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पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ दास को पुलिस ने हिरासत में लिया…………..

UB India News by UB India News
February 14, 2026
in Breaking News, TAZA KHABR, अपराध, पटना
0
पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ दास को पुलिस ने हिरासत में लिया…………..

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राजधानी पटना में पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ दास के घर पुलिस ने छापेमारी की गई और इसके कुछ देर बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया. यह कार्रवाई उस केस से जुड़ी है, जिसमें उनके खिलाफ चित्रगुप्तनगर थाना में FIR दर्ज की गई थी. अमिताभ दास के खिलाफ चित्रगुप्त नगर थाना में पोक्सो एक्ट के तहत कांड संख्या 44/2026 दर्ज किया गया है और FIR में उन पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं. पटना पुलिस ने बताया है कि 13 फरवरी को दर्ज एफआईआर में अमिताभ दास के खिलाफ सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी फैलाने, जांच को प्रभावित करने जैसे आरोप शामिल हैं. इसके बाद प्रशासन ने जांच को आगे बढ़ाते हुए घर पर तलाशी ली, आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की.
बता दें कि शुक्रवार को चित्रगुप्त नगर थाना की पुलिस ने पाटलिपुत्र कॉलोनी स्थित पटना स्काइज अपार्टमेंट में उनके आवास पर छापेमारी की. इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल मौजूद रहा. तलाशी अभियान में तीन थानों की पुलिस टीम शामिल थी. मिली जानकारी के अनुसार, पटना पुलिस की कार्रवाई के दौरान अमिताभ दास की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उनके स्वास्थ्य परीक्षण के लिए मेडिकल टीम को बुलाया गया. बाद में पुलिस उन्हें मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले गई.

एफआईआर में क्या आरोप हैं?

एफआईआर में पुलिस ने स्पष्ट लिखा है कि अमिताभ दास और उनके संबंधी, मित्र या सहयोगी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे X (पूर्व Twitter), YouTube, Instagram एवं Facebook पर भ्रामक, झूठे और तथ्यों पर आधारित नहीं सामग्री प्रकाशित कर रहे थे. इन पोस्टों के माध्यम से उन्होंने कथित रूप से सार्वजनिक भावना को भड़काने की कोशिश की, सत्य तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया और इस प्रकार लोकशांति प्रभावित होने का प्रयास किया गया. एफआईआर में कहा गया है कि इन सोशल मीडिया पोस्टों में तथ्यों के विपरीत आरोपों से अधिकारियों का सम्मान और प्रतिष्ठा गिराने का प्रयास किया गया. आरोप है कि इन वीडियो, संदेशों और कमेंट्स का उद्देश्य राज्य की अनुसंधान प्रक्रिया को प्रभावित करना तथा समाज में भ्रम, तनाव और उत्तेजना फैलाना था.

POCSO केस में छेड़छाड़ का आरोप

एफआईआर में विशेष रूप से यह बात लिखी गई है कि मामला POCSO Act, 2012 से जुड़ा हुआ है. POCSO एक संवेदनशील कानून है जो बच्चों के खिलाफ अपराधों से निपटने के लिए बनाया गया है. पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल किए गए कथन और वीडियो से न सिर्फ जांच प्रभावित होने की आशंका है, बल्कि इसे मामले के प्रति जनता की धारणा को बदलने की नीयत से भी किया गया है. अतिरिक्त कहा गया है कि इस तरह की कोशिश से वास्तविक साक्ष्य, गवाहों की पहचान और विधिक प्रक्रिया पर असर पड़ेगा, जिससे न्याय प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है.

आरोपित किये गए IPC और POCSO धाराएं

एफआईआर में आरोपों को भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई धाराओं और POCSO Act की धारा 22(1) के तहत दर्ज किया गया है. इनमें शामिल हैं:
  •  IPC धारा 196 – सरकारी कार्य में बाधा डालना
  • IPC धारा 238 – आपराधिक अनियमितता से न्याय के काम में अवरोध
  •  IPC धारा 240 – न्यायालय की प्रक्रिया में बाधा
  •  IPC धारा 351(2) – व्यक्तिगत छेड़छाड़
  • IPC धारा 353(1)(बी) – सरकारी कार्य में बाधा और शक्ति का दुरुपयोग
  • POCSO Act धारा 22(1) – POCSO केस से संबंधित मामलों में गलत दावा करके या सच को छुपाकर जांच को प्रभावित करना
इन धाराओं के तहत आरोपित को सजा का प्रावधान है, जिसमें गंभीर मामलों में कई साल की सजा और जुर्माना दोनों शामिल हो सकते हैं.
पूर्व आईपीएस अमिताभ दास पर दर्ज केस बेहद गंभीर.

पुलिस की अनुसंधान प्रक्रिया और छानबीन

पुलिस सूत्रों ने बताया कि मामले का प्रारंभिक अनुसंधान यह दर्शाता है कि सोशल मीडिया पर फैलायी गई सामग्री आधारहीन और भड़काऊ थी. इसी वजह से पुलिस ने कई डिजिटल साक्ष्य एकत्र किए हैं, पोस्ट लिंक सेव किए हैं और उस पर गहन जांच जारी है. पूछताछ के दौर में कई सोशल मीडिया अकाउंट का विवरण भी हासिल किया गया है. पुलिस ने कहा है कि जांच को प्रभावित करने की कोशिश की हर जानकारी, हर पोस्ट को संज्ञान में लेकर वह कार्रवाई कर रही है. तलाशी के दौरान कंप्यूटर्स, मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी जब्त किए गए हैं, ताकि डिजिटल साक्ष्य की पड़ताल की जा सके.
Zoom
सोशल मीडिया पोस्ट से गिरफ्तारी तक पूर्व IPS अमिताभ दास पर कसा कानूनी शिकंजा

क्या अमिताभ दास का बयान आया?

अब तक पूर्व आईपीएस अमिताभ दास की ओर से कोई आधिकारिक बयान सार्वजनिक नहीं हुआ है. यह मामला सार्वजनिक है और न्यायलय प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगा. जानकारों का कहना है कि सोशल मीडिया पर दी गई जानकारी जब सार्वजनिक भावना को प्रभावित करे और जांच को प्रभावित करने का प्रयास करे तो उसकी गंभीरता से जांच की जाती है. इसीलिए पुलिस ने FIR में उन धाराओं को शामिल किया है जिनका दायरा गंभीर और संवेदनशील है.
Zoom
जांच प्रभावित करने के आरोप में पूर्व IPS पर FIR छापेमारी के बाद गिरफ्तारी

अमिताभ दास के पास क्या विकल्प?

अब मामला अनुसंधान के बाद न्यायालय में पेश होने की ओर बढ़ रहा है. जांच के आधार पर आगे आरोप तय होंगे और कोर्ट की सुनवाई शुरू होगी. एफआईआर में दर्ज धाराएं गंभीर हैं, इसलिए यह मामला सिर्फ सोशल मीडिया विवाद नहीं बचेगा, बल्कि कानूनी लड़ाई का रूप ले सकता है. अगले कुछ दिनों में न्यायालय में पेश होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कौन-सी धाराओं के तहत आरोप सिद्ध होते हैं और संभावित सजा कितनी हो सकती है. फिलहाल पुलिस जांच जारी है और आगे की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है.
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