आरजी कर रेप और मर्डर मामले में कोलकाता की जिला अदालत द्वारा दोषी ठहराए गए संजय रॉय के सामने अब केवल फांसी या फिर उम्र कैद का ही विकल्प बचा है. सीबीआई दोषी को सख्त से सख्त सजा दिलाने की मांग सोमवार को सजा पर बहस के दौरान करेगी. मतलब साफ है कि संजय रॉय को सीबीआई हर कीमत पर फांसी दिलाने की कोशिश करेगी. उधर, संजय रॉय का वकील मानवीय ग्रांउड पर उसे उम्र कैद देकर छोड़ने की अपील करेंगे. पिछले साल कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में 31 वर्षीय डॉक्टर के साथ यह वारदात हुई थी.
आरजी कर रेप और मर्डर केस में पिछले साल 12 नवंबर को बंद कमरे में सीबीआई अदालत ने सुनवाई शुरू की. 57 दिन बाद सियालदह जिला अदालत के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिरबन दास ने उन्हें दोषी करार दिया है. सीबीआई इस मामले में आरोपी को सख्त से सख्त सजा दिलाने की मांग करेगी. न्यायाधीश ने अपने फैलसे में कहा, “आपको दोषी करार दिया जाता है.” अदालत ने फोरेंसिक रिपोर्ट पर भरोसा किया, जिसमें संजय रॉय की संलिप्तता, घटनास्थल पर उनके डीएनए और मृतक डॉक्टर के व्यक्तित्व की ओर इशारा किया गया.
कोर्ट में गिड़गिड़ाता रहा दोषी
फैसले के बारे में विस्तार से बताते हुए अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने कहा, “जिस तरह से आपने पीड़िता का गला घोंटा, आपको मौत या कारावास की सजा दी जा सकती है.” भारतीय न्याय संहिता की धारा 64 के तहत सजा 10 साल से कम नहीं है. वहीं धारा 66 के तहत दोषी को 25 साल या आजीवन कारावास की सजा या मृत्युदंड दिया जा सकता है. उधर, संजय रॉय ने अदालत में कहा कि वह “पूरी तरह से निर्दोष” है और उसे फंसाया जा रहा है जबकि असली अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं! मैंने ऐसा नहीं किया है, जिन्होंने ऐसा किया है उन्हें क्यों जाने दिया जा रहा है.
पहले जानिए इस केस के बारे में
आरजी कर हॉस्पिटल में 8-9 अगस्त की रात ट्रेनी डॉक्टर का रेप-मर्डर हुआ था। 9 अगस्त की सुबह डॉक्टर की लाश सेमिनार हॉल में मिली थी। CCTV फुटेज के आधार पर पुलिस ने संजय रॉय नाम के सिविक वॉलंटियर को 10 अगस्त को अरेस्ट किया था। इस घटना के बाद कोलकाता समेत देशभर में प्रदर्शन हुए। बंगाल में 2 महीने से भी ज्यादा समय तक स्वास्थ्य सेवाएं ठप रही थीं।
फैसले से जुड़ी 3 बड़ी बातें
1. फैसले का आधार फोरेंसिक रिपोर्ट
अदालत ने फोरेंसिक रिपोर्ट को सजा का आधार बनाया, जो बताती है कि संजय रॉय इस मामले में शामिल था। घटनास्थल और पीड़ित डॉक्टर की बॉडी पर भी संजय का DNA मिला था। रॉय को भारत न्याय संहिता अधिनियम की धारा 64, 66 और 103(1) के तहत दोषी पाया गया है
2. अधिकतम सजा फांसी होगी
जस्टिस अनिर्बान दास ने कहा कि इस मामले में अधिकतम सजा फांसी दी जा सकती है। कम से कम सजा आजीवन कारावास होगी।
3. दोषी संजय को बोलने का मौका मिलेगा
जब दोषी संजय ने कहा कि उसे इस केस में फंसाया जा रहा है, इसके बाद जस्टिस अनिर्बान दास ने कहा कि सजा सुनाए जाने से पहले उसे बोलने का मौका मिलेगा।
हाईकोर्ट के आदेश पर जांच बंगाल पुलिस से लेकर CBI को मिली थी
9 अगस्त की घटना के बाद आरजी कर अस्पताल के डॉक्टरों और पीड़ित परिवार ने मामले की CBI जांच की मांग की, लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जांच के आदेश नहीं दिए। हाईकोर्ट के आदेश के बाद 13 अगस्त को जांच CBI को सौंपी गई। इसके बाद CBI ने नए सिरे जांच शुरू की।
