यह पूरा विवाद बिहार बंद के दौरान हुए हंगामे से जुड़ा है. NEET पेपर लीक और लाठीचार्ज के विरोध में यह प्रदर्शन बुलाया गया था. तेज प्रताप यादव गांधी मैदान के पास प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे. इस दौरान उग्र भीड़ और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई और जमकर पथराव हुआ. हिंसा में गांधी मैदान के थानाध्यक्ष समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए थे.
सवाल-1ः तेज प्रताप यादव को किस आरोप में गिरफ्तार किया गया है?
जवाबः पटना पुलिस ने 25 जुलाई की रात जनशक्ति जनता दल (JJD) अध्यक्ष तेज प्रताप यादव को सिटी सेंटर मॉल से गिरफ्तार कर लिया। फिर उनको देर रात 12ः15 बजे छज्जू बाग स्थित मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत यानी 8 अगस्त तक के लिए बेऊर जेल भेज दिया गया।
गिरफ्तारी से पहले तेज प्रताप दोपहर में NEET पेपर लीक के खिलाफ हो रहे स्टूडेंट्स के प्रदर्शन में शामिल हुए थे। गांधी मैदान के गेट नंबर-10 के पास प्रदर्शन का नेतृत्व किया था। उस वक्त भी पुलिस ने हिरासत में लिया था, लेकिन कुछ मिनटों में ही उन्हें छोड़ दिया था।
स्टूडेंट्स के प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प और पथराव में गांधी मैदान थानाध्यक्ष अखिलेश मिश्रा और टीओपी प्रभारी प्रमोद कुमार समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। बताया जा रहा है कि इसी मामले में पुलिस ने तेज प्रताप को गिरफ्तार किया गया।
- तेज प्रताप के वकील जगन्नाथ सिंह ने बताया, ‘अब तक हमें कोई जानकारी नहीं दी गई है। मजिस्ट्रेट के निर्देश के बाद ही हमें गिरफ्तारी का मेमो दिया गया। हमें FIR की कॉपी भी नहीं दी गई। तेज प्रताप के खिलाफ मुख्य रूप से BNS की धारा 109 लगाई गई है। मतलब हत्या के प्रयास का केस है।’
- जगन्नाथ सिंह ने बताया, ‘तेज प्रताप यादव के खिलाफ FIR 26 जुलाई को दर्ज की गई थी, जबकि उन्हें 25 जुलाई की शाम लगभग 7:30 बजे एक मॉल से गिरफ्तार कर लिया गया था। सोमवार यानी 27 जुलाई को यादव की जमानत के लिए कोर्ट में अर्जी दाखिल करेंगे।’
सवाल-2ः तेज प्रताप को कितने दिन जेल में रहना होगा, कितनी सजा हो सकती है?
जवाबः पटना पुलिस ने अब तक तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी से जुड़ा प्रेस रिलीज या बयान जारी नहीं किया है। हालांकि, उनके वकील जगन्नाथ सिंह के दावों के मुताबिक, तेज प्रताप पर हत्या के प्रयास की धारा यानी BNS की धारा 109 लगाई गई है।
यह एक गैर-जमानती और संज्ञेय अपराध है। यानी पुलिस थाने या मजिस्ट्रेट कोर्ट से तुरंत जमानत नहीं मिलती।
- पटना हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट सर्वदेव सिंह बताते हैं, ‘धारा 109 लगने पर नियमित जमानत के लिए तेज प्रताप को पहले सेशंस कोर्ट में याचिका दाखिल करनी होगी। वहां से उन्हें जमानत मिल भी सकती है। हालांकि, अधिकतर मामलों में सेशन कोर्ट जमानत नहीं देती।
- यदि सेशंस कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज कर दी जाती है तब तेज प्रताप यादव को पटना हाई कोर्ट जाना होगा। वहां से ज्यादा संभाव है कि उनको बेल मिल जाए।’
- इस तरह अगर तेज प्रताप को सेशन कोर्ट से जमानत नहीं मिली तो 20 से 25 दिनों तक अभी जेल में रहना पड़ सकता है।
- तेज प्रताप के वकील की मानें तो वह सोमवार को यानी आज सेशन कोर्ट में जमानत याचिका दायर करेंगे। आज कोर्ट का रुख तय करेगा कि तेज प्रताप अभी कितने दिन रहेंगे।
अगर अटेम्प्ट टू मर्डर की धारा यानी 109 बरकरार रही और दोषी पाए गए तो तेज प्रताप की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उन्हें कम से कम 10 साल की सजा हो सकती है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की 109 में 3 तरह की सजा का प्रावधान है।
- यदि किसी पर जानलेवा हमला किया गया पर पीड़ित को गंभीर शारीरिक चोट नहीं आई, तो 10 साल तक की जेल और जुर्माने की सजा हो सकती है।
- यदि हमले में पीड़ित घायल हो जाता है तो दोषी को आजीवन कारावास या 10 साल तक की जेल और जुर्माने की सजा दी जा सकती है।
- यदि पहले से आजीवन कारावास की सजा काट रहा व्यक्ति ऐसा हमला करता है और पीड़ित घायल होता है, तो उसे फांसी या बची हुई पूरी जिंदगी के लिए जेल की सजा हो सकती है।
तेज प्रताप यादव पर रामगुलाम चौक पर प्रदर्शन के दौरान छात्रों को हिंसा के लिए भड़काने का आरोप है। आरोप है कि उनके उकसाने पर ही हुए पथराव में गांधी मैदान थाना प्रभारी सहित पुलिस वाले घायल हो गए।
इस तरह तेज प्रताप पर अगर कोर्ट में आरोप सही साबित हुए तब उनको कम से कम 10 साल की सजा हो सकती है। या आजीवन कारावास की सजा।
सवाल-3ः पुलिस ने गिरफ्तारी का प्लान कब और कैसे बनाया?
