लोकसभा में शुक्रवार को संविधान का 131वां संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका। इस बिल को पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता थी, लेकिन सरकार आवश्यक समर्थन जुटाने में विफल रही। जिससे एक बार फिर महिला आरक्षण पर बहस तेज हो गई है।
संविधान के मुताबिक, इस बिल के गिरने के बाद भी सरकार के पास महिला आरक्षण को लागू करने का रास्ता बना हुआ है, क्योंकि महिलाओं को संसद में 33 प्रतिशत रिजर्वेशन देने वाला नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 अभी भी प्रभावी है। 131वें संविधान संशोधन विधेयक के पारित न होने से आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया पर कोई भी असर नहीं पड़ेगा।
महिला आरक्षण लागू करने के सरकार के पास हैं विकल्प?
- केंद्र सरकार ने 131वें संविधान संशोधन विधेयक के जरिए लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव रखा था, जो असफल रहा। इसके बावजूद संविधान के अनुच्छेद 334A के तहत यह प्रावधान है कि जनगणना और परिसीमन के बाद महिला आरक्षण लागू कर सकते हैं। शुक्रवार को ही समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव के सवाल का जवाब देते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया था कि जनसंख्या का कार्य जारी है।
- संविधान के अनुसार, अगर जनसंख्या और परिसीमन 2029 से पहले पूरा हो जाता है, तो उसी समय से महिला आरक्षण लागू किया जा सकता है।
- साथ ही सरकार के पास एक और वैकल्पिक रास्ता है, जिसके तहत परिसीमन को अलग कर मौजूदा 543 सीटों पर ही आरक्षण को लागू कर सकती है। वहीं केंद्र सरकार ने 131वें संविधान संशोधन विधेयक पर वोटिंग से ठीक एक दिन पहले आधी रात 2023 में पारित हुआ नारी शक्ति वंदन अधिनियम का नोटिफिकेशन जारी कर दिया था।
इस बीच, परिसीमन और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े दो विधेयक अभी लंबित हैं, जिन्हें मौजूदा लोकसभा कार्यकाल में कभी भी पेश किया जा सकता है।
लोकसभा की सीटें बढ़ाना राजनीतिक चुनौती
फिलहाल लोकसभा में सीटों की मौजूदा संवैधानिक सीमा 550 ही बनी रहेगी। परिसीमन के बाद भी सीटों का विस्तार या फिर संशोधन के लिए भी संसद में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी। इसलिए माना जा रहा है कि सीटों की संख्या बढ़ाना राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण होगा। हालांकि, यदि सीटों की संख्या बढ़ाए बिना केवल निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को पुनर्निर्धारित किया जाए, तो आम सहमति बन सकती है।







