बिहार विधानसभा में बुधवार को शराब और शराबबंदी कानून को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है. दरअसल विधानसभा में में शराबबंदी की समीक्षा और विधायकों के ‘ब्लड टेस्ट’ को लेकर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं. बयानबाजी इतनी बढ़ गई कि कई नेता खुले तौर पर ब्लड टेस्ट कराने की चुनौती देते नजर आए. वहीं इस दौरान कांग्रेस विधायक अभिषेक रंजन ने शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग करते हुए बड़ा बयान दिया.
अभिषेक रंजन ने कहा कि बिहार में शराबबंदी कानून समीक्षा तो होनी ही चाहिए, लेकिन अगर विधानसभा में विधायकों का ब्लड टेस्ट हो जाए तो शराबबंदी कानून की असलियत सामने आ जाएगी. वहीं अभिषेक रंजन ने कहा कि बिहार में शराब की होम डिलिवरी होती है, डिमांड कीजिएगा तो विधानसभा में भी शराब पहुंच जाएगी. कांग्रेस विधायक अभिषेक रंजन के इस बयान से विधानसभा में माहौल गरमा गया. सत्ता पक्ष के विधायकों ने जमकर विपक्ष विधायकों पर निशाना साधा है.
हम तैयार हैं, पहले नेता प्रतिपक्ष का टेस्ट हो: लखींद्र पासवान
बिहार सरकार के मंत्री लखींद्र पासवान ने कांग्रेस विधायक के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे ब्लड टेस्ट के लिए तैयार हैं, लेकिन पहले नेता प्रतिपक्ष की जांच होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर किसी को पता है कौन शराब पी रहा है तो नाम बताना चाहिए, केवल आरोप लगाने से काम नहीं चलेगा. वहीं राष्ट्रीय जनता दल के विधायक रणविजय साहू ने सरकार पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि बिहार में शराबबंदी पूरी तरह असफल हो चुकी है और सरकार को पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए. उनके मुताबिक शराबबंदी के नाम पर राज्य में मजाक हो रहा है.
मेरा ब्लड टेस्ट कराइए: रामकृपाल यादव
मंत्री रामकृपाल यादव विधानसभा परिसर से बाहर निकलकर खुले तौर पर ब्लड टेस्ट कराने की चुनौती देते नजर आए. उन्होंने हाथ उठाकर कहा कि वे पूरी तरह तैयार हैं और हिम्मत है तो उनका ब्लड टेस्ट कराया जाए. उन्होंने दावा किया कि बिहार में शराबबंदी कानून पूरी तरह सफल है और लोगों को इसका पालन करना चाहिए. साथ ही उन्होंने नीतीश कुमार के कामों का बचाव करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने राज्य को विकास की राह पर आगे बढ़ाया है. उन्होंने तेजस्वी यादव के बयानों पर भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आलोचना से कोई फर्क नहीं पड़ता.
सबक चीजों की जांच हो, सिर्फ शराब ही नहीं: भाई वीरेंद्र
वहीं इस दौरान राजद के वरिष्ठ विधायक भाई वीरेंद्र ने कहा कि वे भी जांच के लिए तैयार हैं, लेकिन सिर्फ शराब ही नहीं, बल्कि अन्य नशों की भी जांच होनी चाहिए. उन्होंने सरकार से मांग की कि शराब के साथ-साथ गांजा, अन्य नशा और तंबाकू उत्पादों की भी जांच कराई जाए. उन्होंने उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से इस दिशा में कार्रवाई की मांग की और सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया. वहीं उन्होंने विनय चौधरी के बयान पर भी पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष की आलोचना करना आसान है, लेकिन असली जिम्मेदारी सरकार की है.
फिर बहस के केंद्र में बिहार शराबबंदी कानून
लगातार आ रहे इन बयानों से साफ है कि शराबबंदी कानून एक बार फिर बिहार की राजनीति के केंद्र में आ गया है. कोई इसे सफल बता रहा है तो कोई इसकी समीक्षा और सख्त जांच की मांग कर रहा है. ब्लड टेस्ट की चुनौती से शुरू हुआ यह विवाद अब व्यापक राजनीतिक बहस में बदल गया है. आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासत और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं. बता दें, मंगलवार को विधानसभा में सत्ता पक्ष के आरएलएम विधायक माधव आनंद ने भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को शराबबंदी की समीक्षा करने का सुझाव दिया था.