3 को आरोपी बनाया गया, 2 को जमानत

आरोपी संजय रॉय के अलावा मामले में मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को भी आरोपी बनाया गया, लेकिन CBI 90 दिन के अंदर घोष के खिलाफ चार्जशीट दायर नहीं कर पाई, जिस कारण सियालदह कोर्ट ने 13 दिसंबर को घोष को इस मामले में जमानत दे दी। इसके अलावा ताला थाने के पूर्व प्रभारी अभिजीत मंडल को भी चार्जशीट दायर न करने के कारण जमानत दी गई।
इससे पहले CBI ने 25 अगस्त को सेंट्रल फोरेंसिक टीम की मदद से कोलकाता की प्रेसीडेंसी जेल में संजय का पॉलीग्राफ टेस्ट किया था। अधिकारियों ने करीब 3 घंटे उससे सवाल-जवाब किए। संजय समेत 10 लोगों का पॉलीग्राफ टेस्ट हुआ था। इनमें आरजी कर के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष, ASI अनूप दत्ता, 4 फेलो डॉक्टर, एक वॉलंटियर और दो गार्ड्स शामिल थे।
संजय इयरफोन और DNA से पकड़ में आया
टास्क फोर्स ने जांच शुरू होने के 6 घंटे के भीतर दोषी संजय रॉय को अरेस्ट किया। CCTV के अलावा पुलिस को सेमिनार हॉल से एक टूटा हुआ ब्लूटूथ इयरफोन मिला था। ये दोषी के फोन से कनेक्ट हो गया था। संजय की जींस और जूतों पर पीड़िता का खून पाया गया था।
संजय का DNA मौके पर मिले सबूतों से मैच हुआ था। संजय के शरीर पर चोट के जो 5 निशान मिले थे, वे उसे 24 से 48 घंटे के दौरान लगे थे। यह ब्लंट फोर्स इंजरी हो सकती है, जो पीड़ित से अपने बचाव के दौरान हुई होगी। इसी के जरिए पुलिस संजय को पकड़ने में कामयाब रही।

कौन है संजय रॉय
संजय ने 2019 में कोलकाता पुलिस के तहत डिजास्टर मैनेजमेंट ग्रुप के लिए वॉलंटियर के तौर पर काम करना शुरू किया था। इसके बाद वह वेलफेयर सेल में चला गया। अच्छे नेटवर्क की बदौलत उसने कोलकाता पुलिस की चौथी बटालियन में आवास ले लिया। इस आवास की वजह से आरजीकर अस्पताल में नौकरी मिल गई। वह अक्सर अस्पताल की पुलिस चौकी पर तैनात रहता था, जिससे उसे सभी विभागों में एक्सेस मिली थी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, संजय की कई शादियां असफल रहीं। रॉय ने पूछताछ करने वाले अधिकारियों को बताया कि कथित तौर पर युवा डॉक्टर के साथ क्रूरता से कुछ घंटे पहले वह दो बार रेड-लाइट एरिया में गया था।
3 अदालतों में केस, निचली ने फैसला सुनाया
आरजी कर रेप-मर्डर केस निचली अदालत के साथ-साथ हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी चल रहा है। दरअसल, कलकत्ता हाईकोर्ट में कई जनहित याचिकाओं के साथ पीड़ित के माता-पिता ने भी याचिका दायर की थी। इनमें कोलकाता पुलिस पर अविश्वास जताते हुए CBI जांच की मांग की गई थी। इस पर कोर्ट ने 13 अगस्त को मामले में CBI जांच के आदेश दिए थे।
वहीं, देशभर में डॉक्टरों के प्रदर्शन और हड़ताल के बाद 18 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने खुद एक्शन लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की सिक्योरिटी की कमी पर चिंता जताई थी। डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर टास्क फोर्स बनाने का निर्देश दिया था।
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट पूरे मामले की निगरानी कर रहा है। CBI ने 10 दिसंबर, 2024 को सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दी थी। जिसमें बताया था कि सियालदह कोर्ट में रेगुलर सुनवाई हो रही है। उस समय 81 में से 43 गवाहों से पूछताछ हो चुकी थी।







