महाराष्ट्र में महाकुंभ और गंगाजल पर सियासत हो रही है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे ने महाकुंभ में गंगाजल पीने वालों का मज़ाक़ उड़ाया था। पुणे में अपनी पार्टी के 19वें स्थापना दिवस के अवसर पर राज ठाकरे ने कहा कि गंगा जल साफ़ नहीं, पीने लायक़ नहीं है। राज ठाकरे ने कहा कि उनकी पार्टी के नेता बाला नंदगांवकर महाकुंभ गए थे, वहां से गंगाजल लाए और उन्हें पीने के लिए कहा तो उन्होंने साफ़ मना कर दिया। राज ठाकरे ने कहा कि लोगों को अंधश्रद्धा से बचना चाहिए, इससे नुक़सान होता है। राज्य के मंत्री नीतेश राणे ने राज ठाकरे के बयान को हिंदुओं की आस्था का अपमान बताया। नीतेश राणे ने कहा कि राज ठाकरे में हिम्मत है, तो किसी और मज़हब के बारे में इस तरह की बात बोलकर दिखाएं।
गंगाजल से जुड़ी नई बात आपको बता दूं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट आई है। ये रिपोर्ट नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल को भेजी गई है। इसमें कहा गया है कि गंगा का पानी महाकुंभ के दौरान नहाने के लिए योग्य था। अब ऐसा लगता है कि राज ठाकरे ने जोश में आकर गंगा का पानी दूषित होने की बात कह तो दी, लेकिन बाद में उन्हें एहसास हुआ कि गलती हो गई क्योंकि ये मामला लोगों की श्रद्धा से जुड़ा है। मां गंगा का जल लोगों की आस्था और विश्वास से जुड़ा है और जब उद्धव ठाकरे की तरफ से प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि वो प्रयागराज गईं थीं, उन्हें तो पानी से दिक्कत नहीं हुई और जब रोहित पवार ने कहा कि उन्होंने भी महाकुंभ में डुबकी लगाई है और वो गंगाजल लेकर आए, तब जाकर राज ठाकरे को समझ में आया कि दांव उल्टा पड़ गया और उन्होंने अपनी पार्टी के प्रवक्ता से सफाई दिलवाई कि उनका इरादा किसी के अपमान का नहीं था। लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। तीर कमान से निकल चुका था। राज ठाकरे को इसका नुकसान तो होगा।







