विदेश मंत्री एस. जयशंकर को अज 27 सितंबर 2025 को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UN General Assembly) में भाषण देना तय हुआ है। 2025 में पीएम मोदी के न आने के चलते, जयशंकर ही भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे और उन्हें 27 सितंबर को UNGA में भाषण देने का कार्यक्रम है। महासभा में भाषण देने का सत्र आमतौर पर न्यू यॉर्क समय (EDT / UTC−4) में सुबह 9:00 बजे से दोपहर‑2:45 बजे तक और दोपहर 3:00 बजे से शाम 9:00 बजे तक चलता है।
वैश्विक मुद्दों पर भारत का नजरिया रखेंगे
उम्मीद है कि विदेश मंत्री यूएनजीए संबोधन में वैश्विक मुद्दों पर भारत का नजरिया प्रस्तुत करेंगे। इसमें एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की आवश्यकता और खासकर पहलगाम हमले के मद्देनजर आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस पर जोर दिया जाएगा। जयशंकर ने पिछले साल भी सभा को संबोधित किया था। इस वर्ष का संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र कई विषयगत कार्यक्रमों के साथ मेल खाता है, जिनमें संयुक्त राष्ट्र की 80वीं वर्षगांठ का स्मरणोत्सव, महासचिव एंटोनियो गुटेरेस द्वारा आयोजित जलवायु महत्वाकांक्षा शिखर सम्मेलन और महिला अधिकारों पर बीजिंग घोषणापत्र के 30 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक उच्च-स्तरीय बैठक शामिल है।
दुनिया का चौधरी कोई नहीं…
ट्रेड और UNSC में सुधार
BRICS: संरक्षणवाद के खिलाफ आवाज़
इसी क्रम में हुई BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक ने भी अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य पर एक ठोस संदेश दिया. रूस-यूक्रेन युद्ध से उपजी वैश्विक अस्थिरता और ट्रंप के टैरिफ वॉर से व्यापार पर मंडराते संकट के बीच BRICS देशों ने कहा कि जब दुनिया में मल्टीलेटरलिज्म दबाव में है, तब BRICS ही विवेक और सकारात्मक बदलाव की आवाज बनकर खड़ा है. भारत ने बैठक में जोर दिया कि UNSC समेत संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख अंगों में व्यापक सुधार जरूरी है. साथ ही यह भी कहा कि जब संरक्षणवाद, टैरिफ अस्थिरता और गैर-टैरिफ बाधाएं व्यापार को प्रभावित कर रही हों, तब BRICS को बहुपक्षीय ट्रेडिंग सिस्टम की मजबूती के लिए खड़ा होना होगा. भारत ने यह भी संकेत दिया कि उसकी अध्यक्षता में BRICS का अगला एजेंडा खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और डिजिटल इनोवेशन पर केंद्रित रहेगा.
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने CELAC (Community of Latin American and Caribbean States) देशों के साथ भी अहम बैठक की. सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों के साथ हुई मुलाकात में कृषि, व्यापार, स्वास्थ्य, डिजिटलीकरण और आपदा प्रबंधन (HADR) जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी. इसके अलावा AI, रेयर मिनरल्स, अंतरिक्ष और अक्षय ऊर्जा जैसे नए क्षेत्रों में संभावनाएं तलाशने का फैसला किया. CELAC और भारत ने ग्लोबल साउथ की आवाज को मज़बूत करने के लिए बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया.
G-4: UNSC सुधार पर प्रतिबद्धता
न्यूयॉर्क में ही भारत, जापान, जर्मनी और ब्राज़ील यानी G-4 देशों की बैठक भी हुई. इस बैठक में फिर से यह दोहराया गया कि UNSC का वर्तमान ढांचा पुराना हो चुका है और इसमें स्थायी सदस्यता के दायरे को बढ़ाने का समय आ गया है. G-4 ने संयुक्त राष्ट्र में चल रही Inter-Governmental Negotiation (IGN) प्रक्रिया की प्रगति की समीक्षा भी की और अपने संकल्प को मजबूती से रखा.
