बिहार में विधानसभा चुनाव कब होंगे, इस सवाल का जवाब अब भी बाकी है। विधानसभा का कार्यकाल 22 नवंबर को खत्म हो रहा है। उससे पहले सरकार का गठन करना होगा। SIR के बाद 1 अक्टूबर को फाइनल वोटर लिस्ट पब्लिश होगी। इसके बाद चुनाव आयोग के पास सिर्फ 53 दिन का वक्त है। 2020 में तीन फेज में वोटिंग कराई गई थी। अब इतने कम वक्त में तीन फेज में चुनाव कराना मुश्किल है।
इलेक्शन कमीशन के सोर्स बताते हैं कि बिहार में दो फेज में वोटिंग कराई जा सकती है। SIR की वजह से तारीखों के ऐलान में देरी हो रही है। वोटर लिस्ट पब्लिश होने तक तारीखों का ऐलान नहीं हो सकता। इससे ऐसे हालात बन गए हैं कि कम वक्त में चुनाव कराना होगा। खबरें हैं कि 6 अक्टूबर के बाद तारीखों का ऐलान हो सकता है।
अगर दो फेज में चुनाव हुए तो क्या मुश्किलें आ सकती हैं, इतने कम वक्त में कैसे चुनाव होंगे, चुनाव आयोग और पार्टियों की तैयारी क्या है और फेज कम होने से किस पार्टी को फायदा मिल सकता है,
दो फेज में चुनाव हुए तो किसे फायदा
राजनीति के जानकार कहते हैं, इस स्थिति में NDA को फायदा होगा। इसकी एक वजह छठ पर्व है। छठ के बाद ही वोटिंग होगी। इसे देखते हुए RSS और धार्मिक संगठनों ने इसकी तैयारी की है। इस बार की तैयारी कुंभ की तरह है।’‘ये संगठन छठ पूजा में आने वालों को साड़ी, नारियल, सूप के साथ आर्थिक मदद दे रहे हैं। इसका फायदा NDA को मिलेगा। लोगों को लाने-ले जाने की सुविधा दी जाएगी, BJP इसे भी भुनाने की कोशिश करेगी।’
कम फेज में चुनाव, यानी बड़ी पार्टियों को फायदा
कुछ पॉलिटिकल एक्सपर्ट का मानना हैं की ‘बड़े दलों के पास ज्यादा संसाधन होते हैं। वे इसका फायदा उठा लेते हैं। ये पार्टियां बड़े नेताओं का भाषण लाइव टेलीकास्ट करती हैं। इससे उनकी पहुंच ज्यादा से ज्यादा लोगों तक हो जाती है।
2015 में 5 फेज में वोटिंग, BJP को नुकसान
2015 में 5 फेज में वोटिंग कराई गई थी। तब BJP को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। पार्टी ने 157 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे। इनमें से 53 सीट पर जीत मिली। BJP को सबसे ज्यादा 25% वोट मिले, लेकिन सीट के मामले में पार्टी तीसरे नंबर पर रही।
तीन चरण में चुनाव होने पर फायदा महागठबंधन को मिल सकता है। इससे उन्हें प्रचार के लिए ज्यादा वक्त मिलता है। जर्नलिस्ट संतोष कुमार कहते हैं, ‘महागठबंधन के पास चुनाव के लिए कम संसाधन है। इस मामले में NDA के मुकाबले महागठबंधन पिछड़ जाता है।’
इसके अलावा अगर पहले फेज में कुछ सीटें या एरिया में विपक्ष मजबूत होता है, तो उनका कॉन्फिडेंस बढ़ेगा और दूसरे फेज में उनका काम आसान होगा। विपक्ष इसी फीडबैक के आधार पर मुद्दों या जातीय समीकरणों के हिसाब से बदलाव कर सकता है। ज्यादा फेज में चुनाव होने पर पार्टियां अपने कमजोर एरिया में ज्यादा संसाधन झोंक सकेंगी।
2020 में तीन फेज में चुनाव हुए, RJD सबसे बड़ी पार्टी बनी
2020 में तीन फेज में 28 अक्टूबर, 3 नवंबर और 7 नवंबर को वोटिंग हुई थी। रिजल्ट 10 नवंबर को आया था। पहले फेज में 71, दूसरे फेज में 94 और 78 सीटों पर वोटिंग हुई थी। इसमें RJD 75 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी। BJP 74 सीटें जीतकर दूसरे नंबर पर रही।







