देश के और दुनिया के हालात तेजी से बदल रहे हैं. रूस-यूक्रेन, इजरायल-हमास के बाद अब थाईलैंड-कंबोडिया के बीच सशस्त्र संघर्ष छिड़ चुका है. मौजूदा स्थिति को देखते हुए हर छोटे से बड़े देश के अंदर विदेशी हमले का डर समा गया है. ऐसे में हर देश अपने डिफेंस सिस्टम को मजबूत करने में जुटा है. डोमेस्टिक टेक्नोलॉजी के साथ ही विदेशों से भी धड़ल्ले से मॉडर्न वेपन की खरीद की जा रही है. इससे डिफेंस एक्सपेंडिचर यानी रक्षा खर्च में काफी वृद्धि भी देखी जा रही है. सिक्योरिटी के लिहाज से भारत की स्थिति अन्य देशों से काफी संवेदनशील है. देश के एक तरफ पाकिस्तान तो दूसरी तरफ चीन स्थित है. पाकिस्तान दुनियाभर में आतंकवाद को बढ़ावा देने और टेररिज्म को स्टेट पॉलिसी के तौर पर इस्तेमाल करने को लेकर कुख्यात है. गुजरात से लेकर राजस्थान, पंजाब और जम्मू-कश्मीर तक से पाकिस्तान की सीमा लगती है. इतिहास गवाह है कि किस तरह से पाकिस्तान ने इन इलाकों के जरिये भारत में घुसपैठ करने और अटैक करने की अपनी साजिश को अभी तक अंजाम देने की नापाक कोशिश की है. 1965, 1971 और साल 1999 का कारगिल युद्ध इसका प्रमाण है. दूसरी तरफ, चीन पूरी दुनिया में अपनी विस्तारवादी नीतियों को लेकर कुख्यात है. फिलीपींस, वियतनाम, जापान जैसे देश चीन से पीड़ित देश हैं. बीजिंग की नजर भारत पर भी टिकी रहती हैं. अरुणाचल प्रदेश से लेकर लेह-लद्दाख तक को लेकर चीन जब-तब अपनी मंशा जाहिर करता रहा है. साल 1962 का युद्ध इसका सबसे बड़ा सबूत है.
22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की बैसरन घाटी में पाकिस्तान परस्त आतंवादियों ने 26 निर्दोष पर्यटकों की निर्मम तरीके से हत्या कर दी थी. चौंकाने वाली बात यह थी कि आतंकवादियों ने नाम पूछकर धार्मिक आधार पर इस वीभत्स नरसंहार को अंजाम दिया था. इसके बाद भारत ने मई ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च कर पीओके और पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में स्थित आतंकवादियों के कई शिविरों को मिट्टी में मिला दिया था. पाकिस्तान की ओर से दुस्साहस करने पर इंडियन एयरफोर्स ने पड़ोसी देश के 9 एयरबेस पर अटैक कर उसे व्यापक पैमाने पर नुकसान पहुंचाया था. आखिरकार पाकिस्तान को घुटने टेकने पड़े थे. इस ऑपरेशन में एयरफोर्स ने अपनी प्रचंडता से दुनिया को रूबरू कराया था. पाकिस्तान और चीन के साथ ही दुनिया के अन्य देशों ने पहली बार ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल का घातक प्रहार भी देखा. ब्रह्मोस मिसाइल की चोट से पाकिस्तान इस कदर थर्राया कि इंटरनेशनल कम्यूनिटी से भारत को बातचीत के लिए मनाने के लिए गुहार लगाने लगा. आखिरकार भारत संघर्ष विराम पर सहमत हुआ था. हालांकि, ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है. भारत अब उसी ब्रह्मोस मिसाइल का अपग्रेडेड वर्जन डेवलप करने में जुटा है. बता दें कि ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल भारत और रूस का ज्वाइंट प्रोजेक्ट है. बताया जा रहा है कि ब्रह्मोस का नया वर्जन पहले के मुकाबले कहीं ज्याद खतरनाक और घातक होने वाला है. रूस के साथ मिलकर इसे डेवलप करने की तैयारी है. ब्रह्मोस का नया वर्जन रूस के घातक 3M22 जिरकॉन मिसाइल का नया
अवतार होगा.

भारत-रूस मिलकर ब्रह्मोस-2K या ब्रह्मेस-MK2 प्रोजेक्ट पर काम करने की प्लानिंग कर रहे हैं. (फोटो: पीटीआई)
ब्रह्मोस-2K: रफ्तार का सौदागर








