गिलियन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) से देश में मौत के मामलों में बढ़ोतरी हुई है. भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने हाल ही में कहा कि जीबीएस से संक्रमित लोगों के नमूनों की जांच की जा रही है ताकि बीमारी के प्रसार के कारण का पता लगाया जा सके. इस बीच पश्चिम बंगाल में जीबीएस से संक्रमित दो लोगों की मौत हो गई.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबकि पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग ने पुष्टि की है कि राज्य में दो मरीजों (10 साल और 17 साल) की गिलियन-बैरे सिंड्रोम से मृत्यु हो चुकी है. 10 वर्षीय बच्चे को कोलकाता के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था और रविवार को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.
एक सप्ताह तक इलाज चलने के बाद हुई मौत
यह बच्चा उत्तर 24 परगना जिले के जगतदल का रहने वाला था, जिसकी बीसी रॉय अस्पताल में एक सप्ताह तक इलाज चला. इसी जिले के एक और मरीज में जीबीएस के लक्षण दिखे, जिसकी सोमवार (27 जनवरी 2025) को एनआरएस मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में मौत हो गई.
हुगली में GBS से मौत होने का संदेश
रिपोर्ट के मुताबिक बुधवार (29 जनवरी 2025) को हुगली के धनियाखाली के 48 वर्षीय व्यक्ति की भी गिलियन-बैरे सिंड्रोम से मौत होने का संदेह है. वह धनियाखाली में अपने स्थानीय डॉक्टर के पास गया था और अपने लक्षण बताने पर उसे तुरंत कोलकाता मेडिकल कॉलेज ले जाने को कहा गया था. वह पिछले चार दिनों से डायरिया से पीड़ित था और उसके शरीर का निचला हिस्सा पैरालाइज्ड हो गया था. हालांकि, राज्य स्वास्थ्य विभाग ने अभी तक इन मौतों के कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है
इससे पहले महाराष्ट्र से सोलापुर में रविवार (27 जनवरी) को GBS से पीड़ित एक 40 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई थी. इसके बाद महाराष्ट में ही इस बीमारी में एक और शख्स की जान गई है. महाराष्ट्र स्वास्थ्य विभाग ने बुधवार को जारी एक बयान में कहा था, “गिलियन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) के 127 संदिग्ध मामलों की पहचान की गई है, जिसमें 2 संदिग्ध की मौत हो चुकी है. इनमें से 72 मरीजों में जीबीएस की पुष्टि हुई, जिनमें से 20 मरीजों को वेंटिलेटर सर्पोर्ट पर रखा गया है.







