अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष अब 18वें दिन में प्रवेश कर चुका है, जिसमें दोनों पक्षों की सैन्य कार्रवाई और बयानबाजी, दोनों ही तेज हो गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई देशों से
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को दोबारा खोलने में मदद करने की अपील दोहराई. हालांकि उनके इस प्रस्ताव पर अमेरिका के कई सहयोगी देश अभी उत्साह नहीं दिखा रहे हैं. ईरानी मीडिया के मुताबिक राजधानी तेहरान में कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं, जिससे संकेत मिल रहा है कि संघर्ष और तेज हो गया है. इसी बीच वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका के करीब 200 सैनिक 7 खाड़ी देशों में हुए हमलों में जख्मी हुए हैं
दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हमला
इसी बीच संयुक्त अरब अमीरात एक बार फिर ईरान के निशाने पर आ गया है. दुबई एयरपोर्ट के पास ड्रोन हमलों की खबर सामने आई, जिसके कारण कई उड़ानों में देरी हुई और कुछ फ्लाइट्स को दूसरी जगह डायवर्ट करना पड़ा. ईरान,वह मुख्य रूप से अरब मुल्कों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को टार्गेट कर रहा है. इस क्रम में उनसे एक बार फिर यूएई के फुजैराह और शाह ऑयल डिपो पर हमला कर दिया. इस कारण यूएई और दुबई एयरपोर्ट को बंद कर दिया गया है. इतना ही नहीं यूएई ने अपने पूरे एयर स्पेस को बंद कर दिया है. इस जंग की वजह से दुबई को भारी नुकसान हो रहा है क्योंकि दुबई एक बेहद अहम इंटरनेशनल बिजनेस हब है.
फुजैराह ऑयल इंडस्ट्रीज एरिया पर ड्रोन अटैक
रिपोर्ट के मुताबिक ईरानी ड्रोन हमले के कारण फुजैराह ऑयल इंडस्ट्रीज एरिया में आग लग गई. अबू धाबी प्रशासन ने भी कहा है कि शाह ऑयल एंड गैस फील्ड में भी ड्रोन हमला हुआ है. इस कारण वहां भी भीषण आग लगी है. हालांकि इस हमलों में किसी व्यक्ति को कोई नुकसान नहीं हुआ है. खबरों के मुताबिक फुजैराह ऑयल इंडस्ट्रीज का पोर्ट यूएई का एक मात्र ऐसा ऑयल एक्सपोर्ट रूट है जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बाइपास करता है यानि इस हमले के बाद तेल के व्यापार के एक और रूट पर दिक्कत आ सकती है. ईरान ने पहले ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर रखा है. इस कारण दुनिया में तेल की कीमत आसमान छू रही है.
1300 से ज्यादा लोगों की मौत
संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने दावा किया कि अमेरिका और इजरायल के हमलों में अब तक 1,300 से अधिक लोग मारे गए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि हमलों में रिहायशी इलाकों और महत्वपूर्ण नागरिक ढांचे को जानबूझकर निशाना बनाया गया. वहीं अमेरिकी संस्था HRANA का कहना है कि मृतकों की संख्या 1,858 तक हो सकती है, जिनमें नागरिक और सैन्यकर्मी दोनों शामिल हैं. उधर लेबनान में भी हालात गंभीर हैं. वहां के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह के इजरायल पर हमले शुरू करने के बाद से इजरायली हमलों में कम से कम 773 लोगों की मौत हो चुकी है.
दुबई में लगे अमेरिका का रडार ध्वस्त
ईरान के एक ड्रोन हमले में सऊदी अरब के उत्तर-पूर्व में स्थित अल-क़ैसुमाह एयरपोर्ट पर लगा अमेरिकी निर्मित AN/FPS-117 अर्ली वॉर्निंग रडार नष्ट हो गया. यह रडार एयर डिफेंस सिस्टम का बेहद अहम हिस्सा माना जाता है, जो सैकड़ों किलोमीटर दूर से ही दुश्मन के विमान, मिसाइल और ड्रोन का पता लगाने में सक्षम होता है. इस हमले को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज़ से बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि ऐसे रडार किसी भी देश की हवाई निगरानी और शुरुआती चेतावनी प्रणाली की रीढ़ होते हैं.
