बिहार की राजनीति एकदम अनप्रेडक्टबल है, यानी कि कोई भी राजनीतिक विशलेषक या कहें की राजनीति के अच्छे-अच्छे चाणक्य भी यहां फेल हो जाते हैं. शायद यही वजह है कि दूसरों को किंग बनाने वाले प्रशांत किशोर अभी भी बिहार में जीत की बाट ढूंढने में लगे हुए हैं. यहां की राजनीति ना तो धर्म के आधार पर है और ना ही जाति के आधार पर. इसके कई उदाहरण भी हैं. लेकिन राजनीतिक दल जातिगत समीकरण बनाने में पीछे नहीं हटते हैं. राजद के नेता तेजस्वी यादव ने एक नया समीकरण बनाया है. हालांकि ये समीकरण थोड़ा पुराना है, लेकिन अभी चर्चा में इसलिए है कि एक निजी चैनल के कार्यक्रम में उन्होंने फिर से इसका जिक्र किया है. ये समीकरण है माई-बाप (MY-BAAP) का. यानी कि मुस्लिम-यादव के साथ-साथ बहुजन, अगड़ा, आधी आबादी और पूअर. ऐसा ही एक समीकरण यूपी में अखिलेश यादव ने बनाया, जिसे नाम दिया पीडीए (PDA). पीडीए यानी कि पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक
अखिलेश का पीडीए किसना असरदार
लोकसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने यूपी की जनता के बीच जातिगत सीमकरण बैठाने के लिए एक पीडीए नाम का फॉर्मूला दिया. पीडीए यानी कि पिछड़, दलित और अल्पसंख्यक. लोकसभा चुनाव होने के बाद जब नतीजे सामने आए तो पीडीए असरदार दिखा. बीजेपी की सारी गोटी फेल हो गई. अकेले समाजवादी पार्टी ने 37 सीटों पर जीत हासिल कर ली. यानी कि अखिलेश का पीडीए फॉर्मूला सही बैठ गया. हालांकि यूपी की 9 सीटों पर हाल ही में उपचुनाव हुए, जिसमें ये फॉर्मूला काम नहीं आया. केवल 2 सीटों पर ही सपा जीत पाई और जो हारी, उसमें से कई सीटों पर सपा का दशकों से कब्जा था.
तेजस्वी का माई-बाप कितना होगा असरदार
एक निजी चैनल के कार्यक्रम में तेजस्वी यादव ने माई-बाप (MY-BAAP) फॉर्मूला दिया है. यानी कि मुस्लिम यादव के साथ-साथ बहुजन, अगड़ा, आधी आबादी और पूअर. दरअसल, इस नए फॉर्मूले के जरिए तेजस्वी यादव कोशिश कर रहे हैं कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को अपने साथ जोड़ा जाए और साथ ही सिर्फ मुस्लिम और यादव की पार्टी होने के तमगे से भी मुक्ति चाहते हैं. तेजस्वी यादव का कहना है कि उनके बाप फॉर्मूले में 90 फीसदी लोगों को शामिल किया गया है. करीब तीन दशक से राजद को एमवाई यानी कि 31 फीसदी आबादी वाले इन दोनों समुदाय का अच्छा समर्थन मिलता रहा है. लेकिन कांग्रेस के कमजोर होने और जदयू की ताकत भी कम होने पर भारतीय जनता पार्टी ने ओबीसी में अपनी पकड़ मजबूत करनी शुरू की तो राजद ने इस फॉर्मूले को लांच कर दिया.
बीजेपी बिहार की कोइरी, कुर्मी, कुशवाहा और अन्य ओबीसी जातियों में अच्छी पकड़ बना रही है. 2025 में बिहार विधानसभा का चुनाव होने वाला है. ऐसे में तेजस्वी अब हर उस फॉर्मूले की तलाश में हैं, जो सत्ता की कुर्सी तक पहुंचा दें. लेकिन ये कितना असरदार होगा ये विधानसभा चुनाव में पता चलेगा. हालांकि जब से उन्होंने यह फॉर्मूला दिया है, इस बीच लोकसभा और विधानसभा का उपचुनाव भी हो चुका है, जिसमें कुछ खास असर नहीं दिखा है.







