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बिहार SIR: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश ,नलाइन भी जुड़ सकेगा नाम, ड्राइविंग लाइसेंस-पासबुक होंगे मान्य ,जिनके नाम छूट गए BLA से उनकी मदद कराएं

UB India News by UB India News
August 23, 2025
in खास खबर
0
बिहार में SIR वोटर्स के खिलाफ कैसे? सुप्रीम कोर्ट में SIR पर बड़ी सुनवाई………..

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बिहार में चल रहे एसआईआर (Special Investigation Report) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है. कोर्ट ने कहा है कि वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए अब ऑनलाइन आवेदन भी किया जा सकता है. इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि फॉर्म-6 में बताए गए दस्तावेज़, जैसे कि ड्राइविंग लाइसेंस, बैंक पासबुक, या पानी का बिल, को भी पहचान और पते के सबूत के तौर पर स्वीकार किया जाएगा. इस फैसले से मतदाताओं को अपना नाम वोटर लिस्ट में जुड़वाने में आसानी होगी.

SC कोर्ट में सुनवाई पूरी
सुप्रीम कोर्ट में बिहार SIR पर सुनवाई पूरी हो चुकी है. इस दौरान याचिकाकर्ता और चुनाव आयोग के वकीलों के बीच जोरदार बहस हुई. हालांकि सुनवाई पूरी हो चुकी है. कुछ ही देर में फैसला आ सकता है. SC के जज ऑर्डर लिख रहे हैं.
चुनाव आयोग ने कोर्ट को बताया…
केंद्रीय चुनाव आयोग (ECI) ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि बिहार में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों द्वारा कुल 1,60,813 बूथ लेवल एजेंट (BLA) नियुक्त किए गए हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इनमें से केवल 2 आपत्तियां ही दर्ज की गई हैं. वहीं, कुछ राजनीतिक दलों ने आरोप लगाया है कि उनके बीएलए को आपत्तियां दर्ज करने की अनुमति नहीं दी जा रही है. इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हर मतदाता को नाम जुड़वाने या गलत नाम पर आपत्ति करने का स्वतंत्र अधिकार है. कोर्ट ने बिहार की 12 मान्यता प्राप्त पार्टियों से यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि उनके बीएलए सक्रिय रूप से काम करें और आपत्तियाँ दर्ज कराएं. उम्मीद है कि ये दल अपने बीएलए को इस संबंध में स्पष्ट निर्देश देंगे.

बिहार चुनाव आयोग को क्या दिया निर्देश?

शीर्ष अदालत ने कहा कि बिहार सीईओ को हम आदेश देते हैं कि वो राजनीतिक दलों के अध्यक्ष और महासचिव को नोटिस जारी करें कि वो इस मसले पर अदालत के आदेश पर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करें. बीएलए ऑनलाइन और निजी तौर पर 65 लाख हटाए गए मामलों में आपत्तियां और दावों की पेशकश कर सकते हैं. चुनाव आयोग के बीएलओ फिजिकल फॉर्म में दिए गए बीएलए द्वारा मुहैया कराए गए आपत्ति और दावों की पुष्टि के लिए नोट दें. वेबसाइट पर आवेदन कराने को लेकर भी एक्नॉलेज किया जाए.

इससे पहले याचिकाकर्ता की वकील वृंदा ग्रोवर ने कहा कि यह समस्या 65 लाख लोगों से परे है. जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि हमें तो बस राजनीतिक दलों की निष्क्रियता पर आश्चर्य है. बीएलए नियुक्त करने के बाद, वे क्या कर रहे हैं? लोगों और स्थानीय राजनीतिक व्यक्तियों के बीच दूरी क्यों है? आखिर राजनीतिक दलों ने सहयोग के नाम पर चुप्पी क्यों साध रखी है. आगे क्यों नहीं आ रहे हैं और आप इसे लेकर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करें. वहीं, चुनाव आयोग ने कहा कि एडीआर समेत कोई भी राजनीतिक दल आगे नहीं आ रहे हैं और यहां पर बिना किसी आधार के आरोप लगा रहे हैं.

याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि राज्य के कई इलाकों में बाढ़ है, वो नहीं आ सकते. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राजनीतिक दलों के बीएलए सहायता करें. इस परआयोग ने कहा कि सभी राजनीतिक दलों के बीएलए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने सवाल पूछा कि राजनीतिक दल क्यों आगे नहीं आ रहे, आरोप से इतर जमीन पर काम करें, हकीकत का पता लगेगा.

‘राजनीतिक दलों के पास 1.60 लाख बीएलए’

आयोग ने कहा कि राजनीतिक दलों के पास 1.60 लाख बीएलए हैं और अगर अगले दस दिनों में प्रति बीएलए 10 आपत्ति या दावों का सत्यापन करें तो 16 लाख लोगों के बारे में वैरिफिकेशन किया जा सकेगा. 65 लाख छूटे हुए लोगों में बीएलए की ओर से यह कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी और वह भी हकीकत जान सकेंगे. वह डिजिटली और निजी तौर पर लोगों से मिलकर यह सहायता कर सकते हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा यह तो बेहतर तरीका हो सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने आयोग से पूछा कितने नए 18 साल वाले वोटर जुड़े हैं और क्या नए को जोड़ने में भी बीएलए काम आ सकते हैं. चुनाव आयोग ने कहा कि ERO बिना उचित जांच के किसी का भी नाम नहीं काट सकते और इसके बाद डीएम-सीईओ के पास अपील का अधिकार लोगों के पास है, जो 25 सितंबर तक अपील कर सकते हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने पार्टियों से पूछा- आप क्या कर रहे हैं

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने चुनाव आयोग से कई सवाल पूछे। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा- राजनीतिक दलों की निष्क्रियता हैरान करने वाली है। राज्य की 12 पॉलिटिकल पार्टियों में से यहां मात्र 3 पार्टियां ही कोर्ट में आई हैं। वोटर्स की मदद के लिए आप क्या कर रहे हैं।

कोर्ट ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि राजनीतिक दलों के लगभग 1.6 लाख बूथ लेवल एजेंट होने के बावजूद, उनकी ओर से केवल दो आपत्तियां ही आई हैं।

SIR की समयसीमा बढ़ाने की मांग

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने दलील दी, ‘यह मुद्दा प्रासंगिक नहीं है। सभी को चुनाव आयोग पर भरोसा रखना चाहिए। हमें कुछ समय दीजिए, हम बेहतर तस्वीर सामने रखेंगे और साबित करेंगे कि किसी को भी बाहर नहीं किया गया है।’

अधिवक्ता ग्रोवर ने इसका विरोध करते हुए कहा, ‘इस पूरी प्रक्रिया को लेकर ज़मीन पर भ्रम फैला हुआ है। आयोग को इस पर प्रेस रिलीज़ जारी करनी चाहिए और समयसीमा बढ़ानी चाहिए ताकि निष्पक्षता बनी रहे।’

भूषण ने सवाल उठाया, ‘7.24 करोड़ मतदाताओं का क्या होगा? 12% को BLOs ने ‘नॉट रिकमेंडेड’ कहा है। रोज़ाना 36 हज़ार फॉर्म की जांच करनी होगी, यह संभव नहीं है। ऐसे में कोई उपाय नहीं बचेगा।’

चुनाव आयोग के हलफनामें में क्या?
चुनाव आयोग ने कोर्ड को बताया था कि लगभग 65 लाख छूटे हुए लोगों की बूथवार सूची वेबसाइट पर प्रकाशित कर दी गई है. बिहार के सभी 38 जिला निर्वाचन अधिकारियों की वेबसाइट पर विवरण प्रकाशित कर दिया गया है. ड्राफ्ट मतदाता सूची में नाम शामिल न होने का कारण भी प्रकाशित कर दिये गए हैं. जिनमें मृत्यु, निवास स्थान में बदलाव, या डुप्लिकेट एंट्री शामिल है. बता दें कि आज शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में SIR पर सुनवाई शुरू हो गई है. जिसपर सभी की नजर टिकी हुई है.
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