बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में हरलाखी सीट पर जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के सुधांशु शेखर की जीत की संभावना मजबूत दिख रही है। हरलाखी विधानसभा क्षेत्र बिहार के मधुबनी जिले में स्थित है और यह सीट पिछले चुनाव में भी जेडीयू के खाते में रही थी। 2020 के चुनाव में सुधांशु शेखर ने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के राम नरेश पांडे को लगभग 17,593 वोटों के बड़े अन्तर से हराया था। इस सीट पर मुस्लिम, यादव, ब्राह्मण, दलित सहित कई जातीय समूहों का महत्वपूर्ण प्रभाव है, जिसमें जेडीयू का गढ़ माना जाता है। 2025 के चुनाव में भी जेडीयू, बीजेपी और अन्य पार्टियों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा, लेकिन पिछले चुनावों के ट्रेंड और जातीय समीकरण के अनुसार सुधांशु शेखर को जीत की अच्छी संभावनाएं हैं।
हरलाखी सीट का चुनावी इतिहास और प्रमुख तथ्य
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हरलाखी विधानसभा क्षेत्र मधुबनी जिले में है और यह मधुबनी लोकसभा सीट के अंतर्गत आता है।
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2020 में जेडीयू के सुधांशु शेखर ने लगभग 60,393 वोट प्राप्त कर जीत दर्ज की, जबकि रालोसपा के राम नरेश पांडे को 42,800 वोट ही मिले।
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2015 में भारत लोक शिक्षा परिषद के बसंत कुमार ने जीत हासिल की थी।
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इस क्षेत्र में यादव, मुस्लिम, ब्राह्मण, दलित और अन्य जातीय समूहों का प्रभाव निर्णायक रहता है।
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चुनावी मुकाबले में जेडीयू, बीजेपी, महागठबंधन (रालोसपा, कांग्रेस, राजद) के बीच त्रिकोणीय मुकाबला रहा है।
चुनावी इतिहास
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स्थापना और आरंभिक दौर
हरलाखी विधानसभा सीट पहली बार 1951 में अस्तित्व में आई थी।
उस समय कांग्रेस की किशोरी देवी ने इस सीट से जीत हासिल की थी। -
पार्टी और झुकाव
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इस सीट पर कांग्रेस, सीपीआई (Communist Party of India), जनता दल-यूनाइटेड (JDU) और RLSP जैसे दलों ने समय-समय पर अच्छी पकड़ बनाई है।
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उदाहरण के लिए, 1962 और 1967 में सीपीआई के बैदर्नाथ यादव (या बद्रीनाथ यादव) ने जीत हासिल की थी।
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2010 में JDU के शालिग्राम यादव ने सीपीआई के राम नरेश पांडेय को हराया था।
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2015 में RLSP के बसंत कुमार ने इस सीट पर जीत हासिल की थी।
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2020 का चुनाव
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2020 में JDU के सुधांशु शेखर (Sudhanshu Shekhar) उम्मीदवार जीते।
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उन्होंने लगभग 60,393 वोट पाये, यानी करीब 36.3% वोट शेयर हुआ।
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दूसरे नंबर पर रहे CPI के राम नरेश पांडेय को ~42,800 वोट मिले, करीब 25.6% वोट शेयर के साथ।
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जीत का मार्जिन लगभग 17,593 वोटों का रहा।
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मतदान दर एवं सामाजिक-जातीय ताना-बाना
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2020 में मतदान दर (Voter Turnout) लगभग 57.31% थी।
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सीट सामान्य (GEN) श्रेणी की है यानी अनुसूचित जातियों-ओ संबंधित आरक्षित नहीं।
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मतदाताओं में मुस्लिम समुदाय और अनुसूचित जातियों का भी उल्लेखनीय हिस्सा है।
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बाय-चुनाव (By-poll) का अनुभव
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2015 के चुनाव में RLSP के बसंत कुमार जीते थे, लेकिन उनकी मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद एक बाय-चुनाव हुआ था जहाँ ये सीट फिर आशय से राजनीतिक लड़ाई का केंद्र बनी।
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हालिया चुनावी इतिहास
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2020: जेडीयू के सुधांशु शेखर ने 60,393 वोटों के साथ 17,593 वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी। सीपीआई के राम नरेश पांडे 42,800 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे थे। यहां मुस्लिम, यादव, ब्राह्मण, और दलित वोटर्स निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
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2015: इस सीट पर आरएलएसपी (बसंत कुमार) ने कांग्रेस और सीपीआई को पछाड़कर जीत पाई थी।
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2010 और 2005 में भी जेडीयू और वाम दलों के बीच सीधी टक्कर देखी गई थी, जबकि 1990 के दशक में कांग्रेस और समाजवादी दलों का प्रभाव था।
2025 में संभावनाएं
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वर्तमान विधायक सुधांशु शेखर (जेडीयू) दो बार जीत चुके हैं, जिससे जेडीयू का गढ़ बना हुआ है।
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अब भी मुकाबला त्रिकोणीय है – जेडीयू, सीपीआई सहित छोटे दल और निर्दलीय उम्मीदवार असर डालते हैं।
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जातीय समीकरण, मसलन यादव, मुस्लिम, ब्राह्मण और दलित समुदाय, नतीजे को प्रभावित करेंगे।
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लोकसभा 2024 में एनडीए के उम्मीदवार (भाजपा) को भी यहां अच्छी बढ़त मिली थी, जिससे जेडीयू के लिए माहौल सकारात्मक है।
2025 चुनाव का संभावित परिदृश्य
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सुधांशु शेखर ने 2024 के लोकसभा चुनाव में भी इस क्षेत्र में अच्छा वर्चस्व बनाए रखा।
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मतदाता संख्या बढ़ी है लेकिन मतदान प्रतिशत अब भी 56-58% के मध्य ही सीमित है।
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जातीय समीकरण, विकास मुद्दे, और पार्टियों की रणनीतियां निर्णायक होंगी।
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एनडीए की जेडीयू और बीजेपी गठबंधन यहां मजबूत स्थिति में है, जबकि महागठबंधन के प्रत्याशी चुनौती देंगे।
इसलिए हरलाखी विधानसभा सीट पर 2025 में भी जेडीयू के सुधांशु शेखर की जीत की संभावना मुख्य है, हालांकि कड़ा मुकाबला और त्रिकोणीय लड़ाई जारी रहने की सम्भावना है।





