सरकारी नौकरियों के लिए यह साल युवाओं के लिए ‘कभी खुशी-कभी गम’ जैसा रहा। इस साल कई सारी भर्ती परीक्षाएं हुईं। जिनमें से कुछ की प्रक्रिया पूरी हुई तो कुछ परीक्षाएं ऐसी भी रहीं, जिनमें पेपर लीक हो गए। इसके कारण कैंडिडेट्स निराश हुए। हैरान करने वाली बात है कि सभी परीक्षा के पेपर लीक का कनेक्शन बिहार से ही जुड़ा रहा।
आइए, जानते हैं इस साल किन-किन परीक्षाओं का पेपर लीक हुआ और क्या-क्या हुआ…
BPSC TRE 2 पेपर लीक, परीक्षा 2022 में हुई खुलासा 2024 में हुआ
बिहार शिक्षक भर्ती के दूसरे चरण ( TRE 2.0 ) का पेपर भी लीक हो गया था। यह खुलासा बिहार की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की जांच रिपोर्ट में हुआ था। इसके लिए 5000 रुपए में सौदा हुआ था। TRE-2 की परीक्षा 7 से 15 दिसंबर 2022 तक हुई थी। करीब 1.22 लाख अभ्यर्थी परीक्षा में सफल हुए थे। EOU की चार्जशीट में यह खुलासा 2024 में हुआ।
EOU ने अपनी चार्जशीट में बताया था कि TRE-3 पेपर लीक में आरोपी और जेनिथ लॉजिस्टिक के मुंशी राहुल के मोबाइल के सीडीआर में एक मोबाइल नंबर मिला। जो ‘पिकअप चोर चौधरी’ के नाम से सेव था। यह मोबाइल नंबर पिकअप के ऑनर और अगमकुआं के रहने वाले रामनिवास चौधरी का है। दोनों से पूछताछ के बाद TRE 2 पेपर लीक का खुलासा हुआ है। TRE-3 की तरह ही TRE-2 में भी सेंटर पर जाने के दौरान क्वेश्चन पेपर उड़ाए गए थे।

5 हजार रुपए में हुई थी डील
पूछताछ के दौरान पिकअप के ड्राइवर शिवाकांत ने पुलिस को बताया था, ‘मुझे पेपर लिक करवाने के लिए 5 हजार रुपए दिए गए थे।’
पिकअप के मालिक रामनिवास चौधरी के अनुसार, दिसंबर 2023 में परीक्षा से पहले TRE-2 का प्रश्नपत्र ट्रांसपोर्टेश के दौरान लीक कराया गया था। इसके बदले में राहुल (जेनिथ लॉजिस्टिक के मुंशी) ने उसे गाड़ी के भाड़े के अलावा 8 हजार रुपए भी दिए थे।
अब कहानी पूर्णिया में SSC MTS एग्जाम में फर्जीवाड़े की
पूर्णिया के गुलाबबाग जीरोमाइल स्थित पूर्णिया डिजिटल एग्जाम सेंटर में 14 नवंबर को SSC MTS एग्जाम के दौरान ऑनलाइन एग्जाम सेंटर पर रेड कर पुलिस ने 35 लोगों को पकड़ा था। पकड़े गए लोगों में वैशाली, नालंदा और कटिहार के ऑनलाइन एग्जाम सेंटर का संचालक और फ्लाईंग ऑब्जर्वर शामिल है। इसके अलावा 12 फर्जी कैंडिडेट, 14 ओरिजनल कैंडिडेट, 7 स्टाफ और दो दलालों को भी अरेस्ट किया और सभी 35 आरोपियों को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया।
फर्जीवाड़े की कहानी आखिर क्या थी?
पेपर सॉल्वर्स से जब पुलिस ने पूछताछ की तो उन्होंने कहा कि हम फर्जी अभ्यर्थी हैं। ओरिजिनल कैंडिडेट की जगह अपनी फोटो एडमिट कार्ड पर लगा लिया था। ओरिजिनल कैंडिडेट बगल के कमरे में बैठे हैं।
जानकारी के बाद बगल के फ्लैट में पुलिस पहुंची, जहां ओरिजिनल कैंडिडेट बैठे मिले। यहां से एग्जाम हॉल में In-Out का बायोमैट्रिक किया जा रहा था। एक्जाम हॉल में एंट्री से पहले सेंटर के मालिक विवेक कुमार और उनका पार्टनर रोशन कुमार, राहुल राज और कुछ अन्य सहयोगियों की मदद से एडमिट कार्ड का रोल नंबर सेंटर के कर्मी को उपलब्ध कराया गया।
इसके बाद सॉल्वर सेंटर पर मौजूद कर्मी आशीष मिश्रा (सारण), शंकर कुमार पटेल (कटिहार), सोनू कुमार (पटना), बबलू कुमार (नालंदा), प्रियांशु कुमार रंजन (आलमगंज ,पटना), बिक्की (नालंदा), और सातवें स्टाफ आदित्य कुमार अमन (अररिया) के सहयोग से फर्जी तरीके से एग्जाम सेंटर में बड़ी ही आसानी से दाखिल हो गए।
पुलिस ने सभी 7 स्टाफ को अरेस्ट कर लिया। साथ ही SSC एमटीएस की ऑनलाइन परीक्षा में फर्जीवाड़ा करने वाले ओरिजिनल कैंडिडेट और फर्जी कैंडिडेट को सेंटर तक लेकर पहुंचने वाले दो लोगों को सेंटर से भागने के दौरान पकड़ लिया।
सॉल्वर्स ने उन्हें सेंटर तक लाने वालों की पहचान रौशन कुमार (बेलसर, वैशाली), कुणाल कुमार (लखीसराय) के रूप में की। उन्होंने बताया कि इन दोनों और सेंटर संचालक विवेक कुमार (बेलसर, वैशाली), पार्टनर रोशन कुमार (डुमर, कटिहार), राहुल राज (नूरनाराथ, नालंदा) ने इनके ठहरने का इंतजाम गुलाबबाग के होटल शाईन में किया था।
ओरिजिनल कैंडिडेट एग्जाम हॉल के बगल की बिल्डिंग के जिस फ्लैट में बैठे थे वो फ्लैट सुरेश चन्द्र साहा के नाम से रजिस्टर्ड है। फ्लैट से फर्जीवाड़ा में इस्तेमाल की गई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस नेटवर्क वायर को जब्त किया गया। फ्लैट के बाहर लगी गाड़ी में कई सारे एटीएम कार्ड, 60,000 रुपए चेक और 4 लाख 20 हजार 400 रुपए कैश बरामद किया गया।
10 लाख में अभ्यर्थियों से डील, सॉल्वर्स को दिए 80 हजार से डेढ़ लाख
शुरुआती जांच में पता चला कि सेंटर मैनेज कराने से लेकर परीक्षा पास कराने तक के लिए सेंटर संचालक ने पटना के एक युवक से मिलकर ओरिजनल कैंडिडेट्स से 10 लाख की डील फिक्स की। एग्जाम में बैठने के लिए फर्जी कैंडिडेट को 80 हजार से 1.50 लाख तक दिए।
15 नवंबर को साइबर थाना में दर्ज FIR से इस बात का भी खुलासा हुआ कि सेंटर संचालक विवेक कुमार और उसका पार्टनर रौशन कुमार, राहुल राज की SSC मध्य क्षेत्र के प्रयाग राज दफ्तर में बहाल कार्यरत इजहार आलम से नजदीकियां थीं। यही इस सेन्टर का पलाईंग ऑब्जर्बर था। इसी की सांठगांठ से सेंटर पर फर्जीवाड़ा हो रहा था।