जवाबः बिहार में हो रहे स्टूडेंट्स के प्रदर्शन में शामिल होने वालों में सबसे चर्चित नाम तेज प्रताप यादव का ही था। बाकी स्टूडेंट्स का हुजूम था।
बताया जा रहा है कि दूसरे दिन के प्रदर्शन में जैसे ही तेज प्रताप यादव शामिल हुए तब ही तय हो गया कि अब उनको गिरफ्तार कर लेना है। इसे 4 स्टेप में पूरा किया गया। जानिए, स्टेप बाय स्टेप…
- ऊपर से मिले आदेश-निर्देश पर गांधी मैदान पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान तेज प्रताप यादव को हिरासत में ले लिया। पुलिस के हिरासत में लेते ही थाने के आसपास समर्थक और स्टूडेंट्स जुटने लगे। तब पुलिस ने तुरंत अपने प्लान में बदलाव किया। तेज प्रताप को थाने से छोड़ दिया। ताकि भीड़ उग्र ना हो। हालांकि, एसपी (लॉ एंड ऑर्डर) की टीम ने उनकी गतिविधियों पर नजर बनाए रखी ताकि बिना किसी उग्र विरोध के कार्रवाई की जा सके।
- बताया जा रहा है कि पुलिस तेज प्रताप के लोकेशन को ट्रैश करती रही। जैसे ही प्रदर्शन शाम में खत्म हुआ पुलिस एक्टिव हो गई। देर शाम जब तेज प्रताप यादव पटना के सिटी सेंटर मॉल पहुंचे, तब एसपी (लॉ एंड ऑर्डर) की मौजूदगी में पुलिस ने उन्हें अचानक घेरकर अपनी गाड़ी में बिठा लिया।
- समर्थकों और कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन से बचने के लिए पुलिस ने गोपनीयता बनाए रखी। उन्हें तुरंत एसपी की गाड़ी से पहले दीघा थाने ले जाया गया और फिर सुरक्षा कारणों से नौबतपुर थाने ट्रांसफर किया गया, जहां देर रात तक पूछताछ की गई।
- भीड़ और सुरक्षा जोखिमों को टालने के लिए देर रात छज्जू बाग स्थित जज/मजिस्ट्रेट के आवास पर उनकी पेशी कराई गई। मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद देर रात ही उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में बेऊर जेल भेज दिया गया।
सवाल-4ः तेज प्रताप को गिरफ्तार कर सरकार क्या मैसेज दे रही?
जवाबः सियासी गलियारे में इसको लेकर 2 तरह की थ्योरी चर्चा में है…
1. प्रदर्शनकारियों में खौफ बनाना
NEET पेपर लीक के खिलाफ स्टूडेंट्स का प्रदर्शन खत्म हो गया है। केंद्र सरकार ने सभी स्टूडेंट्स पर से केस वापस लेने का ऐलान किया है। इसके बावजूद बिहार पुलिस का प्रदर्शनकारियों पर ताबड़तोड़ एक्शन जारी है।
अब तक तेज प्रताप यादव, माले विधायक संदीप सौरभ सहित 300 स्टूडेंट्स को गिरफ्तार किया गया है। सिर्फ पटना में 139 गिरफ्तारियां हुईं हैं। राज्यभर में कुल FIR की गई है।
बताया जा रहा है कि सम्राट सरकार ने तेज प्रताप को गिरफ्तार कर स्टूडेंट्स को मैसेज दिया है कि हम किसी को नहीं छोड़ेंगे। सरकार की सोच है कि इस तरह की कार्रवाई से युवकों के मन में प्रशासनिक कार्रवाई का खौफ जाएगा। इससे वह प्रदर्शन से दूर रहेंगे।
2. तेज प्रताप यादव को बड़ा नेता बनाना
कुछ जानकार और नेता इस तरह के कदम के पीछे एक खास रणनीति का जिक्र करते हैं। इस तरह की थ्योरी गढ़ने वालों का तर्क है कि इस वक्त तेज प्रताप यादव विधानसभा में नहीं हैं। हालांकि, वह तेजस्वी से ज्यादा पटना में एक्टिव नजर आते हैं। हर मुद्दे पर अपनी बात रखते हैं और घूमते फिरते हैं।
तेज प्रताप यादव के जेल जाने से उनकी लोकप्रियता तेजस्वी के वोटरों के बीच थोड़ी बढ़ सकती है। जिसके बदौलत वह तेजस्वी के वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं। चूंकि तेज प्रताप और तेजस्वी का वोट बैंक लगभग सेम है। ऐसे में अगर वोटरों का बंटवारा होगा तो भविष्य में फायदा NDA को होगा।
सवाल-5ः …तो इससे तेज प्रताप को फायदा होगा?
