बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान 6 नवंबर को होगा. दूसरे और आखिरी चरण की वोटिंग 11 नवंबर को है. वोटों की गिनती 14 नवंबर को होगी. उसी दिन स्पष्ट हो जाएगा कि किसकी सरकार बिहार में बनेगी. या फिर विधानसभा की कैसी स्थिति रहने वाली है. इसके बावजूद महागठबंधन के सीएम फेस और आरजेडी के नेता तेजस्वी यादव के एक दावे और घोषणा ने लोगों को चौंका दिया है. उनके इस दावे और घोषणा का आधार क्या है, यह तो वे ही जानते होंगे.
महागठबंधन सरकार में 3 डेप्युटी सीएम
चुनाव परिणाम कैसे आएंगे, यह तो वक्त बताएगा. लेकिन, तेजस्वी यादव को पूरा भरोसा है कि इस बार उन्हें कामयाबी अवश्य मिलेगी. तभी तो उन्होंने बतौर सीएम शपथ ग्रहण की तारीख भी निकाल ली है. तेजस्वी पहले से ही कह रहे हैं कि इस बार महागठबंधन जरूर सरकार बनाएगा. अब तो उन्होंने शपथ ग्रहण की 18 नवंबर की तारीख भी तय कर दी है. संभव है कि उन्होंने किसी ज्योतिषी की सलाह पर यह तिथि तय की हो. रविवार को अपनी चुनावी यात्रा आरंभ करने से पहले तेजस्वी ने जहां पीएम नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार पर हमले किए, वहीं उन्होंने यह भी बता दिया कि महागठबंधन की सरकार में सिर्फ वीआईपी के मुकेश सहनी ही डेप्युटी सीएम नहीं होंगे, बल्कि 2 और डेप्युटी सीएम बनाए जाएंगे. इनमें एक मुसलमान होगा तो दूसरा दलित.
मुस्लिमों का गुस्सा शांत करने का प्रयास
दरअसल मुसलमानों और दलितों पर डोरे डालने के लिए आरजेडी ने जहां अपने पुराने और परखे M-Y (मुस्लिम-यादव) समीकरण का सहारा लिया है, वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी संविधान बचाने के बहाने दलितों पर डोरे डालते रहे हैं. इसी क्रम में कांग्रेस ने सवर्ण समाज (भमिहार जाति) से आने वाले अखिलेश प्रसाद सिंह को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा कर वहां दलित नेता राजेश राम को बिठाया है. उपमुख्यमंत्री के लिए मुकेश सहनी के नाम की घोषणा के बाद दलितों में उतनी कसमसाहट नहीं है, लेकिन मुसलमान इससे खफा हैं. उनकी नाराजगी इसी से समझी जा सकती है कि आरजेडी के पूर्व विधायक पप्पू खां ने एनडीए को वोट देने की अपील कर दी है. वे कहते हैं कि जेडीयू और भाजपा ने मुसलमानों के लिए बहुत किया, लेकिन मुसलमान उन्हें वोट नहीं देते. जिन्हें वोट करते हैं, वे उन्हें कितना सम्मान देते हैं, यह टिकट बंटवारे और डेप्युटी सीएम की घोषणा से ही स्पष्ट है.
तेजस्वी यादव को पहला भरोसा 2020 के परिणाम को देख कर हो रहा होगा. 2020 में महागठबंधन को 110 सीटें मली थी. 11 सीटों पर महागठबंधन के प्रत्याशी गिनती के वोटों से हारे थे. 55 सीटें ऐसी थीं, जहां हार-जीत का अंतर 5 हजार से कम वोटों से भी कम का था. लोकसभा चुनाव में इंडिया ब्लाक के गठन के बाद वपक्षी दलों की ताकत बढ़ी है. बिहार में भी अर्से बाद महागठबंधन की पार्टियों को 9 और महागठबंधन में शामिल निर्दलीय पप्पू यादव को जीत मिली. तेजस्वी को लगता है कि सुधरी स्थितियों में इसका लाभ उन्हें बिहार में जरूर मिलेगा. अगर वे 18 नवंबर को महागठबंधन सरकार के शपथ ग्रहण की बात करते हैं तो इसके पीछे उनका यही विश्वास रहा होगा.
लुभावने वादों से भी तेजस्वी को उम्मीद
तेजस्वी ने पहले ही कई ऐसे लुभावने वादे कर दिए थे, जिन्हें बाद में महागठबंधन ने अपने घोषणापत्र में भी शामिल किया है. मसलन माई-बहिन मान योजना के तहत हर महिला को मासिक 2500 रुपए देंगे. सामाजिक सुरक्षा की पेंशन राशि 1500 रुपए करेंगे. 200 यूनिट फ्री बिजली देंगे. बाद में उन्होंने प्रत्येक परिवार में एक सरकारी नौकरी और जीविका दीदियों को 30 हजार रुपए वेतन के साथ सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की घोषणा की है. वैसे तो विरोधी लोग और आर्थिक मामलों की समझ रखने वाले उनकी इन घोषणाओं को यह कह कर डपोरशंखी करार दे रहे हैं कि इन्हें पूरा करने के लिए पैसे का बंदोबस्त तेजस्वी कैसे कर पाएंगे. तेजस्वी भी इन वादों को पूरा करने के लिए पैसे के इंतजाम के बारे में नहीं बताते, लेकिन इतना जरूर कहते हैं कि उन्होंने इस बारे में आर्थिक जानकारों से सलाह ले ली है. पैसे की तंगी नहीं होगी. वे इसके लिए तर्क भी देते हैं कि जब उन्होंने 10 लाख सरकारी नौकरी का वादा किया था, तब भी सत्ता पक्ष के लोग यही सवाल पूछते थे. पर, लोगों को नौकरियां मिलीं.
समाज के किसी भी तबके में कोई उपेक्षा या नाराजगी का भाव लोकतंत्र के लिए शुभ नहीं………
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