यूक्रेन युद्ध को रोकने की कोशिशों में अचानक बड़ी हलचल शुरू हो गई है. यूक्रेन की हाई-लेवल टीम अमेरिका पहुंच चुकी है, जहां वे अमेरिकी अधिकारियों के साथ मिलकर युद्ध खत्म करने के रोडमैप पर बातचीत करेंगे. यह बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब दो रूसी तेल टैंकर पर हमले हुए हैं. समुद्र में वह जलते हुए दिखाई दिए. यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने बताया कि इस टीम का नेतृत्व उनके राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख रुस्टम उमेरोव कर रहे हैं और उनका मकसद है, जितना जल्दी हो सके, शांति प्रक्रिया के अगले ठोस कदम तय किए जाएं. अमेरिका में यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करने के लिए विदेश मंत्री मार्को रुबियो, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेयर्ड कुशनर मौजूद रहेंगे. यह मुलाकात इसलिए भी अहम है क्योंकि यूएस में बातचीत खत्म होते ही अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल सीधे रूस जाएगा और मॉस्को में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात करेगा. यानी पहली बार ऐसा लग रहा है कि अमेरिका दोनों पक्षों के बीच एक सीधी मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है.
पुराने प्रस्ताव पर क्यों नहीं बनी बात?
यह दौड़-भाग इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि पिछले हफ्ते ट्रंप ने 28-बिंदुओं वाला एक शांति प्रस्ताव जारी किया था, जिसे ज्यादातर विशेषज्ञों ने रूस को फायदा पहुंचाने वाला बताया. इस प्रस्ताव में रूस को कई इलाकों पर नियंत्रण देने और यूक्रेन की सेना का आकार सीमित करने जैसे मसौदे शामिल थे. इस पर आलोचना बढ़ने के बाद ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने अपने प्लान को ‘फाइन ट्यून’ कर दिया है. जेलेंस्की ने भी इसे हल्के में नहीं लिया और तुरंत अमेरिकी टीम से बातचीत शुरू कर दी.
जेलेंस्की के करीबी का इस्तीफा
यूक्रेन का यह प्रयास उस वक्त हो रहा है जब उनका पुराना मुख्य वार्ताकार और राष्ट्रपति जेलेंस्की के सबसे भरोसेमंद चेहरों में से एक, एंड्री यरमाक, अचानक भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच घर पर छापे के बाद इस्तीफा देकर बातचीत से बाहर हो गया. इससे यूक्रेन की वार्ता टीम में बदलाव करना पड़ा.
रूस के तेल टैंकर पर हमला?
इधर, जमीनी मोर्चे पर भी स्थिति बेहद तनावपूर्ण है. काला सागर में यूक्रेन ने रूस के दो बड़े तेल टैंकरों काइरोस और विराट पर समुद्री ड्रोन से हमला किया. फुटेज में ये ‘सी बेबी’ ड्रोन टैंकरों से टकराते दिखे. दोनों जहाजों को भारी नुकसान हुआ और उन्हें सर्विस से बाहर कर दिया गया. ये वही टैंकर हैं जिन्हें रूस प्रतिबंधों से बचकर कच्चा तेल विदेश भेजने के लिए इस्तेमाल करता है. यूक्रेन का दावा है कि ये टैंकर रूस की ‘शैडो फ्लीट’ का हिस्सा थे, जिनके जरिए रूस युद्ध के लिए पैसे जुटा रहा है. तुर्की ने भी पुष्टि की कि काइरोस में बड़ा धमाका हुआ और उस पर आग लग गई, जबकि विराट को तट से 35 नॉटिकल मील दूर निशाना बनाया गया.







