बिहार विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के विदेश दौरे को लेकर भारी हंगामा हो रहा है। बिहार विधानसभा के चुनाव में करारी हार झेलने के बाद राज्य में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ( एनडीए ) की नई सरकार का उदय होते ही राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव अपने परिवार के साथ छुट्टियां मनाने के लिए विदेश दौरे पर रवाना हो गए। तेजस्वी यादव तो पहले भी कई बार विदेश यात्राओं पर गए हैं। अभी ऐसा क्या है कि उनकी ताजा विदेश यात्रा को लेकर सत्ता पक्ष उन पर लगातार हमले कर रहा है? कई सवाल हैं, जिनका जवाब तेजस्वी यादव ही नहीं, सरकार की ओर से भी दिए जाने की अपेक्षा की जा रही है।
तेजस्वी यादव की निजी विदेश यात्रा पर बीजेपी के नेता और बिहार के मंत्री प्रमोद कुमार ने संदेह जताया है। उन्होंने तेजस्वी के विदेश प्रवास की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि जिस तरह सरकार तेजस्वी के परिवार की संपत्तियों की जांच कर रही है, उसी तरह उनकी विदेश यात्रा की भी गहरी जांच की जानी चाहिए। जनता दल यूनाईटेड (जेडीयू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने भी तेजस्वी यादव की विधानसभा सत्र के दौरान अचानक विदेश यात्रा पर जाने पर आलोचना की है।
अपराधियों के साथ विदेश यात्रा?
करीब 10 दिन पहले इस मुद्दे पर जेडीयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने भी तेजस्वी पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने तेजस्वी के परिवार के साथ विदेश यात्रा में दो अन्य लोगों के भी शामिल होने की बात कही थी। नीरज कुमार ने आरोप लगाया था कि तेजस्वी अपराधी रमीज नेमत खान और देव गुप्ता के साथ विदेश यात्रा पर गए थे। रमीज नेमत खान पर उत्तर प्रदेश में हत्या का आरोप था। देव गुप्ता के बारे में उन्होंने कहा था कि वे 100 इनामी अपराधियों की लिस्ट में शामिल हैं। देव गुप्ता 28 मामलों में आरोपी है और उस पर एक लाख रुपये का इनाम भी घोषित है। जेडीयू के एमएलसी नीरज कुमार ने डीजीपी को इस बारे में पत्र भी लिखा था।
यह तेजस्वी की पहली निजी विदेश यात्रा नहीं थी
तेजस्वी यादव पहली बार निजी विदेश यात्रा पर नहीं गए थे, वे इससे पहले कई बार परिवार के साथ विदेश यात्राएं कर चुके हैं। हालांकि उनकी पिछले कुछ सालों में हुईं विदेश यात्राएं चर्चा में रही हैं। चूंकि तेजस्वी यादव जमीन के बदले नौकरी सहित अन्य मामलों में आरोपी हैं, इसलिए उनकी किसी भी विदेश यात्रा के लिए अदालत की इजाजत जरूरी है। दिसंबर 2023 में जब वे बिहार के उप मुख्यमंत्री थे, तब वे विदेश यात्रा पर जाना चाहते थे। इसके लिए उन्हें दिल्ली के राउस एवेन्यू कोर्ट से इजाजत लेनी पड़ी थी। अदालत ने तेजस्वी को 6 से 18 जनवरी 2024 तक आधिकारिक दौरे के लिए ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जाने की अनुमति दे दी थी। सितंबर 2024 में भी कोर्ट ने तेजस्वी यादव को सपरिवार दुबई जाने की इजाजत दी थी।
विदेश दौरे का इजाजत क्यों जरूरी?
संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार केंद्र या राज्य के किसी भी नेता प्रतिपक्ष या मंत्री को विदेश दौरे पर जाने से पहले, चाहे वह आधिकारिक दौरा हो या निजी यात्रा हो, सरकार से इजाजत लेना आवश्यक होता है। यह जनप्रतिनिधि सार्वजनिक पद पर होते हैं, इसलिए इन्हें सुरक्षा भी दी जाती है। इनकी हर यात्रा की जानकारी सुरक्षा एजेंसियों को देना जरूरी है ताकि ‘येलो बुक’ प्रोटोकॉल के तहत उन्हें सुरक्षा उपलब्ध कराई जा सके। ‘येलो बुक’ में वीआईपी सुरक्षा से जुड़े दिशानिर्देश होते हैं। मुख्यमंत्री, मंत्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी विदेश यात्रा के लिए विदेश मंत्रालय और अन्य विभागों से राजनीतिक मंजूरी लेनी होती है। यही नहीं सांसद भी यदि किसी विदेश यात्रा पर जाते हैं तो उनको इसकी जानकारी सरकार को देनी होती है।
नेता प्रतिपक्ष की जवाबदेही से मुंह मोड़ा
अब कई सवाल उठ रहे हैं जिनके कारण तेजस्वी यादव बीजेपी,जेडीयू सहित एनडीए के अन्य दलों के निशाने पर हैं। बिहार विधानसभा के विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव नई विधानसभा (बिहार की 18वीं विधानसभा) के गठन की प्रक्रिया के बीच ही विदेश क्यों चले गए, जबकि वे एक महत्वपूर्ण पद पर हैं? पहले सत्र में सदन में उनकी पूरे समय मौजूदगी अपेक्षित थी। वे उन सभी मतदाताओं, जिन्होंने उन्हें चुना और विपक्ष के विधायक दल के लिए जवाबदेह हैं, जिन्होंने उन्हें इस पद पर पहुंचाया।
क्या तेजस्वी ने विदेश यात्रा के लिए ली थी मंजूरी?
तेजस्वी यादव ने क्या नीतीश कुमार की सरकार, विदेश मंत्रालय या अदालत से विदेश यात्रा के लिए मंजूरी ली थी? यदि सरकार से मंजूरी नहीं ली थी तो नीतीश सरकार और बीजेपी, जेडीयू के नेता यह स्पष्ट करें। वे तेजस्वी पर आरोप तो लगा रहे हैं, लेकिन यह साफ नहीं कर रहे हैं कि उन्होंने सरकार की सहमति से यह यात्रा की या असहमति के बावजूद चले गए। सत्ता पक्ष यदि यह तथ्य उजागर नहीं कर रहा तो तेजस्वी की पार्टी आरजेडी भी इस पर खामोश क्यों है? उसकी खामोशी ही संदेह को जन्म देने वाली है। सवाल यह भी है कि तेजस्वी पर क्या मौजूदा समय में विदेश यात्रा के लिए अदालत से इजाजत लेने की अनिवार्यता नहीं है? जो भी स्थिति हो, इसे स्पष्ट किया जाना जरूरी है।
तेजस्वी को देने होंगे सवालों के जवाब
तेजस्वी यादव की विदेश यात्रा को लेकर गंभीर सवाल उन दो लोगों को लेकर है जो उनके साथ गए थे। यानी रमीज खान और देव गुप्ता। आपरधिक पृष्ठभूमि के लोगों का तेजस्वी यादव की परिवार के साथ निजी यात्रा में शामिल होना गंभीर मामला है। यह आरोप साबित होने पर उनकी छवि पर धब्बा लगेगा। अब तेजस्वी यादव विदेश यात्रा से लौट आए हैं। बेहतर होगा कि वे अब अपनी यात्रा से जुड़े उन सभी तथ्यों को सार्वजनिक करें जिनको लेकर सवाल उठ रहे हैं। यदि वे खामोश बने रहे तो वे संदेह के घेरे में बने रहेंगे और एनडीए के निशाने पर भी बने रहेंगे।







