राज्यों के कामकाज में राज्यपालों की भूमिका, राष्ट्रपति के अधिकारों और हाल ही में बने वक्फ संशोधन कानून के मामले में दिए फैसलों और कुछ आदेशों को लेकर सत्ताधारी भाजपा का एक वर्ग सुप्रीम कोर्ट की आलोचना कर रहा है. हालांकि आधिकारिक तौर पर भाजपा ने अपने कुछ नेताओं के बयान से खुद से अलग कर लिया है. बावजूद इसके इस मसले पर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा. इस मामले में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे का बयान सबसे चर्चित रहा. उन्होंने यहां तक कह दिया कि देश में गृह युद्ध के लिए चीफ जस्टिस संजीव खन्ना जिम्मेदार होंगे. इसके बाद से सोशल मीडिया पर सुप्रीम कोर्ट और न्यायपालिका की भूमिका पर बहस हो रही है.
विपक्षी दल इसे सुप्रीम कोर्ट पर हमला बता रहे हैं. वहीं भाजपा के करीबी लोग तरह-तरह के तथ्यों के साथ न्यायपालिका को अपनी सीमा में रहने की बात कर रहे हैं. वे शीर्ष अदालत से लक्ष्मण रेखा पार नहीं करने की बात कर रहे हैं. इस बीच सोशल मीडिया पर पूर्व पीएम दिवंगत इंदिरा गांधी का एक बयान वायरल हो रहा है. हालांकि यह बयान कब और किस संदर्भ में है इसकी पुख्ता तौर पर पुष्टि नहीं की जा सकती. इसमें इंदिरा गांधी कहती हैं- सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस शाह कौन होते हैं हमें आदेश देने वाले? क्या सुप्रीम कोर्ट संसद को डायरेक्शन देगा? क्या हम देश की अर्थव्यवस्था को चंद फैसलों की वजह से बर्बाद होने दें? जस्टिस शाह को देश के राजनीतिक हालात के बारे में क्या पता है? वो कौन सी ताकत है जो एक उभरती अर्थव्यवस्था को बर्बाद करना चाहती है.
इंदिरा ने किस जज को दी नसीहत
खुद को भाजपा और पीएम मोदी का समर्थक बताने वाले एक्स यूजर जितेंद्र प्रताप सिंह ने अपने हैंडल से यह वीडियो डाला है. इसके बाद तमाम लोग इस पर अपनी टिप्पणी कर रहे हैं. भाजपा के समर्थक भी इंदिरा गांधी की तारीफ कर रहे हैं. उनका कहना है कि पूर्व पीएम ने भारत के सुप्रीम कोर्ट और जजों को क्या जबरदस्त आईना दिखाया था. इंदिरा गांधी ने अपने बयान में जस्टिस शाह का उल्लेख किया है. लेकिन, इस बारे में पुख्ता तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता कि वह जस्टिस शाह कौन थे. रिकॉर्ड के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जेसी शाह जज थे, लेकिन क्या इंदिरा गांधी इसी जज के बारे में बात कर रही थीं. यह पुख्ता तौर पर नहीं कहा जा सकता. जस्टिस जेसी शाह 12 अक्तूबर 1959 से 21 जनवरी 1971 तक सुप्रीम कोर्ट में थे. वह 17 दिसंबर 1970 को देश के 12वें प्रधान न्यायाधीश बने थे.
इंदिरा के सामने चुनौतियां
उस वक्त इंदिरा गांधी देश की प्रधानमंत्री थीं. इंदिरा सरकार एक साथ कई मोर्चों पर जूझ रही थी. देश में महंगाई चरम पर थी तो दूसरी ओर बांग्लादेश का संकट सिर पर मंडरा रहा था. 1971 में ही पाकिस्तान के साथ युद्ध के बाद बांग्लादेश का निर्माण हुआ था. इंदिरा गांधी के इस वीडियो पर हजारों की संख्या में कॉमेंट आ रहे हैं. लोग कह रहे हैं कि अगर पीएम नरेंद्र मोदी अगर आज न्यायपालिका को लेकर इस तरह की टिप्पणी कर दें तो विपक्ष हंगामा काट देगा. वह न्यायपालिका के कामकाज में सीधा हस्तक्षेप करार देगा. कुछ यूजर लिखते हैं कि भाजपा सांसद निशिकांत दुबे को पीएम इंदिरा के इस बयान से राहत मिलेगी.
इस वीडियो पर एक यूजर ने एक और तथ्य जोड़ा है. नवनीत बख्शी नाम के यूजर ने लिखा है कि सुप्रीम के एक जज थे जस्टिस खन्ना. उन्होंने शिवकांत शुक्ला केस में सरकार के खिलाफ फैसला सुनाया. इस घटना के करीब नौ महीने बाद वह देश चीफ जस्टिस बनने वाले थे. लेकिन, जनवरी 1977 में इंदिरा गांधी ने उनको दरकिनार कर जस्टिस एमएच बेग को चीफ जस्टिस बना दिया.







