ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत ने मध्य पूर्व की राजनीति में भूकंप ला दिया है. अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमलों में 86 वर्षीय खामेनेई की मौत के साथ ही ईरान के 31 में 24 प्रांतों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए गए. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे शांति के लिए निर्णायक कदम बताया और ईरानियों से अपने शासकों को उखाड़ फेंकने की अपील की.
ईरान के मीडिया तसनीम और फार्स समाचार एजेंसियों ने इसकी पुष्टि की है। हमले में खामेनेई की बेटी, दामाद, पोती और बहू भी मारे गए हैं। ईरान में 40 दिन का राजकीय शोक और सात दिनों की सार्वजनिक छुट्टियों की घोषणा की गई है।
खामेनेई की मौत के बाद ईरानी इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दुख जताया है। ईरानी न्यूज एजेंसी फार्स के मुताबिक IRGC ने कहा, ‘हमने एक महान नेता खो दिया है और पूरा देश उनका शोक मना रहा है।’
ईरानी सेना ने खतरनाक अभियान की शुरुआत की घोषणा की है। सेना ने कहा कि यह हमला कुछ ही देर में शुरू होगा और क्षेत्र में कब्जे वाले क्षेत्रों और अमेरिकी आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा।
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने खामेनेई की मौत का दावा किया था। ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर कहा कि इतिहास के सबसे क्रूर व्यक्तियों में से एक खामेनेई मारा गया। यह ईरान की जनता के साथ-साथ अमेरिका और दुनियाभर के देशों के लिए न्याय है।
दरअसल, इजराइल और अमेरिका ने शनिवार को ईरान में राजधानी तेहरान समेत कई शहरों पर हमला किया। ईरान ने भी इजराइल पर पलटवार करते हुए जवाबी हमले किए।
ईरान में 200 लोगों की मौत, 740 घायल
ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों से अब तक 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 740 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। यह जानकारी ईरान की रेड क्रिसेंट सोसाइटी ने दी है।
ईरान के एक स्कूल पर मिसाइल गिरने से 148 छात्राओं की मौत हो गई, जबकि 45 घायल हैं। इजराइल और अमेरिका ने ईरान पर किए हमले में 10 बड़े शहरों को निशाना बनाया।
इजराइल-अमेरिका और ईरान जंग से जुड़ी 7 तस्वीरें…





अयातुल्ला अली खामेनेई के बारे में जानिए…
- अयातुल्ला अली खामेनेई का जन्म 19 अप्रैल 1939 को ईरान के धार्मिक शहर मशहद में एक मौलवी परिवार में हुआ था। वे खोमैनी शाह की नीतियों के खिलाफ थे और इस्लामी शासन की वकालत करते थे।
- 1963 में शाह के खिलाफ भाषण देने पर उन्हें गिरफ्तार भी किया गया। धीरे-धीरे वे सरकार विरोधी आंदोलन का बड़ा चेहरा बन गए और खोमैनी के भरोसेमंद सहयोगी माने जाने लगे।
- 1979 में ईरान में इस्लामी क्रांति हुई और शाह की सरकार गिर गई। खोमैनी देश लौटे और नई इस्लामी सरकार बनाई। खामेनेई को क्रांतिकारी परिषद में जगह मिली और बाद में उप रक्षामंत्री बनाया गया।
- 1981 में तेहरान की एक मस्जिद में भाषण के दौरान खामेनेई पर बम हमला हुआ। उसी साल एक और बम धमाके में तत्कालीन राष्ट्रपति की मौत हो गई। इसके बाद हुए चुनाव में खामेनेई भारी बहुमत से जीतकर ईरान के तीसरे राष्ट्रपति बने।
- 1989 में खोमैनी के निधन के बाद खामेनेई को देश का सर्वोच्च नेता यानी ‘रहबर’ बनाया गया। इसके लिए संविधान में बदलाव भी किया गया। समर्थक उन्हें इस्लामी व्यवस्था का मजबूत रक्षक मानते हैं, जबकि आलोचक उन पर सख्त और कट्टर शासन चलाने का आरोप लगाते हैं।







