बिहार के गोपालगंज जिले में दुनिया का सबसे विशालकाय शिवलिंग बीते दो दिनों से बलथरी चेक पोस्ट पर फंसा हुआ है. तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई से करीब डेढ़ महीने पहले यह शिवलिंग एक ट्रेलर पर रवाना किया गया था. इस शिवलिंग को पूर्वी चंपारण जिले के केसरिया में निर्माणाधीन विराट रामायण मंदिर में स्थापित किया जाना है.
आज गोपालगंज से पूर्वी चंपारण के केसरिया स्थित निर्माणाधीन विराट रामायण मंदिर के लिए विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग की ऐतिहासिक यात्रा निकाली गयी। जिसमें बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी और बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद के सदस्य सायन कुणाल भी शामिल हुए। गोपालगंज पहुंचे दोनों नेताओं ने सबसे पहले थावे दुर्गा मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की। इसके बाद वे कुचायकोट थाना क्षेत्र अंतर्गत बलथरी चेकपोस्ट पहुंचे, जहां विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग की विधिवत पूजा संपन्न हुई। पूजा के उपरांत यह विशाल शिवलिंग अपने अंतिम गंतव्य पूर्वी चंपारण के केसरिया स्थित निर्माणाधीन विराट रामायण मंदिर के लिए रवाना किया गया।
इस अवसर पर मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि “यह शिवलिंग केवल पत्थर की आकृति नहीं, बल्कि एक महान संकल्प का प्रतीक है। स्वर्गीय किशोर कुणाल जी का सपना था कि ऐसा शिवलिंग बने, जिसके दर्शन और जलाभिषेक से 1008 शिवलिंग के पूजन का पुण्य प्राप्त हो। आज वह सपना साकार हो रहा है।” उन्होंने बताया कि महावीर मंदिर ट्रस्ट की टीम इस पूरे प्रोजेक्ट की नियमित निगरानी कर रही है, ताकि निर्माण और स्थापना कार्य पूरी शुद्धता, भव्यता और सनातन परंपरा के अनुरूप हो।
इस पावन अवसर पर बिहार विधान परिषद सदस्य राजीव कुमार सिंह उर्फ गप्पू बाबू और बरौली विधायक मनजीत सिंह भी मौजूद रहे। मंत्री ने कहा कि दोनों जनप्रतिनिधि सनातन धर्म में गहरी आस्था रखते हैं और उनके नेतृत्व में ही बलथरी बॉर्डर पर विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न हुई।
उत्तर प्रदेश से भी हनुमानगढ़ी से जुड़े संत और श्रद्धालु इस शिवलिंग के स्वागत में गोपालगंज बॉर्डर तक पहुंचे। मंत्री अशोक चौधरी ने कहा, “हनुमान जी को रुद्र पुत्र माना जाता है और महादेव स्वयं हनुमान जी के रूप हैं। ऐसे में इस शिवलिंग की स्थापना से बिहार में सनातन परंपरा को नई ऊर्जा और नई शक्ति मिलेगी।”
बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद के सदस्य सायन कुणाल ने जानकारी दी कि यह शिवलिंग 10 से 12 तारीख के बीच केसरिया पहुंचेगा, जबकि 17 तारीख, मार्ग कृष्ण चतुर्दशी के पावन अवसर पर इसकी विधिवत स्थापना की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि विराट रामायण मंदिर का संपूर्ण निर्माण कार्य वर्ष 2030 तक पूरा कर लिया जाएगा। उसी वर्ष सभी देवी-देवताओं की भव्य प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न होगी और इसके बाद मंदिर को श्रद्धालुओं के लिए पूरी तरह खोल दिया जाएगा।
गोपालगंज की धरती से शुरू हुई यह शिवभक्ति की विराट यात्रा न केवल बिहार, बल्कि पूरे देश और विश्व के सनातन श्रद्धालुओं के लिए एक ऐतिहासिक अध्याय बनने जा रही है। विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग, विराट रामायण मंदिर और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था यह सब मिलकर बिहार को एक वैश्विक धार्मिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
अपने निर्धारित रूट के अनुसार शिवलिंग को गोपालगंज से होते हुए पूर्वी चंपारण पहुंचना था, लेकिन गोपालगंज और पूर्वी चंपारण जिले की सीमा पर गंडक नदी पर बने पुल की जर्जर हालत इसके रास्ते में बड़ी बाधा बन गई. पुल की भार वहन क्षमता कम होने के कारण इतने भारी शिवलिंग को वहां से ले जाना सुरक्षित नहीं माना गया. इसी वजह से प्रशासन ने एहतियातन शिवलिंग को गोपालगंज के बलथरी चेक पोस्ट पर रोक दिया है.
