लोकसभा चुनाव से पहले बिहार में एनडीए गठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. सूत्रों की मानें तो पशुपति पारस पिछले करीब एक हफ्ते से बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृहमंत्री अमित शाह से मिलने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनको वक्त नहीं मिल पा रहा. हालांकि, पशुपति पारस गुट को एनडीए गठबंधन को लेकर बिहार में क्या कुछ चल रहा है, इस पर आधिकारिक तौर पर अब तक कोई जानकारी नहीं दी गई है.
सूत्रों का कहना है कि पशुपति पारस का हाजीपुर से चुनाव लड़ना तय है. भले ही वह किसी भी गठबंधन से लड़ें. पशुपति पारस को उम्मीद थी कि एनडीए गठबंधन की ओर से उन्हें कम से कम 2 से 3 सीटें दी जाएंगी, लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा.
एनडीए गठबंधन में बने रहना पशुपति पारस के लिए मुश्किल?
वहीं, पशुपति पारस गठबंधन से बात करने के लिए कभी विनोद तावड़े तो कभी मंगल पांडे आ रहे हैं. हालांकि, उनकी तरफ से भी कोई ठोस आश्वासन नहीं मिल रहा है. ऐसे में गुजरते वक्त के साथ पशुपति पारस का बीजेपी का सहयोगी बने रहना थोड़ा मुश्किल ही लग रहा है.
चिराग पासवान और पशुपति पारस के बीच है लड़ाई
गौरतलब है कि बिहार में सीट शेयरिंग को लेकर कई पेंच फंसे हुए हैं. एक ओर भतीजे चिराग पासवान हाजीपुर सीट पर अपना दावा ठोक रहे हैं तो दूसरी ओर चाचा पशुपति पारस ये सीट देने को तैयार नहीं हैं. चाचा-भतीजे के बीच यह लड़ाई हाजीपुर सीट के लिए ही है. वहीं, अंदरखाने यह खबर आ रही थी कि एनडीए के तहत हाजीपुर सीट चिराग पासवान को देने का फैसला किया गया है और पशुपति पारस को राज्यसभा सीट ऑफर की जा रही है. हालांकि, पारस ऐसा नहीं चाहते.
जानकारी के लिए बता दें कि चिराग पासवान फिलहाल जमुई सीट से सांसद हैं और पशुपति पारस हाजीपुर सीट से सांसद हैं. इस बार चिराग पासवान की मांग है कि वह जमुई की जगह हाजीपुर से लड़ना चाहते हैं और गठबंधन उनके पक्ष में फैसला लेता भी दिख रहा है, जिसे चाचा पारस नाराज हैं.







