बिहार विधानसभा में गुरुवार को विश्वविद्यालयों में जातिगत भेदभाव और यूजीसी नियमों को लेकर जोरदार हंगामा देखने को मिला. उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव के मुद्दे पर पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई, जिससे सदन का माहौल काफी गर्म हो गया. माले विधायक संदीप सौरव ने सदन में आरोप लगाया कि देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं.
विधानसभा में संदीप सौरव ने कहा कि इसी वजह से बिहार में यूजीसी के नए नियम लागू किए जाने चाहिए, ताकि संस्थानों में समानता सुनिश्चित हो सके. उन्होंने दावा किया कि 2019 से 2024 के बीच उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत विवादों में 118 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है. साथ ही उन्होंने छात्रों की मौतों का मुद्दा उठाते हुए रोहित वेमुला का जिक्र किया और सवाल किया कि ऐसी घटनाएं कब तक होती रहेंगी.
ब्राह्मणवाद पर की गई टिप्पणी को लेकर विवाद
हालांकि, सदन में “ब्राह्मणवाद” पर की गई टिप्पणी को लेकर सत्ता पक्ष के विधायकों ने कड़ी आपत्ति जताई और बयान को समाज को बांटने वाला बताया. इस पर उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संविधान और संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करना सभी की जिम्मेदारी है और किसी भी समाज के खिलाफ इस तरह की भाषा उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति की मृत्यु पूरे समाज के लिए क्षति होती है और समाज में नफरत फैलाने से देश कमजोर होता है. उन्होंने अपने छात्र जीवन का अनुभव साझा करते हुए कहा कि वे भी तकनीकी शिक्षा के दौरान रैगिंग और कठिन परिस्थितियों से गुजरे हैं.
आलोक मेहता ने दिया ‘चोर की दाढ़ी में तिनका’ वाला उदाहरण
विजय सिन्हा ने यह भी कहा कि बाबा भीमराव अंबेडकर ने जिस समतामूलक समाज का सपना देखा था, उसे इस तरह की राजनीति से नुकसान पहुंचता है. उपमुख्यमंत्री के बयान पर राजद विधायक आलोक मेहता ने पलटवार करते हुए कहा कि जिस तरह सत्तापक्ष प्रतिक्रिया दे रहा है, उससे “चोर की दाढ़ी में तिनका” वाली स्थिति दिखती है. वहीं बीजेपी विधायक मिथलेश तिवारी ने कहा कि विपक्ष को ब्राह्मण समाज से समस्या है और वह मुद्दे को गलत तरीके से पेश कर रहा है. बहस के दौरान कई बार सदन में शोर-शराबा हुआ और माहौल तनावपूर्ण बना रहा.