जवाबः बिल्कुल। मौटे तौर पर तेज प्रताप को 2 फायदे हो सकते हैं…
1. आंदोलनकारी नेता की छवि और री-ब्रांडिंग करने का मौका
लालू परिवार और पार्टी RJD से बेदखल होने के बाद तेज प्रताप यादव ने जनशक्ति जनता दल (JJD) बनाया है। उनकी पार्टी का 2025 बिहार विधानसभा चुनाव में प्रदर्शन बहुत खराब था।
45 सीटों पर पार्टी ने प्रत्याशी उतारे। कुल वोट 1,35,514 मिले। तेज प्रताप यादव खुद महुआ सीट से चुनाव हार गए। तीसरे नंबर पर थे।
- इस हार से उबरने के लिए तेज प्रताप यादव को एक मजबूत और स्वतंत्र जनाधार की जरूरत थी। छात्रों/युवाओं के मुद्दे पर जेल जाने से उनकी छवि एक ‘सड़क पर संघर्ष करने वाले’ नेता के रूप में उभर सकती है, जिससे युवाओं के बीच उनकी स्वीकार्यता बढ़ सकती है।
- इस गिरफ्तारी से वे अचानक बिहार की राजनीति के केंद्र में आ गए हैं। ‘सरकार की दमनकारी नीति’ का नैरेटिव बनाकर वे जनता और समर्थकों की सहानुभूति बटोर सकते हैं।
- JJD के कार्यकर्ताओं और समर्थकों को एकजुट करने तथा जमीनी स्तर पर पार्टी का विस्तार करने के लिए यह एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।
2. परिवार में हो सकती है वापसी
तेज प्रताप यादव पर सरकार की इस कार्रवाई का विरोध उनके छोटे भाई तेजस्वी यादव सहित RJD नेताओं ने किया है। तेजस्वी यादव ने सम्राट सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि 24 घंटे के अंदर प्रदर्शन करने वाले स्टूडेंट्स और नेताओं को रिहा नहीं किया गया तो बड़ा आंदोलन करेंगे।
उन्होंने अपने भाई (तेज प्रताप) पर सरकार की कार्रवाई का कड़ा विरोध किया। वहीं, बहन रोहिणी आचार्य ने X पर लिखा- ‘तेज प्रताप की गिरफ्तारी सम्राट सरकार की तानाशाही है।’
- पॉलिटिकल एनालिस्ट संजय सिंह कहते हैं, ‘राबड़ी देवी का बंगला खाली कराने के बाद तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी सम्राट सरकार का बड़ा कदम है। इस एक्शन के बाद लालू फैमिली एकजुट हो सकती है। तेज प्रताप यादव की परिवार में वापसी हो सकती है।’
- ‘परिवार सोचेगा कि अब अगर एक नहीं हुए तो आगे दिक्कत हो सकती है। ऐसे ही धीरे-धीरे सरकार हमारा दमन करती रहेगी।’
- संजय सिंह कहते हैं, ‘परिवार की एकता में ही सारी ताकत है। अगर परिवार एकजुट हुआ तो तेजस्वी का मोरल हाई होगा, जिससे आगे चलकर राज्य में एक दमदार विपक्ष देखने को मिल सकता है।’
हालांकि…
- तेज प्रताप कानूनी अड़चन में भी फंस सकते हैं। 14 दिनों की न्यायिक हिरासत और दर्ज आपराधिक धाराओं के कारण कानूनी मुकदमे लंबे खिंच सकते हैं, जिससे आगे जाकर दिक्कत हो सकती है।
- ज्यादा दिन जेल में रहने के दौरान पार्टी के कामकाज, संगठन विस्तार की गति धीमी पड़ सकती है, खासकर तब जब उनकी पार्टी अभी नई और शुरुआती चरण में है।







