मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शनिवार सुबह करीब 10 बजे बख्तियारपुर पहुंचे और स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति में आयोजित राजकीय समारोह में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने अपने पिता कविराज रामलखन सिंह सहित स्वतंत्रता सेनानी शीलभद्र याजी, डूमर सिंह, मोगल सिंह और नाथुना सिंह यादव की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री के साथ बिहार सरकार के मंत्री विजय कुमार चौधरी, पटना के जिलाधिकारी त्यागराजन एसएम समेत कई वरीय अधिकारी भी मौजूद थे।

पत्रकारों को रखा गया कार्यक्रम स्थल से दूर
मुख्यमंत्री के आगमन के बाद आम लोगों और पत्रकारों को कार्यक्रम स्थल से दूर रखा गया, जिसको लेकर मौके पर नाराजगी भी देखने को मिली। स्वतंत्रता सेनानी डूमर सिंह के परिजनों ने आरोप लगाया कि उन्हें कार्यक्रम की पूर्व जानकारी तक नहीं दी गई। परिजनों के अनुसार, इस बार डूमर सिंह की पुत्रवधू समेत परिवार के कई सदस्य राजकीय सम्मान समारोह में पहुंचे थे, लेकिन मुख्यमंत्री से उनकी मुलाकात नहीं हो सकी। इससे परिजनों में उपेक्षा को लेकर नाराजगी देखी गई।

किनके परिजनों ने जताई नाराजगी?
शहीद डूमर सिंह के परिजनों ने कहा कि अपने पूर्वज के राजकीय सम्मान समारोह में उपेक्षित किया जाना दुखद है। वहीं अररिया के स्वतंत्रता सेनानी जगदीश सिंह के पौत्र ने आरोप लगाया कि बिहार में कई स्वतंत्रता सेनानी हैं, लेकिन राजकीय सम्मान सिर्फ बख्तियारपुर के पांच स्वतंत्रता सेनानियों तक सीमित है। इससे अन्य स्वतंत्रता सेनानियों की अनदेखी हो रही है, जो स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का अपमान है।