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष अब 18वें दिन में प्रवेश कर चुका है, जिसमें दोनों पक्षों की सैन्य कार्रवाई और बयानबाजी, दोनों ही तेज हो गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई देशों से
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को दोबारा खोलने में मदद करने की अपील दोहराई. हालांकि उनके इस प्रस्ताव पर अमेरिका के कई सहयोगी देश अभी उत्साह नहीं दिखा रहे हैं. ईरानी मीडिया के मुताबिक राजधानी तेहरान में कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं, जिससे संकेत मिल रहा है कि संघर्ष और तेज हो गया है. इसी बीच वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका के करीब 200 सैनिक 7 खाड़ी देशों में हुए हमलों में जख्मी हुए हैं
दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हमला
इसी बीच संयुक्त अरब अमीरात एक बार फिर ईरान के निशाने पर आ गया है. दुबई एयरपोर्ट के पास ड्रोन हमलों की खबर सामने आई, जिसके कारण कई उड़ानों में देरी हुई और कुछ फ्लाइट्स को दूसरी जगह डायवर्ट करना पड़ा. ईरान,वह मुख्य रूप से अरब मुल्कों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को टार्गेट कर रहा है. इस क्रम में उनसे एक बार फिर यूएई के फुजैराह और शाह ऑयल डिपो पर हमला कर दिया. इस कारण यूएई और दुबई एयरपोर्ट को बंद कर दिया गया है. इतना ही नहीं यूएई ने अपने पूरे एयर स्पेस को बंद कर दिया है. इस जंग की वजह से दुबई को भारी नुकसान हो रहा है क्योंकि दुबई एक बेहद अहम इंटरनेशनल बिजनेस हब है.
फुजैराह ऑयल इंडस्ट्रीज एरिया पर ड्रोन अटैक
रिपोर्ट के मुताबिक ईरानी ड्रोन हमले के कारण फुजैराह ऑयल इंडस्ट्रीज एरिया में आग लग गई. अबू धाबी प्रशासन ने भी कहा है कि शाह ऑयल एंड गैस फील्ड में भी ड्रोन हमला हुआ है. इस कारण वहां भी भीषण आग लगी है. हालांकि इस हमलों में किसी व्यक्ति को कोई नुकसान नहीं हुआ है. खबरों के मुताबिक फुजैराह ऑयल इंडस्ट्रीज का पोर्ट यूएई का एक मात्र ऐसा ऑयल एक्सपोर्ट रूट है जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बाइपास करता है यानि इस हमले के बाद तेल के व्यापार के एक और रूट पर दिक्कत आ सकती है. ईरान ने पहले ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर रखा है. इस कारण दुनिया में तेल की कीमत आसमान छू रही है.
1300 से ज्यादा लोगों की मौत
संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने दावा किया कि अमेरिका और इजरायल के हमलों में अब तक 1,300 से अधिक लोग मारे गए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि हमलों में रिहायशी इलाकों और महत्वपूर्ण नागरिक ढांचे को जानबूझकर निशाना बनाया गया. वहीं अमेरिकी संस्था HRANA का कहना है कि मृतकों की संख्या 1,858 तक हो सकती है, जिनमें नागरिक और सैन्यकर्मी दोनों शामिल हैं. उधर लेबनान में भी हालात गंभीर हैं. वहां के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह के इजरायल पर हमले शुरू करने के बाद से इजरायली हमलों में कम से कम 773 लोगों की मौत हो चुकी है.
दुबई में लगे अमेरिका का रडार ध्वस्त
ईरान के एक ड्रोन हमले में सऊदी अरब के उत्तर-पूर्व में स्थित अल-क़ैसुमाह एयरपोर्ट पर लगा अमेरिकी निर्मित AN/FPS-117 अर्ली वॉर्निंग रडार नष्ट हो गया. यह रडार एयर डिफेंस सिस्टम का बेहद अहम हिस्सा माना जाता है, जो सैकड़ों किलोमीटर दूर से ही दुश्मन के विमान, मिसाइल और ड्रोन का पता लगाने में सक्षम होता है. इस हमले को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज़ से बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि ऐसे रडार किसी भी देश की हवाई निगरानी और शुरुआती चेतावनी प्रणाली की रीढ़ होते हैं.
दुबई में लगातार धमाके, ओमान में तेल टैंकर जला
ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी के के मुताबिक आज ओमान के पास एक तेल टैंकर पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ. वहीं दुबई और दोहा में भी लगातार धमाकों की आवाज सुनाई दे रही है. यहां मिसाइल अलर्ट भी जारी कर दिया गया था, जिसके बाद से धमाके सुने जा रहे हैं.
ईरान ने उड़ाया अमेरिका का मजाक- ‘ऑपरेशन फियर’
ईरान की सेना के संयुक्त कमांड खतम अल अनबिया सेंट्रल हेडक्वॉर्टर्स के प्रवक्ता इब्राहीम जुल्फागरी ने अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि युद्ध का फैसला सोशल मीडिया पर नहीं, बल्कि असली युद्ध के मैदान में होता है.उन्होंने ट्रंप के दावों का मज़ाक उड़ाते हुए कहा कि अमेरिका का सैन्य अभियान एपिक फ्यूरी नाम का नहीं बल्कि एपिक फियर कहलाना चाहिए. उन्होंने कहा कि ईरान की सशस्त्र सेनाएं पूरी तरह तैयार हैं और किसी भी हमले का जवाब मैदान में देंगी. उनके अनुसार युद्ध का परिणाम बयानबाजी या प्रचार से नहीं, बल्कि सैन्य ताकत और रणनीति से तय होता है.