अमेरिका को सीधा संदेश- अब दुनिया मल्टीपोलर
ट्रंप की धरती पर भारत की इन लगातार बैठकों का असल संदेश था – दुनिया अब किसी एक देश की चौधराहट पर नहीं चल सकती. चाहे वह अमेरिका हो या कोई और देश. भारत ने अमेरिका की धरती से ही यह दिखा दिया कि दुनिया बहुध्रुवीय (Multipolar) हो चुकी है और इसके केंद्र में ग्लोबल साउथ की साझेदारी खड़ी है. जहां अमेरिका अपने घरेलू एजेंडे और ट्रंप की नई संरक्षणवादी नीतियों से वैश्विक साझेदारियों को चुनौती दे रहा है, वहीं भारत बहुपक्षीय सहयोग, सुधार और संवाद को आगे बढ़ा रहा है. न्यूयॉर्क में एक ही दिन में हुईं इन चार बड़ी बैठकों ने यह साफ कर दिया कि भारत अब केवल दर्शक नहीं, बल्कि वैश्विक एजेंडा तय करने वाला अहम प्लेयर बन चुका है.
आतंकवाद एक बड़ी रुकावट विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, ‘विकास के लिए एक सतत खतरा शांति में बाधा डालने वाला स्थायी कारक है, आतंकवाद. यह जरूरी है कि दुनिया आतंकवादी गतिविधियों के लिए न तो सहिष्णुता दिखाए और न ही उन्हें कोई मदद दे.’ विदेश मंत्री ने कहा कि जैसे-जैसे दुनिया संघर्ष, आर्थिक दबाव और आतंकवाद का सामना कर रही है, बहुपक्षवाद और संयुक्त राष्ट्र की सीमाएं साफ नजर आ रही हैं. उन्होंने कहा, ‘बहुपक्षवाद में सुधार की जरूरत पहले कभी इतनी ज्यादा नहीं थी.’ उन्होंने आगे कहा कि आज अंतरराष्ट्रीय स्थिति राजनीतिक और आर्थिक दोनों रूप से अस्थिर है.
लोबल साउथ का जिक्र
जयशंकर ने कहा, ‘जी-20 के सदस्य होने के नाते, इसकी स्थिरता को मजबूत करने और इसे और ज्यादा सकारात्मक दिशा देने की हमारी विशेष जिम्मेदारी है, जो बातचीत और कूटनीति के जरिए, आतंकवाद का दृढ़ता से मुकाबला करके और मजबूत ऊर्जा एवं आर्थिक सुरक्षा की जरूरत को समझकर सबसे बेहतर ढंग से किया जा सकता है.’ शांति और अंतरराष्ट्रीय विकास पर बोलते हुए, उन्होंने कहा कि दुनिया में जारी संघर्षों, खास तौर पर यूक्रेन और गाजा में, ने ऊर्जा, खाद्य और उर्वरक सुरक्षा के मामले में, ग्लोबल साउथ के लिए, इसकी कीमतों को साफ तौर पर प्रदर्शित किया है. जयशंकर ने कहा, ‘आपूर्ति और रसद को खतरे में डालने के अलावा, पहुंच और लागत भी देशों पर दबाव का कारण बन गए हैं.’
अमेरिका पर हमला
इसके बाद उन्होंने कहा, ‘दोहरे मानदंड साफतौर पर नजर आ रहे हैं.’ जयशंकर ने जोर देकर कहा कि शांति विकास को संभव बनाती है, लेकिन विकास को खतरे में डालने से शांति संभव नहीं हो सकती.’ जयशंकर ने दो टूक शब्दों में कहा कि आर्थिक तौर पर नाजुक हालात में ऊर्जा और बाकी जरूरी चीजों को और अनिश्चित बनाने से किसी को कोई फायदा नहीं होता. इसके साथ ही उन्होंने बातचीत और कूटनीति की ओर बढ़ने की अपील की ‘न कि विपरीत दिशा में और जटिलताओं की ओर.’ विशेषज्ञों का कहना है कि विदेश मंत्री की यह टिप्पणी साफतौर पर अमेरिका की तरफ थी क्योंकि पिछले कुछ दिनों में हर बार अमेरिका ने भारत को यूक्रेन युद्ध के लिए दोष दिया है.
रूस यूक्रेन पर क्या बोले
रूस और यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में उन्होंने साफ-साफ कहा कि किसी भी संघर्ष की स्थिति में, कुछ ऐसे देश होंगे जो दोनों पक्षों को शामिल करने की क्षमता रखते हैं और ऐसे देशों का प्रयोग अंतरराष्ट्रीय समुदाय की तरफ से शांति स्थापित करने और उसके बाद उसे बनाए रखने, दोनों के लिए किया जा सकता है. विदेश मंत्री के अनुसार, ‘इसलिए जब हम शांति के लिए जटिल खतरों से निपटने का प्रयास कर रहे हैं, तो ऐसे लक्ष्यों का समर्थन करने वालों को प्रोत्साहित करने के महत्व को भी समझा जाना चाहिए.’







