आज बिहार विधान मंडल के बजट सत्र का 13वां दिन है। आज भी दोनों सदनों में कई मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष अपनी बातें रखेंगे। शराबबंदी समीक्षा की मांग पर फिर से हंगामे के आसार हैं। इसके अलावा बिहार विधानसभा की समितियों के प्रतिवेदन को सदन में रखा जाएगा। वहीं, आलोक मेहता, भाई विरेन्द्र से मिले ध्यानाकर्षण सूचना पर सूचना प्रावैधिकी विभाग की ओर से वक्तव्य होगा। प्रमोद कुमार, सचीन्द्र प्रसाद सिंह और अन्य 28 विधायकों से प्राप्त ध्यानाकर्षण सूचना पर योजना और विकास विभाग की ओर से वक्तव्य होगा। इसके अलावा ज्योति देवी, रोमित कुमार सहित 6 विधायकों से प्राप्त सूचना पर विज्ञान, प्रावैधिकी और तकनीकी शिक्षा विभाग की ओर से वक्तव्य होगा। सेकंड हाफ में शिक्षा, उच्च शिक्षा, विज्ञान प्रावैधिकी और तकनीकी शिक्षा विभाग, अल्पसंख्यक कल्याण, लघु जल संसाधन व खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग पर वाद-विवाद होगा।
बिहार विधान परिषद में क्या होना है
बिहार विधान परिषद में प्रश्नों के अलावा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अंतर्गत बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के वित्तीय वर्ष 2025-26 का वार्षिक प्रतिवेदन की प्रति रखी जाएगी। एमएलसी जीवन कुमार पब्लिक यातायात सुविधा के लिए नगर बस सेवा को गांधी मैदान पटना से दुर्गा मंदिर, परेव कोइलवर पुल तक चलाने की सरकार से मांग करेंगे। मो. सोहैब मुजफ्फरपुर के काजी मोहम्मदपुर गांव के स्व. शेख रहमतुल्लाह को स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा प्रदान करने के संबंध में सरकार का ध्यान आकृष्ट करेंगे।
बिहार में 2016 से शराबबंदी कानून लागू है. लगभग 10 साल हो चुके हैं और इस बीच एक बार फिर से इस कानून की समीक्षा को लेकर विवाद शुरू हो गया है. मंगलवार (17 फरवरी, 2026) को सदन में एनडीए के सहयोगी दल राष्ट्रीय लोक मोर्चा के विधायक माधव आनंद ने मांग उठाई कि शराबबंदी कानून की समीक्षा होनी चाहिए. माधव आनंद की इस मांग के बाद प्रदेश में सियासत शुरू हो गई है. हालांकि जेडीयू ने अपना रुख साफ कर दिया है.
जेडीयू के प्रवक्ता अभिषेक झा ने अपने गठबंधन के साथी विधायक का नाम नहीं लिया लेकिन खूब निशाना साधा. अभिषेक झा ने कहा सरकार के द्वारा बनाए गए किसी भी कानून की समय-समय पर समीक्षा होती रही है. शराबंबदी की भी समीक्षा होती रही है. एक विधायक ने सदन में बयान दिया है कि समीक्षा होनी चाहिए. अब समीक्षा का मतलब क्या है उनके हिसाब से क्या है ये तो वही बता सकते हैं.
‘जो लोग बयान दे रहे हैं उनका…’
अभिषेक झा ने कहा कि समीक्षा की आड़ में कोई ढिलई चाहता है या उसे समाप्त करना चाहता है तो ये नहीं हो सकता है. नीतीश कुमार ने बिहार में इतने वर्षों तक शराबबंदी कानून को मजबूती से लागू रखा है आगे भी रखेंगे. जो लोग बयान दे रहे हैं उनका दिल्ली प्रवास होते रहता है. हमें लगता है कि बिहार में शराबबंदी है लेकिन अन्य प्रदेश में शराबबंदी नहीं है.
