लंबे समय तक केवल बाढ़ और त्रासदी को लेकर मीडिया की सुर्खियां बनने वाला बिहार का मिथिलांचल अचानक राजनीतिक रूप से चर्चा के आ गया है. सत्ताधारी दल से लेकर विपक्ष तक का मिथिलांचल पर फोकस बढ़ गया है. बिहार के तमाम राजनीतिक दल मिथिलांचल के मुद्दे उठाने के साथ ही वहां क्षेत्रीय क्षत्रप तैयार करने में जुटे दिख रहे हैं. देखकर ऐसा लगने लगा है कि अचानक पिछले कुछ साल में मिथिलांचल राजनीतिक रूप से उपजाऊ इलाका बन गया है. 2025 के विधानसभा चुनाव में मिथिलांचल की 37 में 32 सीटें एनडीए के खाते में गई है. महागठबंधन महज 4 सीटों पर सिमट गया है.
बीजेपी को मिथिलांचल पर खास फोकस
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का मिथिलांचल पर खास फोकस दिख रहा है. ब्राह्मण और मुस्लिम बाहुल्य माने जाने वाले मिथिलांचल को लेकर बीजेपी ने सबसे बड़ा दांव संजय सरावगी को लेकर खेला है. बीजेपी ने संजय सरावगी को बिहार बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया है. इससे पहले बीजेपी संजय सारावगी को राज्य में मंत्री भी बनाती रही है. 2025 के चुनाव में प्रचंड जीत के बाद बनी सरकार में मिथिलांचल से बीजेपी ने मधुबनी से भाजपा के अरुण शंकर प्रसाद को मंत्री बनाया है.
इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह लगातार जनसभाओं में मिथिला को लेकर तमाम घोषणाएं करते रहे हैं. मखाना बोर्ड का गठन हो या पुनौराधाम में मां जानकी का भव्य मंदिर निर्माण, इन तमाम बातों का जिक्र बीजेपी के दोनों बड़े नेता अपनी तमाम बिहार दौरों में करते रहे हैं. इसके अलावा कई मौकों पर वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण से लेकर तमाम केंद्रीय मंत्री मिथिला की पेंटिंग और वहां बने सामानों का प्रचार प्रसार करते दिखते हैं. इसके अलावा बीजेपी ने लोक गायिका मैथिली ठाकुर को इसी इलाके से टिकट देकर विधानसभा भी पहुंचाया है. नीतीश मिश्रा पहले से ही मिथिलांचल में बीजेपी का बड़ा चेहरा रहे हैं. इस बार उन्हें नीतीश कैबिनेट में जगह नहीं मिलने पर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा भी हुई थी.
संजय झा और मदन सहनी के जरिए मिथिलांचल पर पकड़ बनाए हैं नीतीश
मिथिलांचल पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी पार्टी जेडीयू भी अपनी पकड़ मजबूत किए है. मिथिला की मौजूदा राजनीति में जेडीयू के तरफ से सबसे बड़ा चेहरा संजय कुमार झा हैं. नीतीश कुमार ने पहले संजय झा को विधान परिषद सदस्य बनाकर राज्य सरकार में मंत्री बनाया. इसके बाद राज्य सभा भेजा. नीतीश कुमार ने मिथिलांचल के लाल संजय कुमार झा पर इतना ज्यादा भरोसा जताया है कि उन्हें जेडीयू का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया है.
संजय झा तमाम मौकों पर सीएम नीतीश कुमार को मधुबनी, दरभंगा समेत मिथिला के अलग-अलग हिस्सों में दौरे करवाते रहे हैं. 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान संजय झा ने इस इलाके में पार्टी के धुंआधार प्रचार करते दिखे थे. दरभंगा ग्रामीण सीट पर 30 साल बाद जेडीयू प्रत्याशी ने जब आरजेडी को हराया तो इसका जोर शोर से प्रचार किया गया और क्रेडिट संजय झा के चुनाव मैनेजमेंट को दिया गया.
संजय झा तमाम मौकों पर सीएम नीतीश कुमार को मधुबनी, दरभंगा समेत मिथिला के अलग-अलग हिस्सों में दौरे करवाते रहे हैं. 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान संजय झा ने इस इलाके में पार्टी के धुंआधार प्रचार करते दिखे थे. दरभंगा ग्रामीण सीट पर 30 साल बाद जेडीयू प्रत्याशी ने जब आरजेडी को हराया तो इसका जोर शोर से प्रचार किया गया और क्रेडिट संजय झा के चुनाव मैनेजमेंट को दिया गया.
दरभंगा एयरपोर्ट को शुरू कराने की बात हो चाहे दरभंगा एम्स के सपने को मिशन तक पहुंचाने का प्रयास या फिर मिथिला हाट की शुरुआत, तमाम मुद्दों का क्रेडिट संजय कुमार झा को दिया जाता रहा है. इसके अलावा मिथिला इलाके को बाढ़ से बचाने के लिए संजय कुमार झा की ओर से केंद्रीय मंत्रियों से लगातार किए जाने वाले प्रयास की भी खूब बातें होती हैं.
संजय कुमार झा को राज्य सभा भेजे जाने के बाद जेडीयू ने राज्य स्तर पर मदन कुमार सहनी के चेहरे को मिथिलांचल में आगे बढ़ाने का काम कर रही है. 2025 में जीत के बाद नीतीश कुमार ने मदन सहनी के रूप में जेडीयू के मजबूत चेहरे को कैबिनेट में जगह दी है.
आरजेडी समेत पूरे महागठबंधन का भी मिथिलांचल का फोकस
बिहार के मिथिलांचल आरजेडी समेत तमाम विपक्षी दलों की प्रयोरिटी लिस्ट में है. विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी मिथिलांचल को अलग राज्य बनाने जैसी बातें करती देखी गई हैं. इसके अलावा विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी मिथिलांचल के लगातार दौरे करते दिखे हैं. ललित यादव और अब्दुल बारी सिद्दीकी जैसे नेता आरजेडी के बड़े चेहरे मिथिलांचल से हैं.
वहीं कांग्रेस पार्टी 2025 में भले ही मिथिलांचल से पूरी तरह उखड़ गई, लेकिन यह इलाका इस पार्टी की भी प्रयोरिटी में रहा है. हाल के दौर में मदन मोहन झा मिथिला में कांग्रेस के सबसे चर्चित चेहरा रहे हैं. इसके अलावा वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी भी मिथिलांचल इलाके से आते हैं. इस बार के चुनाव में उनकी पार्टी का कोई भी उम्मीदवार यहां से नहीं जीत पाया है, लेकिन वह भी यहां अपनी ताकत बनाए रखने के लिए हमेशा तैयारी में दिखते हैं. राजनीति में हाथ आजमाने उतरे प्रशांत किशोर भी मिथिलांचल में अपनी पकड़ बनाने के प्रयास में दिखे हैं.







