवर ऑल कोसी की बात करें तो यहां की 13 सीटों में मात्र 2 सीट राजद और 3 सीट महागठबंधन जीत पाया। यह इलाका कभी लालू प्रसाद यादव का प्रभाव क्षेत्र माना जाता था।
दूसरा- बिहार में मुस्लिमों का सबसे बड़ा इलाका सीमांचल माना जाता था। राजद से मोह भंग होने के बाद मुसलमानों ने AIMIM को नए विकल्प के तौर पर चुना। यहां की 24 सीटों में 5 सीटों पर AIMIM की जीत हुई। 14 सीटें NDA के खाते में गईं। राजद को इस इलाके से मात्र 1 सीट मिला था।
लालू यादव की 30 साल की राजनीति में RJD को 31% मुस्लिम और यादव का सपोर्ट मिला। इसे मंदिर और मंडल के जवाब में M-Y समीकरण कहा गया। 1995 के विधानसभा चुनाव में लालू यादव के नेतृत्व में जनता दल ने 167 सीटें जीती थीं। यह M-Y फॉर्मूले की पहली बड़ी जीत थी। इसके बाद 2005 तक लगातार लालू यादव इसी फॉर्मूले पर जीतते रहे।
4.अगले चुनाव में नीतीश नहीं सम्राट से मुकाबला
तेजस्वी यादव अब इस बात को अच्छे से समझ गए हैं कि अगले चुनाव में उनका मुकाबला नीतीश कुमार से नहीं बल्कि बीजेपी के सम्राट चौधरी से होगा। दोनों की कोशिश नीतीश कुमार के कोर वोट बैंक को हासिल करने की है। सम्राट चौधरी अभी से इस वोट बैंक की किलेबंदी करने में जुट गए हैं।
यही कारण है कि सम्राट के 35 मंत्रियों के कैबिनेट में लगभग 70 फीसदी मंत्री पिछड़ा-अति पिछड़ा और दलित कोटे से बनाए गए हैं। इन्हीं तीन कैटेगरी को नीतीश कुमार का कोर वोट बैंक माना जाता है। नीतीश की पॉलिटिक्स को आगे बरकरार रखने के लिए उनके बेटे निशांत कुमार को बिहार सरकार में मंत्री बना दिया गया है। ऐसे में अब तेजस्वी की इस कोर वोट बैंक में सेंधमारी मुश्किल लग रही है।
तीन साल से नहीं हुई है प्रदेश कमेटी की घोषणा
राजद के प्रदेश कमेटी की घोषणा आखिरी बार अप्रैल 2023 में हुई थी। तब प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह थे। इसके बाद जून 2025 में मंगनी लाल मंडल प्रदेश अध्यक्ष बने, लेकिन अभी तक इनकी टीम की घोषणा नहीं हुई है। तीन साल पहले बनी कमेटी में तेजस्वी यादव ने यादव- मुस्लिम से ज्यादा, ईबीसी, दलित और गैर यादव ओबीसी पर फोकस किया था। EBC को साधने के लिए ही राजपूत की जगह ईबीसी कोटे से आने वाले मंगनी लाल मंडल को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था, लेकिन इसका बहुत ज्यादा लाभ पार्टी को नहीं मिला।
हार के बाद MY को ताकत देने के तेजस्वी के दो संकेत
5 मार्च को नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद छोड़ने का ऐलान किया। इसके बाद तेजस्वी यादव ने अपने MY (मुस्लिम-यादव) समीकरण को मजबूत करने के लिए दो काम किए।
पहला-गठबंधन के लिए गिड़गिड़ाने वाले AIMIM को जोड़ा
राज्यसभा चुनाव के बहाने तेजस्वी यादव ने ओवैसी की पार्टी AIMIM को साधा। 14 मार्च को बिहार AIMIM चीफ अख्तरुल ईमान को मिलने के लिए बुलाया। समर्थन मांगा। अगले दिन 15 मार्च को ईमाम की दावत-ए-इफ्तार में शामिल हुए और मुस्लिमों को मैसेज दिया कि हम जरूरत पड़ने पर एक हैं।

दूसरा- दुख की घड़ी में राजबल्लभ के घर पहुंचे
7 अप्रैल को तेजस्वी यादव अपने पुराने साथी पूर्व विधायक राजबल्लभ यादव से मिलने उनके घर नवादा गए। राजबल्लभ के बेटे का हाल में निधन हुआ है। तेजस्वी यादव ने यादव वोटरों को मैसेज दिया कि सत्ता रहे या ना रहे साथ हैं। खास बात कि इस मुलाकात में तेजस्वी के साथ राजबल्लभ के विरोधी कौशल यादव भी साथ थे।राजबल्लभ की पत्नी विभा देवी JDU से विधायक हैं। विधानसभा चुनाव से पहले ही उन्होंने पाला बदला था।
परिवारवाद, नौकरी और महिला के मुद्दों पर सरकार को घेरेंगे
इसके साथ ही शुक्रवार को तेजस्वी यादव ने स्पष्ट कर दिया कि वो सरकार को उसी परिवारवाद के मुद्दे पर घेरेंगे, जिसके सहारे बीजेपी उनपर वार करती रही है। तेजस्वी यादव ने एक लिस्ट जारी कर पीएम मोदी से पूछा है कि अब वे किसे परिवारवाद का शहजादा कहेंगे।
उन्होंने कहा कि ऐसा पहली बार है कि दो नेता के बेटे (निशांत कुमार और दीपक प्रकाश) बिना किसी सदन के सदस्य बने मंत्री बन गए हैं। 17 से ज्यादा नेताओं के परिवार के लोगों को मंत्री बनाया गया है। तीन ऐसे हैं जो पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे हैं। अब भाजपा को परिवारवाद पर बोलने का कोई हक नहीं रह गया है।
तेजस्वी की यात्रा का तैयार हो रहा है ब्लू प्रिंट
तेजस्वी यादव जल्द बिहार की यात्रा पर भी निकल रहे हैं। उन्होंने कहा है कि इसका पूरा ब्लू प्रिंट प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल तैयार कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘महिलाओं के पैसे, सरकार के वादे, जनता को फ्री बिजली, युवाओं के रोजगार के मुद्दे को वो सड़क से सदन तक उठाएंगे।’







