रुपौली विधानसभा उपचुनाव का परिणाम आ चुका है. निर्दलीय उम्मीदवार शंकर सिंह ने जीत हासिल कर एनडीए और महागठबंधन दोनों को करारा झटका दे दिया है. एनडीए को मिली हार ने जदयू को हैरान कर दिया है. जेडीयू अभी तक यह मानने को तैयार नहीं है कि उनकी पार्टी के उम्मीदवार हार चुके हैं. इस हार के बाद जदयू नेता मदन सहनी ने कहा कि यह हार आश्चर्यजनक है इसकी कड़ी समीक्षा होगी.
दरअसल लोकसभा चुनाव के बाद रुपौली विधानसभा उपचुनाव विधानसभा चुनाव के पहले हुआ था. इस सीट पर हार-जीत से बहुत कुछ तस्वीर आने वाले विधान सभा चुनाव को लेकर साफ होने की उम्मीद जताई जा रही थी. जदयू के लिए इस सीट पर जीतना कई मायनों मे महत्वपूर्ण था क्योंकि रूपौली विधान सभा अति पिछड़ा बाहुल्य सीट माना जाता है और जदयू के साथ साथ एनडीए का दावा था कि अति पिछड़ा वोटर एनडीए के साथ है लेकिन इस उम्मीद को तगड़ा झटका लगा है, क्योंकि अति पिछड़ा वोटर में बिखराव की वजह से निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत हासिल कर ली है.
वहीं उपचुनाव परिणाम आरजेडी के लिए भी झटका माना जा रहा है क्योंकि 5 बार की विधायक रह चुकी बीमा भारती को लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद भी विधान सभा उपचुनाव में तेजस्वी यादव ने टिकट दिया था और उनकी कोशिश थी कि इस सीट पर जीत हासिल कर बिहार के अतिपछड़ा वोटर को ये मैसेज दिया जा सके कि अति पिछड़ा वोटर का झुकाव एनडीए नहीं बल्कि महागठबंधन की तरफ़ होने लगा है. लेकिन, आरजेडी और तेजस्वी यादव का यह मंसूबा सफल नहीं हो पाया. आरजेडी उम्मीदवार तीसरे नंबर पर चली गईं.
अब सबकी निगाहें शंकर सिंह पर चली गई है कि शंकर सिंह चुनाव जीतने के बाद किसी पाले में जाते हैं या नहीं या फिर निर्दलीय ही रहते हैं. शंकर सिंह से जब यह सवाल पूछा गया तो उन्होंने फिलहाल अपने पत्ते नहीं खोले है. लेकिन, इतना कह संभावनाओ के द्वार खोल रखे हैं कि बहुत जल्द अपने समर्थकों और जनता के साथ एक बैठक करूंगा और जो भी उनकी राय होगी वही फैसला करूंगा. वहीं बिहार सरकार के मंत्री मदन सहनी ने यह कहकर सियासी हलचल तेज कर दी है कि शंकर सिंह को लेकर की उन्होंने वोट जनता से एनडीए में जाने के नाम से ही मांगा है इसलिए मुझे लगता है कि शंकर सिंह एनडीए के साथ ही आएंगे.
