पटना जू बर्ड फ्लू के खतरे को देखते हुए अलर्ट मोड में आ गया है। पटना जू में कई एहतियात बरते जा रहे हैं। मोर और अन्य पक्षियों के केज के आसपास कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है।
पक्षियों की देखभाल करने वाले सभी कर्मियों को मास्क उपलब्ध कराया गया है। बाड़ों से बाहर निकलने के बाद कर्मियों को खुद को सैनिटाइज करने के निर्देश दिए गए हैं। मेन गेट पर पोटाशियम परमैगनेट से फूट वॉश अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि संक्रमण अंदर न आ सके। पक्षियों के स्वास्थ्य की 24 घंटे निगरानी हो रही है।
बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. कौशलेंद्र कुमार ने लोकल 18 के माध्यम से मुर्गी पालन करने वाले किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है. उन्होंने कहा कि इस समय बायो-सिक्योरिटी नियमों का सख्ती से पालन करना बेहद जरूरी है. पोल्ट्री फार्म में किसी भी बाहरी व्यक्ति या वाहन की एंट्री को पूरी तरह से रोकें. मुर्गियों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए आवश्यक दवाओं का इस्तेमाल शुरू करें.
7 मार्च तक पटना जू दर्शकों के लिए बंद
संजय गांधी जैविक उद्यान (पटना जू) को एक सप्ताह के लिए बंद कर दिया गया है। 7 मार्च तक दर्शकों के लिए पटना जू में एंट्री नहीं है। बर्ड फ्लू के एहतियातन यह फैसला लिया गया है। पीसी कॉलोनी, कंकड़बाग के जू-सेक्टर पार्क और पटना हाईकोर्ट परिसर में कौओं और मुर्गियों की अचानक मौत के बाद H5N1 बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई है।
H5N1 बर्ड फ्लू को कोरोना से भी खतरनाक माना जाता है। इसका जानवरों से इंसानों में फैलने का ज्यादा खतरा रहता है। इधर, ऐसे मामले सामने आने के सिविल सर्जन ने सभी अस्पतालों को हाई अलर्ट पर रखा है।
होली के दौरान चिकन खाने को लेकर डॉ. कौशलेंद्र कुमार ने साफ किया कि घबराने की जरूरत नहीं है, सही तरीके से पकाया गया चिकन पूरी तरह सुरक्षित होता है उन्होंने कहा कि चिकन को कम से कम 70°C या उससे अधिक तापमान पर अच्छी तरह पकाना जरूरी है, ताकि किसी भी तरह का संक्रमण खत्म हो जाए.
डॉ. कौशलेंद्र कुमार के अनुसार पिछले कई वर्षों से यह देखा जा रहा है कि जनवरी से मार्च के बीच इस तरह की घटनाएं अधिक सामने आती हैं, जिसे आम तौर पर बर्ड फ्लू कहा जाता है. उनका कहना है कि यह समस्या हमेशा इन्हीं दो-तीन महीनों के दौरान ज्यादा देखने को मिलती है.







