सड़क हादसे के बाद हुए हंगामे, आगजनी और सड़क जाम की सूचना मिलते ही पटना सिटी के एसडीओ सत्यम सहाय और अपर पुलिस अधीक्षक राज किशोर सिंह भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे. अधिकारियों ने पुलिस की मदद से उपद्रवियों को सड़क से हटाया और हालात पर काबू पाया. हंगामे की वजह से एनएच-30 पर करीब दो घंटे तक लंबा जाम लगा रहा. काफी मशक्कत के बाद पुलिस ने यातायात सामान्य कराया और लोगों को सुरक्षित निकाला.
मौत सामने थी………..
ट्रक ड्राइवर प्रदीप ढाई घंटे की दहशत एक सांस में सुना डालते हैं। फिर भगवान का नाम लेकर कहते हैं। ऊपर वाले की कृपा है कि बच गया। ‘मैं ट्रक चलाता हूं। मेरी गाड़ी सड़क किनारे खड़ी थी। ड्राइविंग सीट पर बैठकर गाड़ी निकालने की तैयारी में था तभी हल्ला मच गया। अचानक करीब 100 लोग शोर मचाते आए। वे ईंट पत्थर फेंक रहे थे। मेरी गाड़ी पर पत्थर की बारिश कर दी। जान बचाने के लिए मैं सीट ने नीचे छिप गया। पत्थर लगने से शीशा टूटा गया। इसके बाद बड़े-बड़े पत्थर केबिन में आने लगे। एक तो सीधे मेरी आंख के पास लगा। मुझे लगा आज बच नहीं पाऊंगा। दर्द सहकर चुपचाप दुबका रहा। ऐसा लगा जैसे मौत सामने आ गई है। कुछ बोलता तो वे लोग जिंदा जला देते।’
सीवान के प्रदीप उपद्रव के दौरान बैरिया मेट्रो स्टेशन के पास अपनी गाड़ी के साथ फंस गए थे। हादसे में एक युवक की मौत के बाद जीरो माइल से बैरिया तक शुक्रवार सुबह 9.30 बजे से दोपहर 12 बजे तक भीड़ ने उपद्रव किया। एक दर्जन से अधिक गाड़ियों (बस, ट्रक, जेसीबी, कार और बाइक शामिल) में तोड़फोड़ और आगजनी की। पुलिस चौकी फूंक दी।
ऑटो चलाने वाले राजकुमार यादव उपद्रव में फंस गए थे। भीड़ ने उनकी ऑटो के शीशे तोड़े दिए। उन्होंने कहा, ‘एक्सीडेंट यहां से 1 किलोमीटर पहले हुआ था। मेरी ऑटो बस स्टैंड के पास मेट्रो ब्रिज के नीचे थी। उपद्रवी नशे में चूर थे। अधिकतर स्मैकियर थे। सबके हाथ में ईंट, पत्थर और डंडे थे। जो भी गाड़ी दिखी भीड़ ने उसमें तोड़फोड़ की। ‘पास के एक घर के आदमी ने तोड़फोड़ कर रहे लोगों को समझाने की कोशिश की तो सभी उनके घर को घेर कर पथराव करने लगे। कुछ लोगों ने मोबाइल से वीडियो बनाया तो उनके सामान और मोबाइल फोन छीन लिए। मेरे ऑटो में करीब 4000 रुपए का नुकसान हुआ है।’ अनुज अपनी ऑटो में पड़े शीशे के टुकड़ों को हटाते दिखे। हमने पूछा कि कितना नुकसान हुआ है। उन्होंने बताया, ‘मेरी गाड़ी में 5 हजार रुपए का नुकसान हुआ है। गरीब आदमी हूं। किसी तरह ऑटो चलाकर परिवार पाल रहा हूं।
प्रशांत कुमार ट्रक ऑनर हैं। इनकी एक गाड़ी को भीड़ ने तोड़ दिया। उन्होंने कहा, ‘मेरे एक ट्रक के शीशे भीड़ ने तोड़ दिए। करीब 10 हजार रुपए का नुकसान हुआ है।’
जानिए पूरी घटना, सड़क पर गाड़ी छोड़कर भागे लोग
