बिहार में अब ‘कागजी डॉक्टर’ की खैर नहीं। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने आज शुक्रवार को सदन में दो टूक कह दिया है कि अस्पताल में गैर हाजिर रहने वाले डॉक्टर्स पर कड़ी कार्रवाई होगी। स्वास्थ्य मंत्री ने विधायक कमरूल होदा साहब के अल्पसूचित प्रश्न का जवाब देते हुए कहा कि 422 मरीजों का इलाज प्रति माह चिकित्सक कर रहे हैं। यह इलाज यहां के पदस्थापित चिकित्सक ही कर रहे हैं। विधायक कमरूल होदा ने स्वस्थ मंत्री के जवाब से असहमत होते कहा कि सरकार कहती है कि प्रति माह 422 मरीजों का इलाज होता है। तो सदन को इस बात से अवगत कराना चाहता हूं कि यह इलाज कौन कर रहा है? स्थिति यह है कि किशनगंज रेफरल अस्पताल में चिकित्सकों के 204 पद सृजित हैं। लेकिन मात्र 60 चिकित्सक ही बहाल हैं यानी कुल 144 चिकित्सकों के पद रिक्त हैं। फिर इलाज कौन करता है?
क्या रहा मंत्री का जवाब?
हालांकि स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि इसे दिखवा लेता हूं और उन्हें व्हाट्सएप पर पूरी जानकारी दे दूंगा। विधायक मो कमरूल होदा ने अपने क्षेत्र के कोठिया अस्पताल को लेकर भी यह जानकारी दी कि यह अस्पताल कागज पर चल रहा है। यहां चिकित्सक गायब रहते हैं। स्वास्थ मंत्री ने किशनगंज विधायक को आश्वस्त किया कि गायब रहने वाले चिकित्सक की जांच कर लेते हैं और आरोप सही पाए गए तो दंडित किया जायेगा। विधानसभा में आज बरबीघा के विधायक कुमार पुष्पंजय से तारांकित प्रश्न के जरिये यह जानकारी दी कि बरबीघा अस्पताल में मरीजों का इलाज ठीक तरह से नहीं होता है। मरीजों को या तो शेखपुरा या फिर पावापुरी भेज दिया जाता है। न तो यहां शिशु रोग विशेषज्ञ हैं और न ही हड्डी रोग विशेषज्ञ। जो सर्जन चिकित्सक हैं उन्हें सर्जरी करने में ही डर लगता है। मेरी जानकारी में बरबीघा में बहाल सर्जन चिकित्सक आज तक एक भी ऑपरेशन नहीं किया है।
मंत्री ने क्या दिया आश्वासन?
स्वास्थ्य मंत्री ने बरबीघा के विधायक को आश्वस्त किया शिशु रोग और हड्डी रोग विशेषज्ञ की नहीं अगले वित्तीय वर्ष में की जायेगी। और जो सर्जन किसी भी मरीज का सर्जरी नहीं कर रहें हैं उन्हें जांच के बाद दंडित किया जाएगा। किशनगंज के विधायक ने तो केवल किशनगंज रेफरल अस्पताल का मामला उठाया। लेकिन यह सच्चाई कमोवेश पूरे बिहार में है। बिहार आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के आंकड़ों को ही लें तो प्रदेश में 1 लाख की आबादी पर सिर्फ 7 सरकारी डॉक्टर हैं। वैसे तो प्रदेश में चिकित्सकों के 21 हजार 821 पद स्वीकृत हैं लेकिन सिर्फ 9658 चिकित्सक ही कार्यरत हैं। सरकार के मुताबिक डॉक्टरों के करीब 56 फीसदी पद खाली हैं।
विधायक ने खोली पोल!
लेकिन किशनगंज विधायक ने इस बात की भी पोल खोली कि भले कार्यरत चिकित्सकों की संख्या जरूरत के हिसाब से 44 प्रतिशत हैं। पर पदस्थापित चिकित्सक कितनी अपनी सेवा दे रहे हैं यह आंकड़ा सरकार के पास भी नहीं। किशनगंज के विधायक ने तो स्वास्थ विभाग पर बड़ा आरोप लगाया कि पदस्थापित चिकित्सक भी केवल कागज पर हैं। अधिकांश चिकित्सक तो अस्पताल आते भी नहीं। विधायक के इसी आरोप को ले कर स्वास्थ मंत्री ने जवाब दिया कि इसकी जांच सिविल सर्जन से करवा लेंगे। अरवल जिला की बात करें तो प्रति 1 लाख की आबादी पर 16 से अधिक डॉक्टर हैं। किशनगंज में 1 लाख की आबादी पर महज 3.9 डॉक्टर ही हैं। आबादी के अनुसार शेखपुरा में 14.8, जहानाबाद – 14.6, शिवहर – 13.8, पटना – 12.4 प्रति लाख की आबादी पर चिकित्सक कार्यरत हैं। आंकड़े गवाह हैं कि आबादी के अनुसार अररिया में 4, कटिहार – 4.6 पश्चिमी चंपारण – 5.1, जमुई – 5.5 प्रतिशत चिकित्सक ही कार्यरत हैं।







