ihar Chunav Mahua Vidhansabha Seat : तेजस्वी यादव जब पहली बार अपनी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रत्याशी मुकेश रौशन के लिए महुआ विधानसभा सीट पर प्रचार के लिए उतरे तो यह केवल एक चुनावी सभा नहीं, बल्कि परिवार के भीतर खींचतान का सच सियासी जमीन पर उजागर कर गई. दरअसल, महुआ के चुनावी मैदान से उनके बड़े भाई तेज प्रताप यादव अपनी नई पार्टी जनशक्ति जनता दल (JJD) के प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं. ऐसे में तेजस्वी यादव के इस कदम ने यह स्पष्ट कर दिया कि अब पार्टी और परिवार के बीच इस बदलाव का असर बिहार की राजनीति पर गहरा पड़ने जा रहा है.
तेजस्वी-तेजप्रताप की अदावत में अब कोई कन्फ्यूजन नहीं…महुआ से आया नया मैसेज !
महुआ चुनाव: तेजस्वी यादव बनाम तेज प्रताप, सियासी टकराव
पटना. बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और लालू प्रसाद यादव के छोटे बेटे तेजस्वी यादव ने आखिरकार अपने बड़े भाई तेज प्रताप यादव के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरकर बड़ा संदेश देने की कोशिश की है. उन्होंने महुआ विधानसभा सीट पर अपने प्रत्याशी मुकेश रौशन के लिए चुनाव प्रचार करते हुए महुआ के लोगों से कहा कि किसी भी तरह का कोई कंफ्यूजन नहीं रखिए, पार्टी बड़ी होती है. इस पर तेज प्रताप यादव ने पलटवार किया और कहा कि किसी भी पार्टी से बड़ी हमारे आदरणीय जनता मालिक होती है. बता दें कि तेज प्रताप यादव ने पहले ही कहा था कि अगर तेजस्वी यादव महुआ विधानसभा सीट पर उनके खिलाफ चुनाव प्रचार में आएंगे तो वह भी राघोपुर जाएंगे और तेजस्वी यादव के खिलाफ प्रचार करेंगे. अब जब तेजस्वी यादव महुआ पहुंच गए तो सवाल यह कि क्या तेज प्रताप यादव राघोपुर पहुंचेंगे? उनके ताजा सियासी संदेश से तो जाहिर हो रहा है कि अब दो भाइयों में सियासी प्रतिद्वंद्विता और बढ़ेगी.
महुआ में तय हो सकती है नई राजनीतिक दिशा
बता दें कि वैशाली के हॉट सीट महुआ में पहली बार अपनी पार्टी राजद के प्रत्याशी मुकेश रौशन के प्रचार में पहुंचे तेजस्वी यादव नें कहा पार्टी से बड़ा कोई नहीं है और कोई कन्फूजन नहीं है. कोई आए या जाये… आपलोग लालटेन जला कर यहां से भेजें. बता दें कि राजद से निकाले जाने के बाद महुआ से लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव अपनी पार्टी जनशक्ति जनता दल यानी जेजेडी (JJD) से चुनाव लड़ रहे हैं. ऐसे में कयास लगाए जा रहे थे कि अपने बड़े भाई तेजप्रताप के खिलाफ तेजस्वी महुआ में चुनाव प्रचार नहीं करेंगे. मगर तेजस्वी यादव ने यह साबित कर दिया कि पार्टी से बड़ा कोई नहीं होता.
तेजस्वी ने भाई से मोर्चा लिया, महुआ बनी रणभूमि
तेजस्वी यादव ने अपने संबोधन में भी यह जाहिर किया और साफ तौर पर कहा कि पार्टी ही मां बाप होती है. लालू जी ने मुकेश रौशन को टिकट दिया है, इसलिए आप लोग (महुआ के मतदाता) कोई कन्फ्यूजन में नहीं रहें और चुपचाप लालटेन पर बटन दबाकर आरजेडी के प्रत्याशी को जिताकर तेजस्वी यादव का हाथ मजबूत करें. साफ है कि महुआ में तेजस्वी यादव अपने बड़े भाई तेजप्रताप यादव के खिलाफ अपनी पार्टी का चुनाव प्रचार में आकर यह तो साबित कर दिया कि पार्टी से बड़ा परिवार नहीं है.
तेजस्वी यादव ने महुआ में मुकेश रौशन के लिए प्रचार कर तेज प्रताप यादव को चुनौती दी, बिहार की राजनीति में परिवार बनाम पार्टी का नया समीकरण.
