दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव पर ईडी की दबिश बढ़ी हुई है। हेमंत सोरेन सहित तेजस्वी यादव को 5 तारीख का नोटिस ईडी ने दे रखा है। यह तय है कि ईडी इस मामले में 5 जनवरी तक इंतजार किए जाने के बाद ही आगे की कार्रवाई करेगी। वहीं दिल्ली शराब घोटाले मामले में ईडी के समन पर तीसर बार भी पेश नहीं होने के बाद अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें बढ़ सकती है। आम आदमी पार्टी तो दावा कर रही है कि ईडी आज केजरीवाल के ठिकानों पर छापेमारी करेगी और उन्हें गिरफ्तार करेगी!
इस बीच, आज सुबह से ही दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल के घर के बाहर हलचल है। वहां पुलिस की तैनाती बढ़ा दी गई है। मीडिया के लिए अलग से एन्क्लोजर बनाया गया है जो आम दिनों में नहीं होता है। सीएम आवास तक जाने वाले दोनों रास्ते पहले बंद कर दिए गए थे लेकिन बाद में मीडिया को सीएम आवास तक जाने की इजाजत मिल गई। आखिर आम आदमी पार्टी को केजरीवाल की गिरफ्तारी का डर क्यों सता रहा है? झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तो ईडी के एक-दो नहीं बल्कि 7 समन को ठेंगा दिखा चुके हैं लेकिन उनकी अभी तक गिरफ्तारी नहीं हुई है।
हाल में बिहार-झारखंड में हुए घटनाक्रम को देखें तो हेमंत सोरेन भविष्य देख रहे हैं। वहां झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) विधायक सरफराज अहमद ने त्यागपत्र दे दिया। चर्चा है कि हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन खाली हुई गांडेय अनारक्षित सीट से उपचुनाव लड़ सकती हैं। उधर हेमंत सोरेन के मीडिया एडवाइजर अभिषेक पिंटू के घर छापा पड़ा।
इस दबिश के बाद आशंका है कि जल्द ही तेजस्वी यादव की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। तेजस्वी यादव की मुश्किलें बढ़ीं तो उनकी जगह लालू परिवार से ही किसी को डिप्टी सीएम का पद देने की उम्मीद है। इतिहास में देखें तो याद होगा, जब लालू प्रसाद यादव चारा घोटाला मामले में जेल जा रहे थे तब आरजेडी के एक एमएलसी रवीन्द्र तांती ने त्यागपत्र दिया था। वे विधायक कोटे से एमएलसी थे।
रवीन्द्र तांती का इस्तीफा करवाकर लालू प्रसाद यादव ने वह सीट राबड़ी देवी को दी थी। इसके बाद लालू प्रसाद की जगह राबड़ी देवी ने शासन किया। अब एक बार फिर राजद के अंदरखाने यह चर्चा तेज है कि तेजस्वी के बाद अगर लालू परिवार के किसी सदस्य को आगे लाने की बात हुई तो वो उनकी पत्नी राजश्री होंगी। हालांकि पार्टी और लालू परिवार से जुड़े लोग इसपर खुलकर कुछ भी कहने से बच रहे हैं।
राजश्री ही क्यों…बता रहे हैं एक्सपर्ट
वरिष्ठ पत्रकार संतोष कुमार कहते हैं कि हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के आसार बढ़ रहे हैं तो वे अपनी पत्नी को मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं। इसलिए उन्होंने एक विधायक की सीट भी खाली करायी। झारखंड में बिहार का पैटर्न शुरू होने जा रहा है।
संतोष कहते हैं कि लालू प्रसाद जब जेल जाने लगे तो राबड़ी देवी को एमएलसी बनाया, मुख्यमंत्री बनाया था। बिहार में तेजस्वी यादव पर भी दबिश बढ़ रही है। तेजस्वी की गिरफ्तारी अगर होती है तो अपनी पत्नी को डिप्टी सीएम बना सकते हैं। दूसरे पर भरोसा करने का नतीजा नीतीश कुमार देख चुके हैं, जीतन राम मांझी को सीएम बनाकर। मांझी को उन्हें हटाना पड़ा था। कुछ दिन पहले ललन सिंह को भी जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटना पड़ा या हटाना पड़ा।
नीतीश कुमार क्यों हैं भाजपा के टारगेट पर
एक और बात की चर्चा खूब है कि नीतीश कुमार और लालू प्रसाद व तेजस्वी यादव के बीच बातचीत बंद हो जा रही है। राहुल गांधी को बातचीत के लिए बीच-बचाव करना पड़ रहा है। बीजेपी यह देख रही है कि वह जब नीतीश कुमार के साथ थी, तभी बिहार की 40 लोकसभा सीट में से 39 जीत पाई थी।
