राजद नेता तेजस्वी यादव ने पहले नीतीश सरकार को 100 दिनों का समय दिया था। अब वह 74 दिन बाद ही सरकार को घेरेंगे, सीएम नीतीश कुमार को तेवर दिखाएंगे। उन्होंने फैमिली मैनेज करने का प्लान तैयार कर लिया है।
आगामी बजट सत्र को देखते हुए शुक्रवार को राजद की अहम बैठक हुई। इसमें पार्टी की रणनीति पर चर्चा हुई। तय किया गया कि आने वाले दिनों में किस तरह सरकार पर वार करना है। बैठक में तेजस्वी का बदला हुआ रुख भी दिखा। उन्होंने संकेतों में बता दिया कि अब संजय यादव से दूरी और पार्टी व परिवार से करीबी की राह पर चल पड़े हैं।
समझे तेजस्वी की क्या रणनीति है? वह किन चुनौतियों से जूझ रहे हैं। क्यों 100 की जगह 74 दिन बाद ही नीतीश सरकार पर हमला बोलने का फैसला किया है?
1- बैठकों में संजय से दूरी, परिवार के करीब
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राजद की करारी हार हुई। पार्टी मात्र 25 सीटों पर सिमट गई। इसके लिए तेजस्वी यादव और उनके बेहद करीबी संजय यादव को जिम्मेदार ठहराया गया। तेजप्रताप लंबे समय से संजय को जयचंद कह रहे हैं।
रिजल्ट के बाद रोहिणी आचार्य ने संजय यादव को लेकर तेजस्वी से तीखे सवाल किए। यहां तक कि उन्हें अपने ही घर में बेइज्जत होना पड़ा। उनपर चप्पल उठाया गया। इससे राजद और लालू परिवार की इमेज खराब हुई।
इन घटनाओं से सीख लेते हुए तेजस्वी ने अब सार्वजनिक मंच पर संजय यादव से दूरी और पार्टी-परिवार से करीबी की रणनीति अपनाई है ताकि विरोधी तो छोड़िए, अपनों की ओर से भी हो रही आलोचना से बच सकें।
तेजस्वी के सरकारी आवास पर शुक्रवार को हुई पार्टी के लोकसभा और राज्यसभा सांसदों की बैठक में यह साफ नजर आया। तेजस्वी के सबसे नजदीक बड़ी बहन और पाटलिपुत्र से सांसद मीसा भारती बैठीं, दूसरी तरफ लोकसभा में आरजेडी के संसदीय दल के नेता अभय कुशवाहा बैठे। राज्यसभा सांसद संजय यादव सबसे दूर बैठे।
2- जमीनी स्तर के मुद्दे उठाएंगे, विधायकों-उम्मीदवारों को दिया टास्क
तेजस्वी की रणनीति जमीनी स्तर के मुद्दों पर सरकार को घेरने की है। सरकार की नाकामियों को जनता के सामने लाने की है। इसके लिए उन्होंने पार्टी के विधायकों और विधानसभा चुनाव हारने वाले उम्मीदवारों को अपने-अपने क्षेत्र के मुद्दों की लिस्ट बनाकर देने का टास्क दिया है।
तेजस्वी इनका इस्तेमाल सदन से लेकर सड़क तक, सरकार को घेरने के लिए करने वाले हैं। वह बजट सत्र में सरकार की नाकामियों को गिनाएंगे। आंगनबाड़ी केंद्रों की खराब स्थिति, उप स्वास्थ्य केंद्रों की जर्जर हालत, सरकारी स्कूलों में ड्रॉप आउट जैसे जनता से जुड़े मुद्दे उठाएंगे।

3- महिलाओं को 2 लाख, हर वादे का मांगेंगे हिसाब