पार्टी से बड़ी ‘जनता मालिक’-तेज प्रताप का संदेश
अगर तेजस्वी महुआ जाएंगे तो हम भी राघोपुर जाएंगे… तेजप्रताप का बड़ा ऐलान
मेरे नादान भाई…तेजस्वी बोले पार्टी सबसे बड़ी,तेजप्रताप बोले जनता ही असली ताकत
चुनाव प्रचार के दौरान तेज प्रताप का विरोध, RJD समर्थकों ने की पत्थरबाजी
अपने खिलाफ छोटे भाई तेजस्वी यादव के मैदान में उतर आने के बाद तेज प्रताप यादव ने भी अब मोर्चा ले लिया है. उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा-किसी भी पार्टी से बड़ी हमारी आदरणीय जनता मालिक होती है! अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा, हमारे छोटे और नादान भाई तेजस्वी ने महुआ में कहा कि पार्टी से बड़ा कोई नहीं होता, लेकिन हम अपने छोटे भाई को यह कहना चाहेंगे कि पार्टी से बड़ी हमारी जनता मालिक होती है. लोकतंत्र में सबसे बड़ी केवल जनता होती है, कोई पार्टी या परिवार नहीं. महुआ मेरी राजनैतिक कर्मभूमि है, महुआ मेरे लिए पार्टी और परिवार से कहीं बढ़कर है. पार्टी केवल एक व्यवस्था है, लेकिन जनता हमारी मालिक है. उन्होंने आगे लिखा कि- महुआ की आदरणीय जनता जनार्दन से मुझे पूरी उम्मीद है कि वह हमें भारी मतों से जीत कर सदन भेजना और महुआ को विकास की राह पर आगे बढ़ाने का काम करेंगे.
भाई-भाई की राजनीति, महुआ का माटी से जुड़ा मामला
महुआ सीट पर तेज प्रताप यादव का असर रहा है -2015 में इन्होने इस सीट से जीता था. अब उसी सीट पर पूर्व RJD नेता और अपने ही बड़े भाई (तेजस्वी के लिए बड़े भाई) को चुनौती दे रहे हैं. इसलिए जब तेजस्वी प्रचार करने पहुंचे तो यह सिर्फ मुकाबला नहीं बल्कि संकेत बन गया कि महुआ में वोट बैंक, जातिगत समीकरण और विरासत-प्रभाव एक साथ काम कर रहे हैं. राजनीति के जानकार मानते हैं कि यदि महुआ में तेज प्रताप को समर्थन मिला तो यह RJD के लिए बड़ा झटका होगा. वहीं, RJD के लिए यह जीत सिर्फ एक सीट नहीं बल्कि ‘परिवार की एकता’ से ऊपर ‘आरजेडी ब्रांड’ का सम्मान बन जाएगी. ऐसे में इसका प्रभाव सिर्फ महुआ तक सीमित नहीं होगा, बल्कि बिहार की राजनीति में परिवार-विरासत बनाम पार्टी के वर्चस्व का मॉडल बन सकता है जो बड़ा सियासी संदेश होगा.
परिवारिक एकता-टूट का प्रतीक और सियासी प्रयोगशाला
महुआ में दो भाइयों का यह राजनीतिक मुकाबला सिर्फ एक विधानसभा सीट का गुणा-गणित या जीत हार का सियासी संघर्ष भर नहीं, बल्कि परिवार-विरासत-पार्टी के बीच बदलते समीकरणों का बड़ा संकेत है. तेजस्वी यादव ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी सबसे ऊपर है, जबकि तेज प्रताप यादव ने इसे पलटते हुए जनता-मालिक की बात की है. इस संघर्ष का परिणाम चाहे जैसा भी हो बिहार की राजनीति में ‘परिवार के अंदर का मतभेद’ ने अब सार्वजनिक मंच ले लिया है. इस घटना ने संकेत दे दिया है कि अब राजनीति सिर्फ विरासत नहीं, पार्टी और परिवार में बदलाव के नए समीकरणों पर आधारित होगी. महुआ में पहली बार अपनी पार्टी राजद के प्रत्याशी मुकेश रौशन के प्रचार में पहुंचे तेजस्वी यादव ने जब कहा कि पार्टी से बड़ा कोई नहीं तो यह भी साफ हो गया कि तेजस्वी-तेजप्रताप की सियासी अदावत में अब कोई कन्फ्यूजन नहीं!