दरअसल, शुक्रवार को पटना में सड़क हादसे में युवक की मौत के बाद जमकर बवाल हुआ। अगमकुआं थाना क्षेत्र के जीरो माइल के पास शुक्रवार सुबह रोड क्रॉस कर रहे 26 साल के मनीष को बस ने कुचल दिया। मौके पर ही उसकी मौत हो गई। मनीष अपने भाई के साथ पटना आ रहा था। दोनों भाई फ्लैक्स का काम करते थे। बस का पहिया मनीष के सिर पर चढ़ गया था। छोटे भाई के सामने ही बड़े भाई की मौत हो गई। हादसे के बाद बस का ड्राइवर हादसे के बाद भागने लगा। लोगों ने दौड़कर बस रोका, लेकिन ड्राइवर भाग निकला। 9.30 बजे परिवार को हादसे की सूचना मिली। चंद मिनटों में 40-50 लोगों की भीड़ बस की और दौड़ी आई। बस में 40 से 50 यात्री सवार थे। कुछ भीड़ देखते ही बस से निकलकर भागे, कुछ को लोगों ने बस से बाहर निकाला। इसके बाद बस में आग लगा दी।
बस जलती देख सड़क पर अफरा-तफरी मच गई। कार, ऑटो, बाइक और दूसरी गाड़ियों में बैठे लोग वाहन छोड़कर भागने लगे। कई लोग चाबी तक नहीं निकाल पाए। सड़क पर खड़ी गाड़ियां खाली हो गईं। दुकानदारों ने भी तुरंत शटर गिरा दिए। रास्ते में जो वाहन मिला, उसे भीड़ ने निशाना बनाया। पुलिस मौके पर पहुंची तो पुलिस की गाड़ी भी आग के हवाले कर दी गई। करीब डेढ़ एक घंटे तक हालात बेकाबू रहे। आग बुझाने और भीड़ को हटाने में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। अतिरिक्त पुलिस बल पहुंचने के बाद स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हुई। तब तक कई वाहन जल चुके थे और दोपहर 12 बजे तक जीरो माइल का पूरा इलाका दहशत में था।
ट्रैफिक सार्जेंट मेजर बोले- लोग उग्र थे, हमें भागना पड़ा
घटनास्थल से थोड़ी दूर पर एक ट्रैफिक चेक पोस्ट थी। यहां ड्यूटी पर तैनात ट्रैफिक सार्जेंट मेजर दीपक ठाकुर ने बताया, ‘20 से 30 की संख्या में लोग थे। वे कुछ भी करने को तैयार थे। मैं चेक पोस्टर के अंदर बैठा था। हंगामा सुनकर बाहर आया। उन लोगों ने एक चेक पोस्ट को आग के हवाले कर दिया। लोग इतने उग्र थे कि हमें भागकर जान बचानी पड़ी।’ ‘इसके बाद वे लोग दूसरी चेक पोस्ट की ओर बढ़े, वहां भी तोड़फोड़ की। पुलिस वालों की ओर बढ़ने लगे। भीड़ में शामिल लोगों की संख्या ज्यादा होने की वजह से पुलिस को पीछे हटना पड़ा। जवान वहां से जान बचाकर भागे। उन लोगों ने पुलिसकर्मियों के बैग, वर्दी, पैसे, मोबाइल, चार्जर और कैश भी लूट लिए।’ घटना के वक्त ASI एनएन सिंह पोस्ट पर तैनात थे। उन्होंने कहा, ‘उपद्रव के समय मैं ट्रैफिक पोस्ट पर था। हादसे के बाद वहां बहुत सारे लोग जुट गए। गाड़ियों में आग लगाने लगे। हमारे साथ 2 थाने के पुलिसकर्मी थे, लेकिन हमें मौके से भागना पड़ा।’
चश्मदीद बालेश्वर ने बताया कि पहाड़ी मोड़ ट्रैफिक पोस्ट के पास मेरी दुकान है। लोगों की भीड़ चारों तरफ से आ रही थी। भीड़ को देखकर ट्रैफिक पोस्ट पर तैनात 5 पुलिसकर्मी भाग निकले। मैं भी भागा। इसके बाद भीड़ ने पुलिस पोस्ट में आग लगा दी। तोड़फोड़ और आगजनी कर रही भीड़ को हटाने के लिए मौके पर 9 थाना की पुलिस को तैनात करना पड़ा। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे लोगों को खदेड़ दिया। करीब 3 से 4 घंटे बाद हालात काबू में आए और जाम छुड़ाया गया।
