पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जारी जंग में दुनिया में काफी कुछ बदल दिया है. इस जंग के कारण सड़कों पर खून का दरिया बह रहा है. हजारों की संख्या में लोग मारे जा चुके हैं. पूरी दुनिया में तेल संकट पैदा हो गया है. भारत भी इसके असर से अछूता नहीं है. देश में तमाम जगहों पर एलपीजी गैस सिलेंडरों की कमी देखी जा रही है. हालांकि, हमारे पड़ोसी मुल्कों पाकिस्तान और बांग्लादेश की हालत बदतर है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गई है. इससे बड़ी-बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के लिए चुनौती बढ़ गई है. लेकिन, इन सभी चुनौतियों के बीच एक दूसरे के खून के प्यासे देश भारत को सलाम कर रहे हैं. यह बात आपको थोड़ी अतिशयोक्ति लग सकती है. लेकिन, इस लेख को पढ़कर आप खुद विदेश मंत्री एस. जयशंकर की कूटनीति को सलाम करने लगेंगे.
दरअसल, भारत सरकार और उसके विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पश्चिम एशिया संकट में सीधे तौर पर किसी के साथ खड़ा नहीं है. उसने अपनी कूटनीति से अमेरिका, चीन, रूस, ईरान और इजरायल पांचों ताकतों को साधने की कोशिश की है. ये कोई हवा हवाई बात नहीं है. बल्कि आप बीते कुछ दिनों के कूटनीतिक डेवलपमेंट को देखेंगे तो स्पष्ट तौर पर पता चल जाएगा कि भारत ने कितना बड़ा गेम किया है.
भारत की रणनीति
दरअसल, जयशंकर और भारत सरकार के इस पूरे गेम प्लान को लेकर टाइम्स ऑफ इंडिया में 12 मार्च 2026 को एक खूबसूरत लेख छपा. इसे एक जाने-माने इंवेस्टमेंट एक्सपर्ट सोमनाथ मुखर्जी ने लिखा है. मुखर्जी लिखते हैं- इतिहास गवाह है कि भू-राजनीतिक उथल-पुथल हमेशा से कुछ को हरा हुआ तो कुछ को विजेता बताती है. सेकेंड वर्ल्ड वार ने अमेरिका को महामंदी से निकाला और वह दुनिया का सबसे बड़ा पावर बन गया. उस जंग में तबाही के बावजूद सोवियत संघ ने तेजी से विकास किया और अमेरिका को टक्कर देने लगा. इसके बाद शीत युद्ध ने पूर्वी एशिया को आर्थिक ताकत बनाया और चीन को अमेरिका का प्रतिद्वंद्वी बनाया.
आज दुनिया फिर उसी तरह जल रही है. सड़कों पर खून का दरिया बह रहा है. भारत के सामने कई चुनौतियां है. लेकिन, इस संकट में भी भारत के लिए मौके हैं. भारत इस नए ग्रेट गेम को समझ रहा है और बड़ी चालाकी से खेल रहा है. वह पांचों ताकतों को साधने में लगा है.

ट्रेड डील पर सहमति के बाद भारत और अमेरिका के रिश्ते फिर बेहतर होने की राह पर लौट आए हैं. फोटो- रायटर
अमेरिका के साथ डील
संकट के दौर में भारत ने सबसे पहले अमेरिका को साधने की कोशिश की है. अमेरिका में 50 साल बाद कोई पहली रिफाइनरी लग रही है. इसे भारत लगा रहा है. डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले दिनों इसकी घोषणा की थी. इसे रियालंस इंडस्ट्रीज लगा रही है. रिलायंस का गुजरात के जामनगर प्लांट दुनिया में सबसे बड़ा है. यह निवेश भारत और अमेरिका के रिश्तों के लिए बहुत अहम है. रिलायंस इंडस्ट्रीज हैवी सॉर क्रूड प्रोसेस करने में माहिर है. वेनेजुएला में भी ऐसे ही क्रूड ऑयल है. जबकि अमेरिका की ज्यादातर रिफाइनरी लाइट स्वीड क्रूड पर चलती है. खाड़ी में जंग से अमेरिका भी केवल वहां के तेल पर निर्भर नहीं रहना चाहता है. ऐसे में भारत के सहयोग से लगने वाली रिफाइनरी काफी अहमियत रखती है.
चीन को साधने की कोशिश
बीते करीब दो सालों में भारत और चीन के बीच रिश्ते लगातार बेहतर हुए हैं. भारत ने पिछले दिनों चीन को लेकर एक बड़ा फैसला लिया. भारत सरकार ने एक बड़े नीतिगत फैसले में चीन सहित भारत के सभी पड़ोसी देशों से आने वाले निवेश की शर्तों में कई अहम ढील की घोषणा की. 15-16 जून 2020 को हुई गलवान की घटना से दोनों देशों के रिश्तों में बड़ी खाई पैदा कर दी. इस घटना में भारत के करीब 20 जवान शहीद हो गए थे. इसके बाद चार साल से अधिक समय तक दोनों के बीच तनाव चरम पर था. फिर 2024 में रूस के कजान में पीएम नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच मुलाकात हुई और फिर रिश्ते पटरी पर आने लगे. बीते करीब दो सालों में दोनों देशों के बीच सीधी उड़ान और मनसरोवर यात्रा शुरू हो चुकी है. दोनों के बीच व्यापार रिकॉर्ड स्तर पर है. ऐसे में चीन से एफडीआई को लेकर शर्तों में ढील एक बहुत बड़ा कदम है. चीन के साथ रिश्ते में इसके दूरगामी असर पड़ेंगे.

भारत और रूस की दोस्ती काफी पुरानी और भरोसे वाली है. फोटो- रायटर
रूस से तेल आयात
अमेरिका, भारत के साथ अपने रिश्तों में हमेशा रूस को लेकर आता है. रूस भारत का एक बहुत पुराना और भरोसेमंद दोस्त है. बीते कुछ सालों से भारत रूस के बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की खरीदता रहा है. इसको लेकर अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आपत्ति जताते हैं. उन्होंने भारत पर पेनाल्टी भी लगा दी थी. लेकिन, पश्चिम एशिया संकट और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत बढ़ने के बाद अब खुद अमेरिका भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए कह रहा है. यह भारत की एक बड़ी कूटनीतिक जीत है.
पीएम मोदी का इजरायल दौरा
बीते कुछ सालों में इजारायल भारत का एक अहम सहयोगी बनकर उभरा है. भारत इस वक्त बड़ी मात्रा में इजरायल से हथियार खरीद रहा है. दोनों देशों के बीच कई साझा प्रोजेक्ट चल रहे हैं. इसी क्रम में इसी 25 फरवरी को पीएम मोदी ने इजरायल का दौरा किया. दोनों देशों के बीच कई सैन्य डील हुई.
ईरान के साथ रिश्ते
इस पूरी कूटनीतिक चक्रव्यूह मेंभारत ने ईरान के साथ अपने संबंध खत्म नहीं किए हैं. पिछले दिनों दिल्ली में आयोजित रायसीना डायलॉग में ईरान के उप विदेश मंत्री भारत आए. फिर भारत ने हिंद महासागर में फंसे तीन ईरानी नौसैनिक जहाजों को सहायता दी. फिर जंग के बीच भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के ईरानी विदेश मंत्री से बात की. उसके बाद स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से भारत आने वाले कार्गो जहाजों को सुरक्षित रास्ता मिला. इसके बाद गुरुवार रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजेशकियान से बात की. इसके बाद ईरान ने भी इस पूरे बवाल में भारत के रूख की तारीफ की और उसे संतुलित बताया.







