बिहार की राजनीति में अचानक आरसीपी सिंह प्रसंग पर खामोशी किसी सांगठनिक बदलाव का संकेत तो नहीं है! अब एक नई चर्चा बिहार के राजनीतिक गलियारों में चल पड़ी है। ऐसा इसलिए भी कि यह सिर्फ आरसीपी के जदयू में आने के संकेत नहीं थे बल्कि यह आरसीपी के साथ-साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के आने के भी संकेत थे। बिहार की राजनीति में इसे इस तरह से देखा जा रहा था कि क्या चाचा और भतीजा एक खास रणनीति के साथ जदयू के सांगठनिक ढांचा में आमूलचूल परिवर्तन के प्लान के साथ आ रहे हैं? चलिए इसे तीन स्टेप में समझते हैं।
आरसीपी की जदयू में वापसी: स्टेज एक
कुछ माह पहले जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे आरसीपी की जदयू में वापसी की चर्चा परवान चढ़ रही थी। माना जा रहा था कि आरसीपी की वापसी बतौर निशांत कुमार के राजनीतिक संरक्षक के रूप में होने जा रही है। तब आरसीपी की भूमिका को उस बैरम खान की तरह देखा जा रहा था जिसने बादशाह अकबर को बचपन में सत्ता के गुर सिखाने के लिए उनके संरक्षक बनकर मुगलियत सल्तनत को ताकत दी थी। लेकिन तब आरसीपी की वापसी को लेकर समर्थन करने से ज्यादा लोग उनकी जदयू में वापसी का विरोध करने लगे। जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार का तो बयान आ रहा था कि, जिस व्यक्ति ने जदयू को नंबर वन से नंबर तीन की पार्टी पर तक पहुंचा दिया वह जदयू में वापसी का सपना न देखे।
आरसीपी की वापसी: स्टेज टू
आरसीपी सिंह की जदयू में वापसी की दूसरी स्टेज आई। यह फेज काफी तूफानी था। इस खास समय में जदयू में आरसीपी की वापसी की केवल चर्चा नहीं बल्कि विभिन्न लव कुश संगठनों द्वारा प्लेटफॉर्म से आरसीपी की वापसी की मांग उठने लगी। जदयू कार्यालय के पास लव कुश के कुछ संगठनों ने पोस्टर के जरिए आरसीपी की जदयू में वापसी की मांग की। जदयू के नेताओं द्वारा चूड़ा दही के भोज के समय लव कुश के संगठन के कुछ नेताओं ने आरसीपी की जदयू में वापसी को लेकर नारेबाजी तक की। लेकिन यह सब ठंडे बस्ते में जा पड़ा।
आरसीपी वापसी : तीसरी स्टेज
आरसी पी सिंह की वापसी की तीसरी स्टेज यह रही कि केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह खुलकर विरोध में आ गए। ललन सिंह के इस विरोध के बाद यह कहा गया कि जब तक ललन सिंह चाहेंगे नहीं तब तक आरसीपी सिंह की एंट्री नहीं होगी। कुछ माह पहले जहानाबाद के पूर्व सांसद अरुण कुमार को जदयू में लाने की तिथि तय हो गई थी। मीडिया के पास आमंत्रण भी चला गया था। लेकिन ललन सिंह ने नहीं चाहा तो अरुण कुमार जदयू के सदस्य नहीं बन सके। कुछ दिन इस प्रकरण पर गहरी खामोशी छाई रही। लेकिन अचानक अरुण कुमार जदयू में शामिल हो गए।