तेजस्वी नीतीश सरकार से हर चुनावी वादे पर हिसाब मांगेंगे। इसमें प्रमुख वादा जीविका दीदियों को कारोबार करने के लिए 2-2 लाख रुपए देने का है। तेजस्वी सरकार से पूछेंगे कि कितनी महिलाओं को पैसे मिले। इसके साथ ही एक करोड़ युवाओं को नौकरी/रोजगार, हर जिले में कारखाने स्थापित करने के वादे पूरा होने पर भी उनकी नजर है।
इसके साथ ही तेजस्वी जनता के बीच यह भी कहेंगे कि चुनाव ने उनकी पार्टी छल-कपट के चलते हारी। सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल किया गया। जनता की हार हुई।
4. राजद सांसदों को दिया टास्क, संसद में बिहार की हकमारी पर उठाएं सवाल
तेजस्वी यादव की रणनीति संसद में भी भाजपा के नेतृत्व वाली NDA सरकार को घेरने की है। इसके लिए उन्होंने अपनी पार्टी के सांसदों को टास्क दिया है। उनसे बिहार की हकमारी पर आवाज उठाने को कहा है।
बिहार को विशेष राज्य का दर्जा, विशेष पैकेज की स्थिति, केन्द्रीय योजनाओं में बिहार की हिस्सेदारी पर राजद सांसद मोदी सरकार से सवाल करेंगे। सरकार संसद में वन नेशन वन इलेक्शन जैसा बिल लाती है तो उसका विरोध किस तरह से किया जाएगा, इसके लिए भी रणनीति बनाई है।
5. भैया- दीदी के सवालों पर चुप्पी, भीतरघातियों पर कार्रवाई
तेजस्वी यादव परिवार के बड़े लोगों द्वारा उठाए जा रहे सवालों और तीखी आलोचनाओं पर चुप्पी साधे रखेंगे। बड़े भाई तेजप्रताप यादव और बड़ी बहन रोहिणी आचार्य द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देने की जगह, मौन रखेंगे।
दूसरी ओर चुनाव में पार्टी में रहकर खिलाफ काम करने वाले भीतरघातियों पर कड़ी कार्रवाई करेंगे। ऐसे करीब 400 नेताओं की लिस्ट पहले ही बन चुकी है। अभी पार्टी स्तर पर जांच की जा रही है कि इनपर लगाए गए आरोप कितने सही हैं। लिस्ट छोटी करने की कोशिश है। जिन नेताओं के खिलाफ पार्टी विरोधी काम के सबूत होंगे, तेजस्वी उनके खिलाफ सख्त एक्शन लेंगे।
100 की जगह 74 दिन बाद ही सरकार को क्यों घेरेंगे तेजस्वी?
तेजस्वी यादव ने यूरोप से लौटने के बाद कहा था कि सरकार को 100 दिन का समय देते हैं। इतने दिनों में नीतीश सरकार कुछ नहीं करती है तो खिलाफ में आवाज उठाएंगे। सरकार द्वारा 2 फरवरी 2026 से बजट सत्र बुलाए जाने से स्थिति बदल गई है।
सांसदों के साथ हुई बैठक में फैसला लिया गया है कि बजट सत्र में ही राजद सरकार की नाकामियों को लेकर आवाज उठाएगी। बजट सत्र सरकार बनने के 74 दिन बाद शुरू होने वाला है। इसमें विपक्ष के नेता के रूप में तेजस्वी यादव को बोलना है। तेजस्वी ने पहले सोचा था कि बजट सत्र फरवरी के आखिरी हिस्से में शुरू होगा।
किन 3 मुद्दों पर घिरे हुए हैं तेजस्वी?
