राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने एक बार लोकसभा में टिप्पणी की थी कि नीतीश कुमार के पेट में दांत है। किसी को पता भी नहीं चलेगा और वे काट लेंगे। बिहार के वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में बीजेपी और जदयू के बीच रिश्ते की कुछ इसी तरह की तस्वीर बनती दिख रही है। कहने को बीजेपी भले विभाग को लेकर अपने मुंह मियां मिट्ठू बन रही है पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने यह तो साबित कर दिया कि बिहार के सिकंदर वही हैं। आइए जानते है कि उन्होंने कैसे और कब-कब बीजेपी को पटखनी दी है।
3 नए विभाग का गठन कर चौंकाया
विभागों की आपाधापी में नीतीश कुमार ने एक नया खेल रच कर बीजेपी को पटखनी दे डाली। आननफानन में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 3 नए विभाग का गठन कर डाला। इसके बाद बाजी यह चली कि इन 3 विभागों में सिविल विमानन विभाग तो अपने पास रखा। साथ ही शिक्षा मंत्री सुनील कुमार को उच्च शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी भी सौंपी दी। केवल एक विभाग बीजेपी के हवाले की और वह भी रोजगार व कौशल। इस विभाग को संजय सिंह टाइगर के हवाले तो किया पर महत्वपूर्ण विभाग आपने पास रख कर यह बता डाला कि यहां के हम सिकंदर हैं।
जनता से जुड़े विभाग
मुख्यमंत्री ने एक खेला यह भी कर डाला कि जो विभाग जनता से सीधे जुड़ा हो, वह इसलिए भी बीजेपी को दे दिया की जनता किसी असफलता पर भगवा पार्टी को ही टारगेट कर ले। वह चाहे राजस्व और भूमि विभाग हो या गृह विभाग या फिर स्वास्थ विभाग भी। कानून व्यवस्था बिगड़ी तो बीजेपी के हाथ से जंगल राज का मुद्दा छूटेगा। हाल के दिनों में सबसे ज्यादा जनता का टारगेट राजस्व एवं भूमि विभाग बना। विभाग द्वारा कल्याण शिविर में जनता की लगातार आ रही शिकायतों से पदाधिकारी और मंत्री को दो-चार होना पड़ रहा है। स्वास्थ विभाग को लेकर भी आए दिन हॉस्पिटल की अव्यवस्था की तस्वीर भी बीजेपी के लिए परेशानी का कारण बन रहा है।
गृह विभाग भी बना गले की फांस
कहने को भले बीजेपी यह कहकर अपनी पीठ थपथपा रही है कि 20 साल बाद गृह विभाग हासिल किया। पर सच्चाई कुछ और है। प्रशासन के सूत्रों की मानें तो गृह विभाग लेकर बीजेपी बुरी तरह फंस गई है। अपराध बढ़ेंगे तो लोग बीजेपी के गले पड़ेंगे। और सफलता मिली तो नीतीश नीत सरकार के पाले में जाएगी। राजनीतिक गलियारों की मानें तो गृह विभाग देकर नीतीश कुमार ने आपने पाले में सम्मान्य प्रशासन रखा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सामान्य प्रशासन अपने पास रखकर हर ताले की चाबी अपने पास रखी है।
कहने को भाजपाई के हाथ वो तीर आ गया है कि उससे कहीं भी निशाना साध लेंगे। पर ऐसा तभी होता जब गृह के साथ सामान्य प्रशासन भी उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ले पाते। लेकिन ऐसा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने होने नहीं दिया। सामान्य प्रशासन के नाम पर आईएएस को अपने साथ लेकर खुद को मजबूत भी किया है। सामान्य प्रशासन रख कर आईएएस की पोस्टिंग,प्रोन्नति और विभागों में नौकरी का सृजन के साथ ट्रांसफर-पोस्टिंग सबको अपने पास रखा है।
सचिव के जरिए कमांड
एक तरह से कहें तो जो विभाग बीजेपी के पास भी है उस पर अपरोक्ष रूप से पकड़ नीतीश कुमार सचिव के जरिए बनाते रहें हैं। याद कीजिए बीजेपी के मंत्री ही कहते थे कि सचिव के माध्यम से नीतीश विभाग को कंट्रोल करते हैं। यह नीतीश कुमार के शासन करने का अपना स्टाइल है।
लालू यादव को भी दिया झटका
बिहार में नवंबर में विधानसभा चुनाव हुए, जिसमें नीतीश कुमार नीत जदयू और बीजेपी ने भारी बहुमत हासिल किया। चुनाव में राजद को करारी शिकस्त मिली और पार्टी 75 से घटकर 25 सीटों तक सिमट गई, जो बड़ा झटका था। साथ ही लालू यादव को पटना के 10 सकुर्लर रोड वाला सरकारी आवास भी खाली करना पड़ेगा, जहां वे लगभग 20 साल से रह रहे थे।







