बिहार में बागेश्वर धाम वाले पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की पांच दिन की कथा में लाखों श्रद्धालु आए। गोपालगंज में सोमवार को धीरेंद्र शास्त्री की कथा का आखिरी दिन था। पिछले दो दिन में कथा में भारी भीड़ जुटी, लाखों लोग कथा सुनने पहुंच गए। खुद धीरेन्द्र शास्त्री को वीडियो जारी करके भक्तों से अपील करनी पड़ी कि वो कथा में न आएं, घर पर बैठकर टीवी पर उनकी कथा सुनें क्योंकि इतनी भारी भीड़ के इंतजाम नहीं हैं। धीरेन्द्र शास्त्री की अपील के बावजूद लाखों लोग सोमवार को उनकी कथा में पहुंचे। लोगों का उत्साह देखकर धीरेन्द्र शास्त्री ने कहा कि उन्हें पूरा यकीन है कि वो दिन दूर नहीं जब भारत हिंदू राष्ट्र बनेगा और बिहार पहला राज्य होगा जो हिंदू राज्य बनकर उभरेगा। धीरेंद्र शास्त्री ने वादा किया कि वो बहुत जल्द फिर बिहार आएंगे। लेकिन आरजेडी, सीपीएम और कांग्रेस के नेताओं ने धीरेन्द्र शास्त्री की कथा का विरोध किया। वे बाबा को बीजेपी का एजेंट बता रहे हैं। लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने कहा कि बीजेपी चाहे जितना जोर लगा ले, कितने भी स्वयंभू चोलाधारी बाबाओं को उतार दे, लेकिन बिहार में धार्मिक सौहार्द्र बिगाड़ने का उसका मंसूबा कामयाब नहीं होगा। नोट करने वाली बात ये है कि जब रोहिणी आचार्य का ये ट्वीट आया, उस वक्त उनके मामा सुभाष यादव के बेटे रणधीर यादव और बेटी अलका यादव बाबा बागेश्वर का आशीर्वाद ले रहे थे।
सुभाष यादव के बेटा-बेटी तो बाबा का आशीर्वाद लेकर चुपचाप निकल गए लेकिन पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने धीरेंद्र शास्त्री को नटवरलाल, फ्रॉड, पाखंडी कह दिया। पप्पू यादव ने कहा कि बाबा चुनाव से पहले नफरत की दुकान लगाने आए हैं, अगर उनका बस चलता तो ऐसे बाबाओं को जेल भेज देते। आज के ज़माने में जब नेता भीड़ जुटाने के लिए लाखों रुपये खर्च करते हैं, बागेश्वर धाम वाले बाबा की कथा सुनने के लिए लाखों लोग अपने आप आ रहे हैं, ये वाकई हैरान करने वाली बात है। नेता तो रिक्वेस्ट करके भीड़ को बुलाते हैं और ये बाबा भीड़ से रिक्वेस्ट कर रहे हैं कि वो घर वापस चले जाएं, क्योंकि जगह कम पड़ गई है। ये चमत्कार से कम नहीं है। अब सवाल ये है कि जिसके प्रति लोगों का इतना आकर्षण है, RJD के नेता उन पंडित धीरेंद्र शास्त्री का विरोध क्यों कर रहे हैं? ये समझना भी कोई रॉकेट साइंस नहीं है। RJD की राजनीति में मुस्लिम वोट बैंक एक बड़ी जगह है और बाबा बागेश्वर हिंदू राष्ट्र की बात करते हैं। इसीलिए उनका विरोध करना RJD की राजनीति को सूट करता है। बिहार में चुनाव आने वाले हैं। कोई भी पक्ष इन बातों को हल्के से नहीं ले सकता। इसीलिए जैसे-जैसे चुनाव करीब आएंगे, ये स्वर और तीखे होते जाएंगे।







