संशोधित नागरिकता कानून या CAA के नियम लोकसभा चुनाव की घोषणा से ‘काफी पहले’ अधिसूचित किए जाने से जुड़े एक सरकारी अधिकारी के बयान के बीच कांग्रेस ने बुधवार को कहा कि अब यह साफ हो गया है कि इस कानून का मकसद चुनाव से ठीक पहले मतदाताओं के ध्रुवीकरण के लिए इसे एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करना है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने दिसंबर 2019 में संसद में विवादास्पद कानून को जबरदस्ती प्रस्तुत किया था।
‘9 बार विस्तार मांगा गया’
रमेश ने कहा कि संसदीय प्रक्रियाओं के मुताबिक कानून लागू करने के लिए नियम 6 महीने के भीतर तैयार हो जाने चाहिए थे, लेकिन नियमों को तैयार करने के लिए 9 बार विस्तार मांगा गया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘अब हमें बताया गया है कि नियमों को लोकसभा चुनाव से पहले अधिसूचित किया जाएगा। इससे यह साफ है कि इसका उद्देश्य चुनाव से ठीक पहले मतदाताओं के ध्रुवीकरण के लिए इसे एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करना था।’ इससे पहले, कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि जिस देश के संविधान की प्रस्तावना में धर्मनिरपेक्षता निहित है, वहां धर्म नागरिकता का आधार नहीं हो सकता।
CAA में आखिर ऐसा क्या है?
बता दें कि मोदी सरकार द्वारा लाये गये CAA के तहत बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के उन गैर मुसलमान प्रवासियों- हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध , पारसी और ईसाई धर्म के लोगों को भारतीय नागरिकता दी जाएगी जो उत्पीड़न के चलते 31 दिसंबर 2014 तक भारत आ गये थे। दिसंबर 2019 में संसद द्वारा यह कानून पारित होने और बाद में राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद देश के कुछ हिस्सों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। एक सीनियर सरकारी अफसर ने मंगलवार को कहा था कि संशोधित नागरिकता कानून, 2019 के नियम लोकसभा चुनाव की घोषणा से ‘काफी पहले’ अधिसूचित किए जाएंगे।
मनीष तिवारी ने कही ये बात
सरकारी अफसर के बयान पर मीडिया की एक खबर को संलग्न करते हुए तिवारी ने एक्स पर कहा, ‘जिस देश के संविधान की प्रस्तावना में धर्मनिरपेक्षता निहित है, क्या धर्म नागरिकता का आधार हो सकता है, चाहे वह भौगोलिक सीमाओं के दायरे में हो या उनसे बाहर? इसका जवाब है नहीं। दिसंबर 2019 में जब मैंने लोकसभा में CAA विधेयक के विरोध का नेतृत्व किया तो यह मेरे तर्क का केंद्र बिंदु था। यह सुप्रीम कोर्ट के समक्ष चुनौती में मुख्य प्रश्न है।’
टीएमसी ने क्या कहा?
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की टीएमसी ने कहा कि सीएए बंगाल में लागू नहीं होगा. शशि पांजा ने कहा, ”केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर बंगाल में होते तो सीएए को लेकर अलग बयान देते हैं. ठाकुर दिल्ली में होते हैं तो बयान बदल लेते हैं. हमारी चीफ ममता बनर्जी साफ कर चुकी है कि सीएए को राज्य में लागू नहीं किया जाएगा.”
मुस्लिम, दलित और गरीब लोगों के लिए अन्याय होगा- असदुद्दीन ओवैसी
सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सीएए को लेकर केंद्र सरकार पर हमला किया. ओवैसी ने कहा, ”सीएए संविधान विरोध है. कानून को धर्म के आधार पर बनाया गया है. सीएए को एनपीआर-एनआरसी के साथ समझा जाना चाहिए. इसके तहत आपको नागरिकता साबित करना होगी. ऐसा हुआ तो मुस्लिम, दलित और गरीब लोगों के लिए अन्याय होगा.”
तेजस्वी यादव क्या बोले?
डिप्टी सीएम और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि सीएए को लोकसभा चुनाव देखते हुए मुद्दा बनाने की कोशिश की जा रही है. ये सीएए संविधान विरोधी है. कानून को धर्म के आधार पर बनाया गया है.
शफीकुर्रहमान बर्क ने क्या कहा?
समाजवादी पार्टी (SP) के सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने कहा कि ये इनका (BJP) प्रोपेगेंडा है. इससे फायदा होने की जगह मुल्क के हालात ज्यादा खराब होंगे.
बीजेपी ने दिया ये जवाब
टीएमसी के बयान पर बीजेपी नेता सामिक भट्टाचार्य ने पलटवार किया. भट्टाचार्य ने कहा कि टीएमसी वोट बैंक की राजनीति के चलते सीएए का विरोध कर रही है.
अमित शाह ने क्या कहा था?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 27 दिसंबर को सीएए को लागू करने की बात करते हुए सीएम ममता बनर्जी पर निशाना साधा था. उन्होंने कोलकाता में पार्टी की बैठक को संबोधित करते हुए कहा था, ”सीएए के कार्यान्वयन को कोई नहीं रोक सकता क्योंकि यह देश का कानून है. ममता बनर्जी इस मुद्दे पर लोगों को गुमराह कर रही है.”
सीएए में क्या प्रावधान है?
सीएए (Citizenship Amendment Act) में बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर, 2014 तक भारत आए गैर-मुस्लिम यानी हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई को भारत की राष्ट्रीयता प्रदान करने का प्रावधान है.
बता दें कि दिसंबर 2019 में सीएए से जुड़े विधेयक को संसद ने मंजूरी दी थी. फिर राष्ट्रपति ने भी बाद में इसे मंजूरी दे दी थी. इसके बाद इसके विरोध में कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए थे.







