पहले राजस्थान का कोटा कोचिंग छात्र-छात्राओं की रहस्यमय मौतों का स्थल बनता रहा, अब कोचिंग छात्राओं की रहस्यमय मौतें बिहार सरकार के लिए चुनौती बनती जा रही हैं। जहानाबाद की छात्रा की पटना की शंभू हॉस्टल में हुई रहस्यमय मौत का मामला समाज और सरकार के सामने एक गुत्थी बना हुआ है। जानिए किस तरह बिहार छात्राओं की रहस्यमय मौत की कब्रगाह बनता जा रहा है। चलिए बिहार में हुईं कुछ रहस्यमयी मौतों के बारे में जानें।
जनवरी 2026 में नीट छात्रा की मौत
पटना में नीट की तैयारी कर रही छात्रा की मौत (9 जनवरी 2026) को हो गई। वह छह जनवरी को शंभू गर्ल्स हॉस्टल के कमरे में अचेत अवस्था में मिली थी। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस के प्रारंभिक बयान में इसे संदिग्ध मौत बताया गया, जबकि परिजनों ने यौन शोषण और हत्या की आशंका जताई। यह मामला तूल पकड़ने के बाद अब इसकी जांच सीबीआई को दे दी गई है।
जनवरी में ही दूसरी संदिग्ध मौत
पटना में ही 15 वर्षीय छात्रा की संदिग्ध मौत (परफेक्ट गर्ल्स पीजी मामलाथ) जनवरी 2026 में हुई। परिजनों ने इसे हत्या और साजिश करार दिया तथा आरोप लगाया कि घटना को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश हुई। पुलिस ने हत्या की धारा में मामला दर्ज करके जांच शुरू की। ताजा स्थिति के अनुसार सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल्स और हॉस्टल स्टाफ से पूछताछ जारी है। कुछ संदिग्धों से पूछताछ की गई है, लेकिन अंतिम निष्कर्ष अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है।
मधेपुरा में कॉलेज छात्रा की मौत
इसी साल मधेपुरा में बीपी मंडल इंजीनियरिंग कॉलेज की छात्रा की संदिग्ध अवस्था में मौत हो गई। यह छात्रा अपने कमरे में मृत पाई गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार शव बंद कमरे में मिला, जिससे आत्महत्या की आशंका जताई गई, लेकिन कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। कॉलेज प्रशासन और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त रूप से जांच शुरू की। अपडेट के अनुसार फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार है और परिवार ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। पुलिस ने कहा है कि सभी एंगल मसलन आत्महत्या, मानसिक दबाव या अन्य कारणों की जांच की जा रही है।
वर्ष 2025 में नालंदा में आत्महत्या
वर्ष 2025 के सितंबर माह में एक इंजीनियरिंग की छात्रा द्वारा कथित तौर पर आत्महत्या करने का मामला सामने आया था। नालंदा जिले में एक निजी इंजीनियरिंग संस्थान की 19 वर्षीय छात्रा ने हॉस्टल परिसर में ऊंचाई से कूदकर जान दे दी थी। घटना के बाद छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया और रैगिंग व मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए। पुलिस ने यूडी केस दर्ज करके जांच की और कॉलेज प्रबंधन से पूछताछ की। ताजा जानकारी के अनुसार जांच में व्यक्तिगत तनाव और शैक्षणिक दबाव की बात सामने आई। रैगिंग के आरोपों की पुष्टि स्पष्ट रूप से नहीं हुई है। मामला में अभी भी अंतिम रिपोर्ट की प्रतीक्षा की जा रही है।
पटना में छात्रा ने की खुदकुशी
वर्ष 2025 में भी पटना के एक अन्य छात्रावास में आत्महत्या की घटना हुई थी। पिछले साल छात्रा की आत्महत्या की खबर सामने आई थी, हालांकि नीट छात्रा के मामले के बाद यह घटना चर्चा में आई। पुलिस ने इसे आत्महत्या बताया, लेकिन लगातार हो रही छात्राओं की मौतों के कारण प्रशासन पर सुरक्षा कड़े करने का दबाव बढ़ा। अपडेट के अनुसार जिला प्रशासन ने सभी निजी हॉस्टलों का सत्यापन और सुरक्षा ऑडिट शुरू किया है।
वर्ष 2024 की सुपौल का घटना का रहस्य अनसुलझा
सन 2024 के उत्तरार्ध में आईटीआई छात्रा की कथित आत्महत्या भी रहस्यमय बनी हुई है। सुपौल जिले में एक 20 वर्षीय आईटीआई छात्रा अपने हॉस्टल के कमरे में फंदे से लटकी मिली थी। स्थानीय पुलिस ने प्रथम दृष्टया इसे आत्महत्या बताया। परिवार ने प्रारंभ में कुछ संदेह जताया, परंतु पोस्टमार्टम रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से बाहरी चोटों के संकेत नहीं मिले। वर्तमान अपडेट के अनुसार केस को आत्महत्या की दिशा में बंद करने की प्रक्रिया की बात सामने आई है। हालांकि परिवार की ओर से सामाजिक दबाव और मानसिक तनाव को कारण बताया गया।
मीडिया में कुछ अन्य मामले
मीडिया में इसके अलावा भी वर्ष 2024 से फरवरी 2026 के बीच बिहार में पढ़ाई कर रही छात्राओं से जुड़ी कम से कम 5–6 प्रमुख घटनाएं सामने आईं। इनमें कुछ स्पष्ट आत्महत्या के रूप में दर्ज हैं, जबकि कुछ मामलों में हत्या या साजिश की आशंका जताई गई और जांच जारी है।
अत्यधिक दवाब या रैकेट में फंसाई जा रही हैं बच्चियां
वरिष्ठ पत्रकार ओम प्रकाश अश्क मानते हैं कि कोचिंग कर रही छात्राओं की रहस्यमय मौतें वर्तमान सामाजिक स्थितियों को भी प्रश्नों के घेरे में लेती हैं। इस तरह की हत्या, आत्महत्या के बीच पिसती बच्चियों के दुखद अंत चिंताजनक हैं। यह या तो पढ़ाई का अत्यधिक दवाब है या अभिभावक की ऊंची अभिलाषा, जिसे छात्रा पूरा नहीं करने के दवाब में हो सकती है। दूसरा बड़ा सवाल यह है कि ग्रामीण परिवेश से आ रही छात्राएं कहीं रैकेट में फांस ली जा रही हैं। उनको इस दलदल में फंसने के बाद आत्महत्या ही एक निदान दिखता हो। यह पुलिस के लिए भी और अभिभावकों के लिए भी कठिन टास्क है।