शराबबंदी कानून पूरी तरह से फेल: एआईएमआईएम
एआईएमआईएम के विधायक अख्तरुल ईमान ने शराबबंदी कानून को पूरी तरह से फेल बताया. अख्तरुल ईमान का कहना है कि बिहार में शराब की होम डिलीवरी हो रही है. सरकार और पुलिस का संरक्षण शराब माफिया को हासिल है. शराबबंदी होने की वजह से नई पीढ़ी सूखे नशे की चपेट में आ गई है.
एक तरफ अख्तरुल ईमान ने शराबबंदी कानून में ‘छेद’ होने का दावा किया तो वहीं बिहार सरकार के वरिष्ठ मंत्री विजय चौधरी ने कहा कि बिहार में शराबबंदी कानून को सदन में सभी दलों की सहमति से लागू किया गया था. बिहार में आशराबबंदी कानून लागू था, लागू है और लागू रहेगा.
आरजेडी ने मुख्यमंत्री से मांगा जवाब
इस पूरे विवाद पर आरजेडी के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि शराबबंदी की पोल तो सत्ता धारी दल के विधायक ही सदन में खोल रहे हैं. विधायक कह रहे हैं शराबबंदी की समीक्षा होनी चाहिए, तो शराबबंदी से शराब माफिया की चांदी है. जहरीली शराब से लोगों की मौत हो रही है. मुख्यमंत्री जवाब दें. अब तो उन्हीं के घटक दल के नेता शराबंबदी की पोल खोल रहे हैं.
एनडीए के घटक दल के विधायक ने मांग की है कि शराबबंदी कानून की समीक्षा की जाए. इस पर सियासत हो रही है. इस बीच जेडीयू के विधायक विनय चौधरी ने बुधवार (18 फरवरी, 2026) को विधानसभा परिसर में मीडिया से बातचीत में तेजस्वी यादव पर हमला किया. एक तरह से तेजस्वी यादव पर शराब पीकर सदन आने का आरोप लगाया है.
जेडीयू विधायक विनय चौधरी ने कहा कि तेजस्वी यादव सदन में डोलते-डोलते आए थे. इस पर पत्रकारों ने कहा कि उनके तो पैर में चोट लगी थी. इस पर विधायक ने कहा, “पैर में चोट लगने से शरीर नहीं डोलता है… तो उनसे पूछिए कि क्यों डोल रहे थे. हम लोग तो मेडिकल जांच करवाने की बात कर रहे थे, लेकिन वो (तेजस्वी यादव) भाग गए.”
‘समीक्षा का मतलब बंदी समाप्त नहीं’
जेडीयू विधायक से पूछा गया कि आपके घटक दल के विधायक ने मांग की है कि शराबबंदी कानून की समीक्षा होनी चाहिए. इस पर कहा कि हर व्यक्ति की अपनी-अपनी सोच होती है. कानून की समीक्षा का अर्थ बंदी समाप्त नहीं होता है. इसका मतलब होता है और सख्ती. यानी उन्होंने सुधार की अपेक्षा की है.
इस सवाल पर कि कल (मंगलवार) तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार को अचेत मुख्यमंत्री मिला है. इस पर कहा कि अभी भी उनको (तेजस्वी) मन होता है कि फिर से नीतीश कुमार को साथ ले लें. उसी के लिए न बेचैनी है. मुख्यमंत्री ने तो सदन में कहा कि आपने (तेजस्वी यादव) गड़बड़ी की इसलिए भगा दिए. ये शब्द मुख्यमंत्री ने कहा तब क्यों नहीं उन्होंने जवाब दिया? सदन में खड़ा होकर चैलेंज करना चाहिए था. क्यों नहीं किए?
दूसरी ओर कांग्रेस के विधायक अभिषेक रंजन ने भी बड़ा दावा किया. विधानसभा परिसर में मीडिया से कहा, “बिहार में शराबबंदी कानून पूरी तरह फेल हो गया है. शराब होम डिलीवरी के जरिए पहुंच रही है. अगर कोई डिमांड करे तो विधानसभा के अंदर तक भी शराब की डिलीवरी हो सकती है.”