एग्जाम में फर्जीवाड़ा का आखिर कैसे हुआ खुलासा?
पूर्णिया के गुलाबबाग जीरोमाइल स्थित पूर्णिया डिजिटल एग्जाम सेंटर से पकड़े गए अररिया के शिवपुरी गांव के आदित्य कुमार अमन ने पुलिस की रिमांड के दौरान पूछताछ में बताया कि उसने 2022 में ION डिजिटल पूर्णिया में ड्यूटी की थी। इसके बाद ऑनलाइन परीक्षा के समय उसकी ड्यूटी अलग-अलग सेंटर पर लगने लगी।
इसी क्रम में उसकी पोस्टिंग पूर्णिया डिजिटल ऑनलाइन सेंटर पर हुई। बेल्ट्रॉन की परीक्षा के समय से पूर्णिया डिजिटल का TCS कंपनी के साथ एग्जाम कंडक्ट कराने को लेकर एग्रीमेंट हुआ। यहां उसकी मुलाकात वैशाली के विवेक से हुई। इसी ने बातचीत के दौरान परीक्षा के समय फर्जी यानी दूसरे के बदले परीक्षा देने वाले परीक्षार्थी का प्रवेश कराने और उसे सुरक्षित बाहर निकालने की प्लानिंग वाली बात कही। इसमें उसे 80 हजार प्रति परीक्षार्थी देना तय किया गया था।
मामले की जांच कहां तक पहुंची?
दैनिक भास्कर से बातचीत में एसपी कार्तिकेय शर्मा ने बताया, ‘17 से 22 दिसंबर के दौरान कोर्ट से इजाजत लेकर पुलिस ने फर्जीवाड़े से जुड़े सभी 35 आरोपियों को 48 घंटे की रिमांड पर लिया। हमने खुद सभी आरोपियों से पूछताछ की।’
‘17 दिसंबर को साइबर पुलिस ने इस केस से जुड़े 10 आरोपियों को 2 दिनों के रिमांड पर लिया। इसमें SSC-TCS के कर्मी की सांठगांठ की बात सामने आई।’