बीजेपी का टारगेट देश में 400 सीटें हासिल करना है। इस लिहाज से वह नीतीश कुमार को बड़ा प्रलोभन दे सकती है। पिछली बार 2017 में नीतीश कुमार, आरजेडी से जब अलग हुए तब यह कहा गया था कि ‘तेजस्वी यादव को अपने आप को पाक साफ साबित करना चाहिए, अपने खिलाफ लगे सीबीआई के आरोपों से बेदाग निकलकर आना चाहिए।’
तब तेजस्वी यादव ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा था कि ‘ये 28 साल के नौजवान से डरते हैं, जिन आरोपों की बात विपक्ष कह रहा है, तब उनकी उम्र 13-14 साल की थी। ऐसे में क्या 13-14 साल की उम्र में घोटाला करेंगे? उनकी पार्टी इस मुद्दे पर नहीं झुकेगी और जरूरत पड़ने पर जनता के बीच जाएंगे।’
राजद कह रही-भाजपा को सोच लेना चाहिए
विपक्षी नेताओं पर ईडी के बढ़ते दबाव को लेकर प्रदेश प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी कहते हैं कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है, विपक्षी नेताओं को जांच एजेंसियों के माध्यम से परेशान करने का खेल शुरू हो चुका है। जो राजनीतिक लड़ाई नहीं लड़ सकते, वे विपक्षी नेताओं को परेशान करने में लगे हैं। जनता सब देख रही है। राजनीति इसी तरह से होगी तो बीजेपी को सोच लेना चाहिए कि जब वह सत्ता से बेदखल होगी तो क्या होगा।
केजरीवाल का मामला आखिर सोरेन से कैसे अलग है?
सूत्रों ने हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि केजरीवाल का ईडी समन को बार-बार नजरअंदाज करना जांच अधिकारी को उन्हें कस्टडी में लेने के विकल्प देता है। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ईडी के 7 समन को नजरअंदाज किया है लेकिन एजेंसी ने अब तक उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की है। इसकी बड़ी वजह है कि सोरेन के खिलाफ कार्रवाई से संभव है कि कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ जाए। लेकिन दिल्ली में एजेंसी के सामने ऐसी चिंता नहीं है क्योंकि राष्ट्रीय राजधानी में कानून-व्यवस्था सीधे-सीधे केंद्र के अधीन आता है।
केजरीवाल का ईडी को जवाब
केजरीवाल ने ईडी के समन को राजनीति से प्रेरित और कानून के खिलाफ बताते हुए एजेंसी के सामने पेश होने से इनकार कर दिया है। ईडी को भेजे जवाब में उन्होंने एजेंसी से पूछा है कि वह स्पष्ट करे कि उन्हें समन एक गवाह के तौर पर भेजा गया है या फिर संदिग्ध के तौर पर। उन्होंने ईडी को लिखे खत में आरोप लगाया है कि उसका समन दुर्भावनापूर्ण है और एजेंसी खुद ही जज, ज्यूरी और एग्जिक्यूशनर की भूमिका निभा रही है। केजरीवाल ने ईडी को कहा है कि वह सवालों की लिस्ट भेज दे, वह उनका जवाब दे देंगे।
चौथी बार समन जारी कर सकती है ईडी
दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में बार-बार तलब किए जाने के बावजूद अरविंद केजरीवाल के पेश नहीं होने पर एजेंसी अब उनके जवाब का अध्य्यन कर रही है। सूत्रों के मुताबिक ईडी अब दिल्ली सीएम को चौथा समन भेज सकती है।
‘आज हो जाएंगे गिरफ्तार’, AAP मचा रही हल्ला
आम आदमी पार्टी बुधवार देर रात से ही हल्ला मचा रही है कि अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार किए जाने की पूरी तैयारी है। दिल्ली सरकार की मंत्री आतिशी ने तो सूत्रों के हवाले से आधी रात को दावा किया, ‘खबर आ रही है कि ईडी कल (गरुवार) सुबह अरविंद केजरीवाल के घर पर छापा मारने जा रही है। उनकी गिरफ्तारी हो सकती है।’ आतिशी के पोस्ट के दो मिनट बाद ही एक और मंत्री सौरभ भारद्वाज ने भी पोस्ट किया, ‘सुनने में आ रहा है कल सुबह मुख्यमंत्री केजरीवाल जी के घर ED पहुँच कर उन्हें गिरफ़्तार करने वाली है।’







