श्रीलंका में आए भीषण चक्रवात ‘दित्वा’ से मची भारी तबाही के बाद राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने पूरे देश में आपातकाल लगा दिया है। चक्रवात के कारण मरने वालों की संख्या 150 से अधिक हो गई है। देश के विभिन्न प्रांतों से भूस्खलन में लोगों के दबने और अचानक आई बाढ़ में बह जाने की दर्दनाक घटनाएं सामने आ रही हैं। इसी बीच भारत ने ‘ऑपरेशन सागर बंधु’ के तहत दो सैन्य विमानों से करीब 21 टन राहत सामग्री श्रीलंका भेजी है। एनडीआरएफ टीम रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी है। विदेश मंत्री जयशंकर ने जांबांजों का एक वीडियो शेयर किया है।
एनडीआरएफ के जवान बने हनुमान
श्रीलंका के बाढ़ पीड़ितों को रेस्क्यू करने में भारत से भेजे गए 80 जवान हनुमान के रूप में आपदाग्रस्त लोगों की जान बचा रहे हैं। अब धीरे-धीरे चक्रवात के श्रीलंका से दूर जाने के साथ जलस्तर घट रहा है, लेकिन अधिकारियों ने चेतावनी दी कि इसके अप्रत्यक्ष प्रभाव अभी जारी रहेंगे। आपदा प्रबंधन केंद्र (डीएमसी) की रिपोर्ट के अनुसार, खराब मौसम से मरने वालों की संख्या बढ़कर 153 हो गई है। डीएमसी ने बताया कि 191 लोग लापता हैं और कई जिलों में तलाशी और राहत अभियान जारी है। कुल 25 जिलों में 2,17,263 परिवारों के 7,74,724 लोग इस आपदा से प्रभावित हुए हैं। कई क्षेत्रों में बाढ़, भूस्खलन और भारी बारिश के कारण हालात अभी भी कठिन बने हुए हैं।
हेलीकॉप्टर और बोट से किया जा रहा रेस्क्यू
बाढ़ में फंसे लोगों को हेलीकॉप्टर और बोट के जरिये एनडीआरफ के जवान रेस्क्यू कर रहे हैं। ऐसे कई वीडियो सामने आए हैं, जिसके जरिये भारतीय जवान बाढ़ पीड़ितों की मुश्किल हालात में जान बचाते दिख रहे हैं। एनडीआरएफ जवानों की इस जांबाजी को हर कोई सलाम कर रहा है। भारत ने श्रीलंका के मुश्किल समय में बड़ा सहारा दिया है। भारत से राहत सामग्री लगाता श्रीलंका के बाढ़ पीड़ितों को पहुंचाई जा रही है। अब तक 21 टन से अधिक राहत सामग्री कोलंबो भेजी जा चुकी है।
श्रीलंका ने पूरे देश में लगाया आपातकाल
डीएमसी के अनुसार देशभर में 798 राहत शिविरों में 27,494 परिवारों के 1,00,898 लोग फिलहाल आश्रय लिए हुए हैं। शुक्रवार रात जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, पूरे देश में आपातकाल लागू कर दिया गया है। भारतीय वायुसेना ने सोशल मीडिया पर बताया कि चक्रवात ‘दित्वा’ से हुई तबाही को देखते हुए राहत प्रयासों में तेजी लाने के लिए ‘ऑपरेशन सागर बंधु’ शुरू किया गया। शुक्रवार और शनिवार की मध्यरात्रि को हिंडन एयरबेस से एक सी-130 और एक आईएल-76 विमान भेजे गए, जिनके माध्यम से 21 टन राहत सामग्री, 80 से अधिक एनडीआरएफ कर्मी और आठ टन उपकरण श्रीलंका भेजे गए। जरूरतमंद समुदायों के लिए आवश्यक राशन और जरूरी सामान पहुंचाया गया। वायुसेना ने कहा, “पड़ोसी प्रथम” की नीति पर चलते हुए भारत इस संकट की घड़ी में श्रीलंका के साथ मजबूती से खड़ा है।
श्रीलंका में 159 लोगों की मौत, 200 से अधिक लोग लापता
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श्रीलंका के डिज़ास्टर मैनेजमेंट सेंटर (डीएमसी) ने बताया कि चक्रवाती तूफ़ान दित्वाह के कारण हुई बारिश, बाढ़ और भूस्खलन में कम से कम 159 लोगों की मौत हुई है, जबकि 200 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं.
वहीं पांच लाख से अधिक लोग इस आपदा से प्रभावित हुए हैं. श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने पूरे देश में आपातकाल की घोषणा की है.
डीएमसी ने बताया कि इस तूफ़ान के कारण मची तबाही में 20 हज़ार से अधिक घर नष्ट हो गए हैं. एक लाख से अधिक लोगों को सरकारी राहत शिविरों में भेजा गया है.
भारत ने भेजी मदद
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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को बताया कि श्रीलंका को कुल मिलाकर लगभग 27 टन राहत सामग्री हवाई और समुद्री रास्ते से पहुंचाई गई है. साथ ही, और भी मदद जल्द ही भेजी जाएगी.
भारतीय वायुसेना ने बताया कि श्रीलंका में मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियान तेज़ करने के लिए वहां एमआई-17 वी5 हेलीकॉप्टर तैनात किए गए हैं.
वहीं श्रीलंका में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए वायु सेना के कई विमानों को लगाया गया है.
आईएनएस विक्रांत के चेतक हेलीकॉप्टरों ने शनिवार को श्रीलंका में सर्च और रेस्क्यू उड़ानें भरीं, और चक्रवात से प्रभावित लोगों की मदद की. श्रीलंका में भारतीय उच्चायोग ने इसका एक वीडियो शेयर किया है.
वहीं केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने शनिवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर को खत लिखकर दित्वाह के कारण श्रीलंका के कोलंबो एयरपोर्ट पर फंसे भारतीयों के लिए राज्य सरकार की ओर से हर संभव मदद की पेशकश की.
विजयन ने अपने खत में कहा कि चक्रवात के कारण कोलंबो के भंडारनायके अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर काफी समस्या हो गई है. इस वजह से लगभग 300 भारतीय यात्री फंस गए हैं, जिनमें से कई केरल के रहने वाले हैं.
इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड में भी बाढ़ का कहर
बीबीसी की जेसिका रॉन्स्ले की रिपोर्ट के मुताबिक़ दक्षिण पूर्व एशिया के कई इलाकों में भारी बारिश के कारण बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं हुई हैं. इसमें सैकड़ों लोगों की मौत हुई है और कई लोग लापता हैं.
इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड में लाखों लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं. इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप पर बुधवार को तेज़ बारिश हुई. वहां एक निवासी ने न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स को बताया, “बाढ़ के दौरान, सब कुछ बह गया.”
शनिवार तक इंडोनेशिया में 300 से ज़्यादा और थाईलैंड में 160 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई है. मलेशिया में भी कई मौतें हुई हैं. सैकड़ों लोग अभी भी लापता हैं, इसलिए मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है.