1- कोर्ट के चक्कर, जेल जाने का डर
राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, तेजप्रताप यादव, मीसा भारती समेत 41 लोगों के खिलाफ 9 जनवरी 2026 को कोर्ट ने आरोप तय किए। मामला नौकरी के बदले जमीन लेने का है।
वहीं, IRCTC मामले में 14 जनवरी को दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि लालू और तेजस्वी के खिलाफ चल रहे मुकदमे पर रोक नहीं लगाएंगे। तेजस्वी और लालू प्रसाद ने इस मामले में उनके खिलाफ निचली अदालत द्वारा आरोप तय करने के आदेश को चुनौती दी थी। कोर्ट में चल रहे इन मामलों के चलते तेजस्वी पर भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं। जेल जाने का खतरा है।
2- बड़े भाई तेजप्रताप यादव के साथ लड़ाई
विधानसभा चुनाव के पहले अनुष्का से जुड़ा मामला सामने आने के बाद तेजप्रताप यादव को लालू यादव ने पार्टी और परिवार से 6 साल के लिए निकाल दिया। इसके बाद तेजप्रताप ने बागी रुख अपनाया। अपनी पार्टी (जनशक्ति जनता दल) बनाई। विधानसभा चुनाव लड़े।
वह तेजस्वी पर हमलावर रहे हैं। 14 जनवरी को तेजप्रताप के दही-जूड़ा भोज में लालू यादव गए। राज्यपाल आरिफ मोहम्मद, भाजपा नेता व डिप्टी CM विजय सिन्हा और जदयू नेता व मंत्री अशोक चौधरी आए। एक तरह से तेजप्रताप ने साबित कर दिया कि उन्हें हल्के में नहीं ले सकते।
तेजप्रताप के तेवर बता रहे हैं कि वे तेजस्वी के साथ पॉलिटिकल लड़ाई दमदार तरीके से लड़ेंगे। अपनी पार्टी को भविष्य में मजबूत करने में तेजप्रताप सफल हुए तो आरजेडी का ही वोट बैंक काटेंगे।
3. रोहिणी के सवाल पीछा नहीं छोड़ रहे, कहा- पहले गिद्धों को ठिकाने लगाए
चुनाव हारने के बाद लालू परिवार में टूट सामने आई। लालू यादव को किडनी देने वाली बेटी रोहिणी आचार्य ने हार की जिम्मेदारी को लेकर तेजस्वी यादव और उनके करीबी संजय यादव व रमीज से तीखे सवाल किए।
रोहिणी ने कहा कि उन्हें राबड़ी देवी आवास में गंदी-गंदी गालियां दी गईं, मारने के लिए चप्पल उठाई गई। ताना दिया गया कि पिता को गंदी किडनी दी, बदले में करोड़ों रुपए और चुनावी टिकट लिया। इसके बाद भी रोहिणी के सवाल तेजस्वी का पीछा नहीं छोड़ रहे हैं।
रोहणी ने सांसदों से साथ हुई बैठक पर भी तंज कसा। कहा, ‘ समीक्षा का दिखावा करने से ज्यादा जरूरी है खुद का आत्ममंथन और जिम्मेदारी लेना। अपने इर्द-गिर्द कब्जा जमाए बैठे चिन्हित गिद्धों को ठिकाने लगाने का साहस दिखाने के बाद ही किसी भी प्रकार की समीक्षा की सार्थकता होगी।’
खानापूरी में जुटे हैं तेजस्वी- प्रवीण बागी
सीनियर जर्नलिस्ट प्रवीण बागी ने कहा, ‘तेजस्वी यादव को विधानसभा चुनाव से हार का बड़ा सदमा लगा और उससे उबरने के लिए वे यूरोप की यात्रा पर गए। वहां से थोड़ा चार्ज होकर लौटे। सांसदों की बैठक बुलाई, लेकिन मकर संक्रांति का बड़ा मौका चूक गए।’
उन्होंने कहा, ‘बिहार की राजनीति में दही-चूड़ा भोज की शुरुआत लालू प्रसाद ने की थी। इससे कार्यकर्ताओं का जुड़ाव होता, लेकिन तेजस्वी ने यह आयोजन नहीं किया। उस परंपरा से कायम रखते तो कार्यकर्ताओं का मनोबल भी ठीक होता। गिले-शिकवे दूर होते, लेकिन लगता है तेजस्वी की मानसिकता क्लोज डोर मीटिंग वाली हो गई।’