दो गंगोता की लड़ाई में राजपूत उम्मीदवार का फायदा
इस उपचुनाव में जदयू की हार का सबसे बड़ा कारण बेहतर कैंडिडेट का सिलेक्शन न हो पाना भी रहा। जिस वजह से NDA के कोर वोटर्स ने वोटिंग से दूरी बना ली। 2020 के विधानसभा चुनाव में वोटिंग प्रतिशत 60.59 था, जो उपचुनाव में करीब 7% घटकर 54.52% आ गया। यहां वोटर्स ने बाजी पलटी।
यहां फायदा सीधे तौर पर निर्दलीय उम्मीदवार को हुआ। दरअसल, जदयू के कलाधर मंडल और राजद की बीमा भारती, दोनों ही गंगोता जाति से हैं। दोनों ने एक दूसरे के वोटों में सेंध लगाई। इसका फायदा शंकर सिंह को मिला और उनके जीत की राह आसान हो गई।
जबकि, शंकर सिंह राजपूत जाति से आते हैं और सवर्णों के 25 हजार वोट सुरक्षित रख पाने में वो सफल रहे। साथ ही वो मुस्लिम वोटर्स में भी सेंधमारी करने में सफल रहे, जो उनकी जीत का कारण बनी।
प्रशांत किशोर का भी मिला साथ
रुपौली उपचुनाव के रिजल्ट को लेकर सीनियर जर्नलिस्ट और पॉलिटिकल एक्सपर्ट अरुण पांडेय कहते हैं कि पूर्णिया चुनाव जैसा परिणाम यहां दोहराया गया है। लोकसभा चुनाव में वहां निर्दलीय उम्मीदवार पप्पू यादव जीते थे। अब रुपौली में भी निर्दलीय उम्मीदवार की जीत हुई है।
जबकि, यह अति पिछड़ा बहुल इलाका है, जो NDA का वोट बैंक है। यह सीट जदयू की थी, उसका दबदबा रहा है, लेकिन अब नहीं रहा। ये जदयू के लिए एक बड़ा झटका है। क्योंकि, NDA के वोट बैंक में निर्दलीय उम्मीदवार ने सेंधमारी कर दी। बड़ी बात यह है कि शंकर सिंह को प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज का भी समर्थन मिला था।
पप्पू यादव का नहीं मिला साथ
उपचुनाव से पहले बीमा भारती ने सांसद पप्पू यादव से साथ मांगा था। ताकि उनकी मदद से वो इस उपचुनाव को जीत सकें। इसके लिए बीमा भारती खुद पप्पू यादव से मिलने भी गई थीं। तब सांसद ने उन्हें भरोसा भी दिया था, लेकिन रिजल्ट बताता है कि वो भरोसा सिर्फ कहने के लिए था।
चुनाव प्रचार के दरम्यान कहीं भी स्थानीय सांसद राजद उम्मीदवार के साथ नहीं दिखे। जमीनी स्तर पर वो प्रचार करने भी कभी नहीं गए। पॉलिटिकल एक्सपर्ट अरुण पांडेय कहते हैं कि सांसद का खुल कर समर्थन नहीं करना बहुत मायने रखता है। राजद उम्मीदवार को पूर्णिया के सांसद का साथ मिला ही नहीं। यह भी उनके हार के बड़े कारणों में से एक है।
सीमांचल में तेजस्वी के लिए चुनौती बनेंगे पप्पू
राजद की उम्मीदवार बीमा भारती इस सीट से 5 बार विधायक रहीं हैं। पूर्णिया सीट से उनके लोकसभा चुनाव लड़ने के कारण ही रुपौली में विधानसभा का उपचुनाव हुआ। ऐसा लगा था कि राजद का मुस्लिम-यादव (MY) समीकरण यहां काम करेगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। मुस्लिम और यादवों का भी भरपूर साथ यहां राजद की उम्मीदवार को नहीं मिला।
पॉलिटिकल एक्सपर्ट अरुण पांडेय की माने तो सांसद पप्पू यादव भी अंदर ही अंदर चाहते थे कि बीमा भारती इस उप चुनाव को नहीं जीते और वैसा हुआ भी। इसका असर पूरे सीमांचल की सीटों पर पड़ेगा। इस क्षेत्र में तेजस्वी यादव की राजनीति के लिए पप्पू यादव बड़ी चुनौती बनेंगे।
यहां उनकी धाक रहेगी। इसका बड़ा फायदा कांग्रेस को होगा। पप्पू यादव के जरिए वो जरूरत पड़ने पर राजद के ऊपर प्रेशर पॉलिटिक्स करेगी। एक बात तो तय है कि दल बदलने वालों का इस इस उपचुनाव में दम निकल गया।