शिवलिंग की आगे की यात्रा को लेकर असमंजस की स्थिति
फिलहाल शिवलिंग की आगे की यात्रा को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है. प्रशासन की ओर से पुल और वैकल्पिक मार्गों की तकनीकी जांच कराई जा रही है, ताकि बिना किसी खतरे के इसे उसके गंतव्य तक पहुंचाया जा सके. तब तक दुनिया के इस विशालकाय शिवलिंग को बलथरी चेक पोस्ट पर ही रोके रखा गया है.
जानकारी के अनुसार, इस शिवलिंग का वजन करीब 210 मीट्रिक टन है. इसे चेन्नई से विशेष रूप से डिजाइन किए गए भारी-भरकम ट्रक के जरिए रवाना किया गया था. लगभग 45 दिनों की कठिन और लंबी यात्रा के बाद यह शिवलिंग गोपालगंज जिले तक पहुंचा. अपने तय रूट के अनुसार इसे गंडक नदी पार कर पूर्वी चंपारण जाना था, लेकिन जिस पुल से इसे ले जाया जाना है, उसकी भार वहन क्षमता केवल 100 मीट्रिक टन बताई जा रही है. ऐसे में केवल शिवलिंग का वजन ही पुल की क्षमता से कहीं अधिक है, जबकि ट्रक का वजन जोड़ने पर कुल भार और भी बढ़ जाता है.
पुल की कमजोर स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने कोई जोखिम न उठाने का फैसला किया है. इसी कारण शिवलिंग को फिलहाल बलथरी चेक पोस्ट पर ही रोक दिया गया है. शिवलिंग के अटकने की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है. आगे के रूट को लेकर तकनीकी जांच की तैयारी शुरू कर दी गई है, ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना या नुकसान से बचा जा सके.
डुमरिया पुल की भार क्षमता का आकलन कराया जा रहा
प्रशासन की ओर से सड़क की चौड़ाई, मजबूती, तीखे मोड़ों और विशेष रूप से गंडक नदी पर बने डुमरिया पुल की भार क्षमता का गहन आकलन कराया जा रहा है. इसके लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के अधिकारियों के साथ-साथ भार क्षमता विशेषज्ञों की टीम को भी शामिल किया गया है. जब तक विशेषज्ञों की रिपोर्ट नहीं आ जाती और सभी सुरक्षा मानकों पर संतोष नहीं हो जाता, तब तक शिवलिंग को आगे ले जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी.
इस बीच जिलाधिकारी पवन कुमार सिन्हा और पुलिस अधीक्षक अवधेश दीक्षित स्वयं बलथरी चेक पोस्ट पर पहुंचे. उन्होंने शिवलिंग के साथ यात्रा कर रही टीम से मुलाकात कर अब तक की यात्रा के दौरान आई चुनौतियों और आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि श्रद्धालुओं की आस्था के साथ-साथ सार्वजनिक सुरक्षा सर्वोपरि है.
उधर, विशाल शिवलिंग के गोपालगंज में रुके होने की खबर फैलते ही आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौके पर पहुंचने लगे हैं. श्रद्धालु वहीं शिवलिंग की पूजा-अर्चना कर रहे हैं, जिससे बलथरी चेक पोस्ट क्षेत्र एक धार्मिक स्थल जैसा दृश्य प्रस्तुत कर रहा है.







