बिहार को लेकर एनडीए का फॉर्मूला तय हो गया है. सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी 20 से 22 सीटों पर लोकसभा चुनाव लड़ सकती है. वहीं जेडीयू 12 से 14 सीटों पर लड़ सकती है. एलजेपी को चार सीटें देने पर बात बनी है. सूत्रों के मुताबिक, चिराग पासवान और उनके चाचा पशुपति पारस दोनों को एडजस्ट किया जाएगा. जबकि एक सीट उपेंद्र कुशवाहा और एक सीट जीतन राम मांझी की पार्टी हम को दिए जाने की योजना है.
बिहार में एनडीए का कुनबा पड़ा है. इसमें छह दल शामिल हैं. पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी और जेडीयू ने बराबर-बराबर 17-17 सीटों पर चुनाव लड़ा था. लोकसभा चुनाव के बाद नीतीश कुमार एनडीए से अलग हो गए थे लेकिन अब वो फिर एनडीए में वापसी कर चुके हैं.
सूत्रों की मानें तो नीतीश कुमार के आने से पहले तक एनडीए में सीटों को लेकर ज्यादा पेच नहीं था. लेकिन नीतीश कुमार की वापसी के बाद पूरा गणित प्रभावित हो गया. दूसरी तरफ, चाचा और भतीजे के बीच रार की खबरें भी सामने आई हैं. दरअसल, चिराग पासवान और उनके चाचा और केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस दोनों ही हाजीपुर सीट को लेकर अड़े हुए हैं.चिराग पासवान के नाराजगी की भी खबरें को हवा मिली जब बिहार में वो पीएम नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए.
इन दोनों नेताओं की ‘जिद’ एक तरह से बीजेपी के लिए सिरदर्द भी है. इस सीट से रामविलास पासवान सांसद थे. 2019 में पशुपति कुमार पारस यहां से जीते. इस बीच सूत्रों ने बताया कि चिराग पासवान बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा से गुरुवार (7 मार्च) की रात मुलाकात करेंगे. दोनों नेताओं के बीच लोकसभा सीट शेयरिंग को लेकर चर्चा होगी.
इससे पहले पशुपति कुमार पारस ने खुद को एनडीए का ईमानदार सहयोगी बताया था. उन्होंने साफ-साफ कहा था कि एनडीए की बिहार में सबसे बड़ी सहयोगी बीजेपी है. ऐसे में सीट शेयरिंग को लेकर प्रधानमंत्री मोदी, अमित शाह और जेपी नड्डा जो फैसला लेंगे वो उन्हें और उनकी पार्टी को मान्य होगा.
चाचा-भतीजा की लड़ाई बड़ी दिक्कत
चाचा (पशुपति कुमार पारस) और भतीजा (चिराग पासवान) शुरू से भिड़े हुए हैं। इसी लड़ाई में लोजपा टूटी। लोजपा के 5 सांसद पारस के नेतृत्व वाली लोजपा साथ रहे। पारस केंद्रीय मंत्री हैं। लोजपा के दूसरे गुट के अध्यक्ष चिराग बने। चाचा-भतीजा, दोनों खुद की पार्टी को असली लोजपा व रामविलास पासवान का वारिस बताते हैं।
खैर, टिकट बंटवारे के क्रम में चर्चा की एक लाइन यह भी है कि पारस को राज्यसभा भेज दिया जाए और लोकसभा की सीटें चिराग को दी जाएं। पारस गुट को प्रिंस राज के लिए एक सीट देकर संतुष्ट करने की कोशिश हो सकती है। देखने वाली बात होगी कि पारस इस लाइन को मंजूर करते हैं या नहीं? यह लाइन भी खूब जिंदा है कि अगर चिराग को मनमुताबिक सीटें न मिली, तो वे महागठबंधन की तरफ जा सकते हैं।