‘22 नवंबर को सभी 35 आरोपियों की 48 घंटे की रिमांड पूरी हुई। इसके बाद हुए खुलासे ने सेंटर पर हुई SSC MTS की सभी पीरियड और इससे पहले ली गई परीक्षाओं को भी जांच के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया।’
SP ने बताया, ‘SSC-TCS के कर्मी की सांठगांठ की बात सामने आने के बाद SSC और TCS से डाटा मंगवाया गया। डाटा से ये स्पष्ट हो गया कि 14 नवंबर को SSC एमटीएस की परीक्षा के तीसरे शिफ्ट में ही नहीं, बल्कि सेकेंड शिफ्ट में भी गड़बड़ियां हुई थी। इसमें 13 कैंडिडेट फर्जी पाए गए। स्कॉलर बिठाकर एग्जाम दिलवाया गया।’
‘एग्जाम शुरू होने के कुछ दिन पहले ही जो टीसीएस के कर्मी थे, उनका ट्रांसफर किया गया। इसकी जगह किसी अन्य कर्मी को लाया गया। SSC के जो असेसमेंट हुए थे, सेंटर के बारे में उसमें भी गड़बड़ियां पाई गईं। केंद्र पर लगाए गए कर्मियों में लास्ट मूवमेंट में बदलाव किए गए।’

इन सारे पहलुओं ने इससे पहले सेंटर पर 4, 5, 11, 12, 13 नवंबर की SSC एमटीएस की तीन पालियों में हुई परीक्षा को भी पुलिसिया जांच के घेरे में ला खड़ा किया।
SSC TCS के कर्मी पुलिस की रडार पर आ गए। फर्जीवाड़ा का असल मास्टरमाइंड कौन है और केस में पॉलिटिकल एंगेजमेंट को लेकर भी पुलिस काम कर रही है। इस पूरे प्रकरण में किसी बड़े सियासी रसूख वाले चेहरे के कनेक्शन से भी इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, इस संबंध में पुलिस की तफ्तीश जारी है।
पुलिस की स्पेशल टीम सेंटर के संचालक रोशन कुमार मंडल और उसके एक साथी विवेक कुमार की गिरफ्तारी के लिए कोर्ट से वारंट लेकर लगातार छापेमारी कर रही है। लेकिन उसकी गिरफ्तारी नहीं हो रही है। इसके बाद पुलिस ने अब दोनों के खिलाफ कुर्की-जब्ती के लिए कोर्ट से इश्तेहार के लिए प्रेषित किया है।
2 दिसंबर को रद्द हुई थी CHO भर्ती परीक्षा
राज्य स्वास्थ्य सोसायटी (SHS), बिहार की ओर से आयोजित की जा रही सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी भर्ती परीक्षा को रद्द कर दिया गया था। यह भर्ती परीक्षा 1 दिसंबर और 2 दिसंबर, 2024 के लिए निर्धारित थी, लेकिन परीक्षा में गड़बड़ी होने के कारण इसे रद्द कर दिया गया। बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई की टीम ने परीक्षा से पहले ही एक साथ 12 केंद्रों पर छापेमारी की थी। जांच में पता चला था कि सॉल्वर गैंग और सेंटर संचालकों की मिलीभगत से इस परीक्षा में गड़बड़ी की जा रही है।
आर्थिक अपराध इकाई की ओर से मिली जानकारी के अनुसार अब तक इस परीक्षा के पेपर लीक मामले में कुल 36 अभियुक्तों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जिन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। आगे भी इस मामले में जांच चल रही है।
NEET परीक्षा का पेपर भी हुआ था लीक
बिहार के साथ पूरे देशभर में 5 मई को NEET की परीक्षा हुई थी। इसमें पूरे देश से करीब 24 लाख से ज्यादा कैंडिडेट शामिल हुए थे। इस परीक्षा का पेपर लीक हो गया। पेपर लीक होने के साथ ही 1563 उम्मीदवारों के नंबर बढ़ाने के आरोप भी लगे। NEET UG का रिजल्ट आने के बाद छात्र सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए। कई राज्यों में NEET 2024 में गड़बड़ी के मामले सामने आए। बाद में संशोधित रिजल्ट जारी किया गया, जिसमें टॉपर्स की संख्या 61 से घटकर 17 रह गई।
नीट पेपर लीक के तार बिहार से जुड़े
पटना में चल रही नीट परीक्षा के दौरान कई सॉल्वर्स को पुलिस ने छापेमारी कर पकड़ा था। वहीं, इस मामले में अब तक 13 लोगों को गिरफ्तारी बिहार से हो चुकी है। इस मामले की जांच आर्थिक अपराध इकाई कर रहा था। बाद में इस मामले को सीबीआई को सौंपा गया। अब अब तक इस मामले में 67 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। फिलहाल इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है।

BPSC में निकली अब तक की सबसे बड़ी वैकेंसी
बीपीएससी 70वीं कंबाइंड सिविल सेवा परीक्षा के लिए नोटिफिकेशन 20 सितंबर 2024 को जारी किया गया था। 19,64 पदों पर भर्ती निकली थी। जिसे बाद में बढ़ा कर 20,35 कर दिया गया। यह बीपीएससी के इतिहास में संयुक्त सिविल सेवा में सबसे बड़ी वैकेंसी है। जिसमें SDM के 200 पद, DSP के 136, RDO के 393, RO के 287 पद के अलाव कई और पदों के लिए वैकेंसी निकली है।







