सुप्रीम कोर्ट ने इंडिगो फ्लाइट से जुड़े संकट मामले में तुरंत दखल देने से इनकार कर दिया है. याचिका में इस मुद्दे को तुरंत सूचीबद्ध करने की मांग की गई थी. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि हालात जस के तस होते तो अलग बात थी, हम समझते हैं कि लाखों लोग इस समस्या का सामना कर रहे हैं, लेकिन सरकार मामले को देख रही है, उन्हें ही इसे संभालने दें. वहीं याचिकाकर्ता वकील ने कहा कि 2500 उड़ानें विलंबित हैं और 95 हवाई अड्डे प्रभावित हैं.
पिछले 7 दिन से इंडिगो की ज्यादातर उड़ानें कैंसिल हो रही हैं, जिसे लेकर जनहित याचिका दायर की गई थी और तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की गई थी. आज भी 200 से ज्यादा फ्लाइटें रद्द हैं. यात्री परेशान हो रहे हैं. याचिका में प्रभावित यात्रियों के लिए वैकल्पिक यात्रा और मुआवजे की मांग की गई थी.
उड़ान रद्द होने के कारण पायलटों के नए FDTL नियमों की योजना को गलत बताया गया है. याचिका में यह भी कहा गया कि इस तरह से इंडिगो के उड़ानों को रद्द करना अनुच्छेद 21 के अधिकारों का उल्लंघन है.
6 दिसंबर को सीजेआई के घर पहुंचे थे याचिकाकर्ता के वकील
इंडिगो की फ्लाइट कैंसिल और देरी से चलने की प्रक्रिया की वजह से यात्रियों को काफी दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं. ऐसे में 6 दिसंबर को याचिकाकर्ता के वकील CJI सूर्यकांत के घर पहुंचे और उनसे इस मामले में तत्काल सुनवाई करने की मांग की.फ्लाइट के कैंसिल होने पर सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल की गई है.
वकील नरेंद्र मिश्रा ने कहा कि जस्टिस सूर्यकांत ने हमारी याचिका देखी और स्टाफ को इस मामले के लिए निर्देश दिया है. उन्होंने बताया कि सीजेआई के स्टाफ ने ओएसडी कुंतल शर्मा पाठक का नंबर मुझे दिया है. सीजेआई की ओर से आश्वासन दिया गया था कि मामले पर जल्द सुनवाई की जाएगी. ऐसे में आज याचिका को लेकर सुनवाई होनी है. याचिका में यात्रियों को भारी परेशानी और मानवीय संकट पैदा होने की बात कही गई है.