हादसे में मारे गए युवक मनीष की मां ने कहा, ‘मेरा बेटा रोज की तरह सुबह 7 बजे काम पर निकला था। उससे कहा था कि रात में जल्दी लौटना। उसकी लाश घर आई। बस में बहुत बुरी तरह से कुचला है।’ ‘उसका चेहरा भी पहचान में नहीं आ रहा है। वो 3 भाई-बहनों में सबसे बड़ा था। अभी शादी नहीं हुई थी। हम लोग उसके लिए लड़की देख रहे थे। पूरा घर वही चलाता था। बहुत समझदार और शांत स्वभाव का था। मुझे यकीन नहीं हो रहा कि बेटा अब नहीं जाएगा। ऐसा लग रहा है कि शाम को आकर पूछेगा खाना क्या बना है।’ मनीष के पिता उमेंद्र महतो ने बताया, ‘घर का जवान बेटा चला गया। उसकी कमाई से घर चलता था। वो हमारा सहारा था। हम सरकार से मुआवजे की मांग करते हैं। बस ड्राइवर की गलती से मैंने अपना बेटा खो दिया। हादसे के बाद बस का ड्राइवर भाग गया था। हम लोगों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया था। हमें इंसाफ चाहिए।’
जान जोखिम में डालकर सड़क पार करना है मजबूरी
हादसा जीरो माइल के पास NH-30 पर हुआ। इस पर वाहनों का भारी दबाव रहता है। पटना का मुख्य बस स्टैंड मीठापुर से बैरिया शिफ्ट होने के बाद इस रास्ते से बसों की भारी आवाजाही होती है। NH-30 से होकर ट्रक, बस और दूसरी गाड़ियां गांधी सेतु की मदद से गंगा नदी पार करती हैं और उत्तर बिहार जाती हैं। NH-30 चार लेन का है। दो लेन के बीच में डिवाइडर है, लेकिन इसकी ऊंचाई कम है। लोग पैदल सड़क पार करते हैं। इससे हादसे का जोखिम रहता है।स्थानीय महिला मीरा देवी ने बताया कि यहां हमेशा हादसे होते रहे हैं। 15-20 दिन या एक महीना में कोई न कोई घटना घट जाती है। हादसे पुल (फुट ओवर ब्रिज) नहीं होने के चलते होते हैं। लोगों के पास रोड क्रॉस करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। स्थानीय व्यक्ति सूरज कुमार ने कहा, ‘पुल नहीं होने के चलते यहां हमेशा हादसे होते रहते हैं। हमलोगों ने पैदल चलने वालों के लिए पुल बनाने की मांग की थी, लेकिन सरकार नहीं सुनी।’
किन्नर के नेतृत्व में पहुंचे उपद्रवी, 500 लोगों पर केस
अगमकुआं थाना के मसौढ़ी मोड़ के पास शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे सड़क हादसे में मनीष कुमार की मौत हो गई। इसके बाद उपद्रवियों का गुस्सा हिंसक हो गया। पुलिस ने परिजनों को 20 हजार रुपए दिए। 4 लाख रुपए का चेक देकर मामला शांत कराया गया। इसके कुछ देर बाद निजी अस्पताल के पास की गली से किन्नर के नेतृत्व में करीब 50 उपद्रवी सड़क पर पहुंच गए। उपद्रवियों ने पुलिस की तीन गाड़ियों समेत करीब दर्जनभर वाहनों में आग लगा दी। उपद्रव पर पुलिस ने 500 अज्ञात पर केस किया है।पुलिस ने छापेमारी कर 20 लोगों को हिरासत में लिया है। सुबह 9 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक बाइपास उपद्रवियों के कब्जे में रहा। जाम के कारण यात्री परेशान रहे। उपद्रवियों ने करीब तीन करोड़ रुपए का नुकसान कर दिया।






