बिहार की राजधानी पटना की एक अदालत ने बिहार बीजेपी के प्रदेश कोषाध्यक्ष और बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष राकेश कुमार तिवारी के खिलाफ 36 लाख रुपए की धोखाधड़ी के मामले में गैर-जमानती वारंट जारी किया है. फर्जी एनओसी के जरिए ठगी के इस केस में अगली सुनवाई 3 फरवरी 2026 को तय की गई है. अदालत ने पाटलिपुत्र थाना पुलिस को राकेश तिवारी की गिरफ्तारी कर कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया है. यह गैर-जमानती वारंट भारतीय न्याय संहिता की धारा 356(2) के तहत जारी किया गया है. बता दें कि मामला एक विज्ञापन कंपनी की शिकायत से जुड़ा है जिसमें आरोप है कि राकेश कुमार तिवारी ने फर्जी नगर निगम एनओसी दिखाकर सीसीटीवी इंस्टॉलेशन और विज्ञापन डिस्प्ले के नाम पर 36 लाख रुपए की ठगी की.
बीजेपी नेता राकेश तिवारी पर गैर-जमानती वारंट
इसी मामले में अदालत ने पहले उन्हें 21 दिसंबर 2025 तक पेश होने का आदेश दिया था, लेकिन पेशी नहीं होने पर 11 दिसंबर 2025 को न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी-5 की अदालत ने गैर-जमानती वारंट यानी एनबीडब्ल्यू (NBW) जारी कर दिया. अब इस केस की अगली सुनवाई 3 फरवरी 2026 को होगी जिस पर सभी की नजर टिकी है. दरअसल, यह मामला सिर्फ एक वित्तीय विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसके तार क्रिकेट प्रशासन, राजनीतिक रसूख और कथित जांच में गड़बड़ियों से भी जुड़ते दिख रहे हैं.
फर्जी एनओसी से 36 लाख की ठगी का आरोप
मिली जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता अस्तित्व एडवरटाइजिंग की ओर से दर्ज परिवाद संख्या 14786(सी)/2024 के अनुसार, राकेश तिवारी ने पटना नगर निगम की फर्जी एनओसी दिखाकर कंपनी से मोटी रकम वसूली. आरोप है कि काम शुरू होने के बाद दस्तावेजों की जांच में एनओसी फर्जी पाई गई. जब कंपनी ने पैसे लौटाने की मांग की तो टालमटोल शुरू हो गई. इसके बाद मामला अदालत पहुंचा और अब गैर-जमानती वारंट तक पहुंच गया है.
गिरफ्तारी के आदेश, पुलिस पर भी नजर
अब इस मामले को लेकर अदालत ने पाटलिपुत्र थाना को स्पष्ट निर्देश दिया है कि राकेश कुमार तिवारी को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया जाए. हालांकि पुलिस सूत्रों का कहना है कि राकेश तिवारी का राजनीतिक रसूख जांच और गिरफ्तारी की प्रक्रिया में बाधा बन सकता है. वे पिछले साल जून में बीजेपी की बिहार इकाई में प्रदेश कोषाध्यक्ष बनाए गए थे और पार्टी संगठन में उन्हें प्रभावशाली माना जाता है.
पहले भी मिल चुकी है अग्रिम जमानत
बता दें कि यह पहला मौका नहीं है जब राकेश कुमार तिवारी का नाम धोखाधड़ी के किसी मामले में सामने आया हो. अप्रैल 2025 में पटना की एक अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने उन्हें एक अन्य धोखाधड़ी मामले में अग्रिम जमानत दी थी. उस केस में भी सीसीटीवी और विज्ञापन के नाम पर 36 लाख रुपए की ठगी का आरोप था. हालांकि उस समय शिकायतकर्ता और राकेश तिवारी के बीच अदालत के बाहर समझौता हो गया था, जिसके बाद उन्हें 10 हजार रुपए के बॉन्ड पर जमानत मिली थी. अदालत ने तब कस्टोडियल पूछताछ की जरूरत नहीं मानी थी.