बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के संदर्भ में सुरसन्ड सीट बिहार के सीतामढ़ी जिले में स्थित एक महत्वपूर्ण विधानसभा क्षेत्र है। यह विधानसभा क्षेत्र सुरसंड, चोरौत और पुपरी प्रखंडों को शामिल करता है। सुरसन्ड विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास काफी विविध रहा है, जहां कांग्रेस का प्रभाव अब समाप्त हो चुका है और मुख्य मुकाबला जनता दल यूनाइटेड (जदयू) और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के बीच होता है। मुस्लिम-यादव समीकरण यहां का निर्णायक फैक्टर माना जाता है, और इस बार भी यही समीकरण चुनाव परिणाम तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
पिछले विधानसभा चुनाव 2020 में जदयू के दिलीप राय ने राजद के सैय्यद अबू दोजाना को लगभग 8,876 वोटों के अंतर से हराया था। उस चुनाव में दिलीप राय को 38.63% वोट हासिल हुए थे जबकि सैय्यद अबू दोजाना को 33.53% वोट मिले थे। इस सीट पर बीजेपी अभी तक कोई जीत दर्ज नहीं कर सकी है। 2025 के चुनावों के लिए कांग्रेस, जदयू, राजद और अन्य पार्टियां कड़ी प्रतिस्पर्धा करने वाली हैं। स्थानीय मुद्दों में मुख्य रूप से सड़क की स्थिति, स्वास्थ्य सेवाएं, स्कूल-कॉलेज की कमी और बाढ़ के दौरान राहत कार्य जैसे विषय शामिल हैं, जो वोटरों के बीच चर्चा में बने हुए हैं।
सुरसन्ड सीट पर 2025 विधानसभा चुनाव में युवाओं और स्थानीय व्यक्तियों को मौका देने की मांग भी हो रही है, खासकर राजद से। इस क्षेत्र में विकास कार्य और लोक सुविधाओं को लेकर जनता अपेक्षाएं जताई जा रही हैं। समझा जाता है कि यह सीट आगामी चुनावों में भी राजनीतिक दलों के बीच उत्कट प्रतिस्पर्धा की जगह बनी रहेगी।
संक्षेप में:
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सुरसन्ड विधानसभा क्षेत्र सीतामढ़ी जिले में है और सुरसंड, चोरौत, पुपरी प्रखंड इसके भाग हैं।
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2020 में जदयू के दिलीप राय की जीत हुई, 8876 वोटों के अंतर से राजद के सैय्यद अबू दोजाना को हराया।
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मुस्लिम-यादव समीकरण यहां निर्णायक है।
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स्थानीय मुद्दे हैं: बाढ़, सड़क स्थिति, स्वास्थ्य सुविधा और शिक्षा।
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2025 में जदयू, राजद, कांग्रेस आदि के बीच कड़ा मुकाबला होने की संभावना है।
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भाजपा अभी तक इस सीट पर जीत नहीं हुई।
यह जानकारी बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के वर्तमान प्रचलित समाचार और संसाधनों पर आधारित है।
भौगोलिक व सामाजिक स्थिति
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सुरसन्ड सीट में सुरसंड, चोरौत और पुपरी प्रखंड शामिल हैं।
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जनसांख्यिकी: मुस्लिम और यादव मतदाताओं की प्रमुख भूमिका है, वोटिंग पर इनका निर्णायक असर रहता है।
प्रमुख दल व उम्मीदवार (2025)
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मुख्य मुकाबला जनता दल (यू), राष्ट्रीय जनता दल, एलजेपी और कांग्रेस के बीच रहेगा।
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2020 के विजेता: दिलीप राय (JDU) — 67,193 वोट; उपविजेता सैय्यद अबू दोजाना (RJD) — 58,317 वोट।
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एलजेपी, वाम दल, स्वतंत्र तथा छोटे दल भी मैदान में हैं।
2020 के प्रमुख आंकड़े
| उम्मीदवार | दल | वोट | वोट शेयर (%) |
|---|---|---|---|
| दिलीप राय | जेडीयू | 67,193 | 38.63% |
| सैय्यद अबू दोजाना | राजद | 58,317 | 33.53% |
| अमित चौधरी | एलजेपी | 20,281 | 11.66% |
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क्षेत्र में पुल निर्माण, सड़क, सिंचाई, बाढ़ व सीमावर्ती समस्याएं हावी हैं।
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जाति समीकरण (मुस्लिम-यादव) व विकास के स्थानीय मुद्दे सीट को निर्णायक बनाते हैं।
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कांग्रेस का पारंपरिक प्रभाव अब कमजोर हुआ है, यहां भाजपा अभी तक चुनाव नहीं जीत सकी।
2025 के संभावनाएँ
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पिछले दो चुनावों में जेडीयू व राजद का सीधा मुकाबला रहा है, मगर इस बार एलजेपी तथा अन्य छोटे दल समीकरण बदल सकते हैं।
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वोटों का ध्रुवीकरण और स्थानीय समस्याएं परिणाम को प्रभावित करेंगे।
सुरसन्ड सीट 2025 के चुनावों में जाति समीकरण, विकास कार्य व गठबंधन की रणनीति पर निर्भर करेगी, जिसमें जेडीयू-राजद मुख्य प्रतिद्वंदी होंगे।
संभावित प्रमुख उम्मीदवार (2025)
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जेडीयू (JDU) – दिलीप राय (Dilip Ray): उन्होंने 2020 में जीत दर्ज की थी और पार्टी दोबारा उन्हें टिकट दे सकती है।
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राजद (RJD) – सैय्यद अबू दोजाना (Syed Abu Dojana): पिछले चुनाव के उपविजेता, यादव-मुस्लिम समीकरण पर भरोसा।
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एलजेपी (LJP) – अमित चौधरी: लगातार मजबूत तीसरे स्थान पर रहे, टिकट की प्रबल संभावना।
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कांग्रेस – उम्मीदवार की औपचारिक घोषणा बाकी; आमतौर पर स्थानीय ब्राह्मण या भूमिहार चेहरे को मौका देती रही है।
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अन्य दल व स्वतंत्र – स्थानीय स्तर पर नए चेहरे, निर्दलीय व छोटे दल भी मैदान में दिखेंगे, जैसे पप्पू कुमार चौधरी, सोनीया देवी, नवाल किशोर रौत, गोंविद ठाकुर आदि।






