दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह को 27 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में कोर्ट ने भेज दिया. हिरासत पर सुनवाई के दौरान सिंह के शुगर पेशेंट होने के कारण दवाइयों के लिए अलग से एक एप्लिकेशन फाइल की गई.
कोर्ट ने 10 अक्टूबर को दिल्ली शराब नीति मामले में गिरफ्तार संजय सिंह की ईडी की हिरासत 13 अक्टूबर तक बढ़ा दी थी. हिरासत का समय खत्म होने पर उन्हें आज फिर कोर्ट में पेश किया गया. दरअसल ईडी ने आरोप लगाया है कि दिल्ली आबकारी नीति में अनियमितताएं की गईं है.
राजनीतिक बयानबाजी मत कीजिए: अदालत
आप नेता को न्यायिक हिरासत में भेजे हुए अदालत ने कहा कि अगर मुकदमे के संबंध में कुछ कहना है तो कहिए। यहां मोदी और अदानी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी मत कीजिए।
अदालत ने यह टिप्पणी तब की जब संजय सिंह ने पेश पर जाने के दौरान कहा कि मोदी अदाणी के पीएम हैं। यह भी कहा कि अडानी के घोटाले पर मैंने ईडी जांच की शिकायत की थी ईडी को उस पर तो जांच हुई नहीं। अदालत ने संजय सिंह को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
कब होगी घोटालों की जांच
पेशी के लिए जाते वक्त आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए केंद्र और पीएम मोदी पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि मोदी जी अदानी के पीएम हैं। अडानी के घोटाले पर मैंने जांच की शिकायत की थी ईडी को उस पर तो जांच हुई नहीं। पीएम बताएं कि अदानी के घोटालों की जांच कब होगी।
दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा मामला
पूरे मामले में संजय सिंह ने अपनी गिरफ्तारी के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है. सिंह के वकील ने मुख्य जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति संजीव नरूला की पीठ से तुरंत सुनवाई का अनुरोध करते हुए कहा कि ईडी ने उन्हें गिरफ्तारी का उचित आधार नहीं बताया है.
क्या आरोप है?
ईडी ने (4 अक्टूबर) को आप नेता संजय सिंह के सरकारी आवास पर कई घंटों की छापेमारी के बाद गिरफ्तार किया था. इसके अगले दिन यानी 5 अक्टूबर को राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें पांच दिनों की ईडी हिरासत में भेज दिया था. केंद्रीय जांच एजेंसी ने इस दौरान दावा किया था कि कुछ डीलर को फायदा पहुंचाने के लिए कथित तौर पर रिश्वत ली गई है.
दिल्ली शराब नीति मामले में ही आप नेता और पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया भी पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं. बता दें कि दिल्ली सरकार ने 17 नवंबर 2021 को आबकारी नीति लागू की थी लेकिन गड़बड़ी आरोपों के बीच सितंबर 2022 के अंत में इसे वापस ले गया था.







