जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हिन्दू पर्यटकों के नरंसहार का पाकिस्तान से बदला ले लिया गया है. भारत ने एक बार फिर दिखा दिया कि वो आतंकी हमलों का जवाब देता है और करारा जवाब देता है. जैसे उरी हमले के बाद 11 दिन में सर्जिकल स्ट्राइक हुई, पुलवामा के बाद 12 दिन में एयर स्ट्राइक और अब पहलगाम हमले के 16वें दिन भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिये आतंक के अड्डों पर मिसाइल स्ट्राइक कर दी. इस ऑपरेशन में 9 ठिकाने तबाह किए गए. इस एयर स्ट्राइक से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है, लेकिन भारत का जवाब साफ है, जो हमे छेड़ेगा, उसे छोड़ा नहीं जाएगा…
इस ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मौजूद जैश ए मोहम्मद और लश्कर ए तैयबा के आतंकी अड्डों पर मिसाइल से वार हुआ है. बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद के मुख्यालय और मुरीदके में लश्कर-ए-तैयबा के हेडक्वार्टर को निशाना बनाया गया. इसके अलावा पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में चार और ठिकानों पर हमला किया गया. कुल मिलाकर नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक स्ट्राइक की गई, जिसमें पाकिस्तान की सेना नहीं बल्कि आतंक के नेटवर्क को टार्गेट किया गया.
भारत ने POK और पाकिस्तान में आतंक के अड्डों पर ऐसा वार किया है, जिससे आतंक के सरगनाओं की नींद उड़ गई है. हाफिज सईद और मसूद अजहर के मदरसों को भी कामाकाजी एलएसएस ड्रोन से तबाह कर दिया गया. कुल 9 आतंकी ठिकानों को टार्गेट किया गया है. ये वही जगहें थीं, जहां से भारत पर हमलों की साज़िशें तैयार होती थीं.
LMS कामकाजी ड्रोन ने तबाह किए टेरर सेंटर
इन हमलों में खास तौर से लॉइटरिंग म्युनिशन सिस्टम यानी एलएसएस ड्रोन का इस्तेमाल किया. यह 21वीं सदी का ऐसा हथियार जो दुश्मन को सोचने तक का मौका नहीं देता. ये एक ऐसा पोर्टेबल ड्रोन सिस्टम है, जिसे बहुत कम समय में लॉन्च किया जा सकता है. एक बार हवा में जाने के बाद ये टार्गेट के पास मंडराता है और सही वक्त पर खुद को लक्ष्य से टकराकर विस्फोट करता है.
LMS की सबसे बड़ी ताकत है, सटीकता और नियंत्रण. इसमें लगे उन्नत सेंसर और गाइडेंस सिस्टम इसे बख़्तरबंद वाहनों तक को नष्ट करने की क्षमता देते हैं. इसे एक सैनिक भी ऑपरेट कर सकता है और रियल टाइम में इसे नियंत्रित किया जा सकता है.
LMS को जमीन, पानी या हवा, कहीं से भी लॉन्च किया जा सकता है. ये पारंपरिक मिसाइलों के मुकाबले किफायती है और बेगुनाहों के जान-माल का नुकसान भी कम करता है. हालांकि इसकी रेंज पारंपरिक मिसाइलों से थोड़ी कम होती है, लेकिन इसकी चपलता और सटीकता इसे आधुनिक युद्ध का चैंपियन बनाती है.
क्या होता है कामीकाजी?
ऑपरेशन सिन्दूर में भारत ने इसी कामीकाजी ड्रोन्स का इस्तेमाल कर आतंक के अड्डों पर सर्जिकल और फोकस्ड स्ट्राइक की. ‘कामीकाजी’ (Kamikaze) एक जापानी शब्द है. यह दो शब्दों से मिलकर बना है कामी यानी ईश्वर और काजी यानी हवा… ऐसे में कामीकाजी का शाब्दिक अर्थ है ‘दिव्य पवन’ या ‘ईश्वरीय हवा’.
अमेरिका को आज भी याद है इसका जख्म
यह शब्द पहली बार 1944 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान दुनियाभर में चर्चा में आया, जापान ने अमेरिका के पर्ल हार्बर पर हमला किया. अमेरिकी सरजमीं में उसकी सेना पर किया गया यह सबसे बड़ा हमला था. जापान ने जब अटैक की प्लानिंग की तो उसके सामने सबसे बड़ा संकट यही आया कि अमेरिका काफी दूर था और तब उसके लड़ाकू विमानों की ईंधन क्षमता इतनी नहीं थी कि वह हमला करके वापस जापान लौट सके.
ऐसे में जापान ने एक बड़ा फैसला किया. उसने अपने सैनिकों को कामीकाजी के रूप में ट्रेन किया. इन सैनिकों को सामुराई योद्धाओं की तरह ट्रेन किया गया. उन्हें अमेरिका के बड़े सैन्य अड्डे पर्ल हार्बर का टार्गेट दिया गया. उनका लक्ष्य था कि पहले वह अपने लड़ाकू विमानों ने ताबड़तोड़ गोलीबारी करके जितना संभव हो नुकसान पहुंचाएं और फिर अपने विमानों को सीधा ले जाकर उसे युद्ध पोत टकरा दें. जापान के उस हमले में अमेरिकी सेना को भारी नुकसान हुआ था. तभी से यह शब्द दुनियाभर में प्रचलित हो गया और आज के ड्रोन उसी तरह से डिजायन किए जाते हैं.







